आल-इमरान · 58/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ ۝٥٨
Zaalika natloohu `alaika minal Aayaati wa Zikril Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذَٰلِكَ (ज़ालिक): यह, वह चीज़।
  • نَتْلُوهُ (नत्लूहु): हम इसे पढ़कर सुनाते हैं।
  • الْآيَاتِ (आयात): निशानियाँ, स्पष्ट प्रमाण, चमत्कार।
  • الذِّكْرِ (ज़िक्र): वह चीज़ जो याद दिलाए, नसीहत, उपदेश।
  • الْحَكِيمِ (हकीम): बुद्धिमत्ता और तत्वदर्शिता से भरा हुआ, जो हर प्रकार की कमी और बुराई से पाक हो, अटल और सत्य।

विस्तृत व्याख्या:

यह वही बात है जो हम (अल्लाह) आप (ऐ नबी!) को सुना रहे हैं — अर्थात हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम), उनकी माँ मरियम और उनके साथियों (हवारियों) का वृत्तांत। यह किसी इंसान का बनाया हुआ किस्सा नहीं, बल्कि हमारी ओर से जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के माध्यम से उतारा गया सत्य है। ये वृत्तांत स्पष्ट निशानियाँ हैं जो आपकी रिसालत (पैग़म्बरी) की सच्चाई पर दलील देते हैं, क्योंकि इनकी जानकारी आपको किसी किताब या शिक्षक से नहीं मिली थी, बल्कि यह वही ज्ञान है जो अल्लाह ने आप पर प्रकट किया।

यह "ज़िक्र हकीम" (बुद्धिमत्तापूर्ण अनुस्मारक) है — अर्थात यह क़ुरआन, जो हर बात में अटल और पुख्ता है, जिसमें कोई विरोधाभास नहीं, कोई कमी नहीं, और जो सत्य और असत्य के बीच स्पष्ट रूप से फ़र्क़ करता है। यह वह किताब है जिसमें कोई संदेह नहीं, और जो पिछली उम्मतों के हालात को इसलिए बयान करती है ताकि लोग सीख लें और सीधे रास्ते पर चलें। यह नसीहत और याद दिलाने वाली चीज़ है जो दिलों को जगाती है और अक़्ल को सही रास्ता दिखाती है।


फ़ायदे और सबक़:

  1. क़ुरआन की सच्चाई का प्रमाण: यह आयत बताती है कि क़ुरआन में बताए गए पिछले नबियों के हालात — जिनकी जानकारी नबी ﷺ को न तो किसी किताब से थी और न किसी इंसान से — स्वयं इस बात का प्रमाण हैं कि यह किताब अल्लाह की ओर से है।
  2. क़ुरआन की महानता: क़ुरआन को "ज़िक्र हकीम" कहा गया, यानी यह ऐसी किताब है जो हर प्रकार की कमी से पाक है। इसमें कोई विरोधाभास नहीं, कोई ग़लती नहीं, और यह हर युग और हर जगह के लिए मार्गदर्शन है।
  3. सत्य की पहचान: यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य की पहचान अल्लाह की निशानियों से होती है। जो चीज़ अल्लाह की ओर से होती है, वह स्पष्ट, अटल और दिलों को संतुष्टि देने वाली होती है।
  4. नबी ﷺ की रिसालत पर विश्वास: इस आयत से मुसलमानों का विश्वास और मज़बूत होता है कि नबी ﷺ सच्चे पैग़म्बर हैं, क्योंकि उन्होंने बिना किसी सांसारिक स्रोत के ऐसी बातें बताईं जो केवल अल्लाह ही जान सकता है।
  5. क़ुरआन से जुड़ाव की प्रेरणा: जब हमें पता चलता है कि यह किताब हकीम (बुद्धिमत्तापूर्ण) है और इसमें हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है, तो हमें इसे पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की और अधिक रुचि पैदा होनी चाहिए।


📜 आयत 56-60 — आल-इमरान

56فَأَمَّا الَّذِينَ كَفَرُوا فَأُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
तब (उस दिन) जिन बातों में तुम (दुनिया) में झगड़े करते थे (उनका) तुम्हारे दरमियान फ़ैसला कर दूंगा पस जिन लोगों ने कुफ़्र इख्तेयार किया उनपर दुनिया और आख़िरत (दोनों में) सख्त अज़ाब करूंगा और उनका कोई मददगार न होगा
57وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता
58ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं
59إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया
60الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना
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अनुवाद — आल-इमरान 58

सूरा आल-इमरान आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे…

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Tuesday, August 18, 2026

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