आल-इमरान · 59/200
अनुवाद उच्चारण — सूरा आल-इमरान
إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ ۝٥٩
Inna masala `Eesaa `indal laahi kamasali Aadama khalaqahoo min turaabin summa qaala lahoo kun fayakoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَثَل: उदाहरण, स्थिति, हालत।
  • خَلَقَهُ: उसे पैदा किया।
  • مِن تُرَابٍ: मिट्टी से।
  • كُن: हो जा।
  • فَيَكُونُ: तो वह हो जाता है (तुरंत हो जाता है)।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ईसा (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश की स्थिति, जो बिना पिता के हुई, अल्लाह के यहाँ बिल्कुल आदम (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश के समान है। आदम को अल्लाह ने बिना पिता और बिना माँ के मिट्टी से पैदा किया, फिर उनसे कहा "हो जा", और वह हो गए। यानी जिस तरह आदम का बिना माता-पिता के पैदा होना उनके बन्दा होने में कोई संदेह पैदा नहीं करता, बल्कि वे अल्लाह के आदरणीय नबी और बन्दे हैं, उसी तरह ईसा (अलैहिस्सलाम) का बिना पिता के पैदा होना भी उनके बन्दे और रसूल होने के रुतबे को कम नहीं करता।

जो लोग ईसा (अलैहिस्सलाम) को बिना पिता के पैदा होने की वजह से अल्लाह का बेटा या खुदा कहते हैं, उनकी यह दलील बिल्कुल बेबुनियाद है। क्योंकि अगर बिना पिता के पैदा होना खुदाई की दलील होती, तो आदम (अलैहिस्सलाम) को भी खुदा या खुदा का बेटा कहना चाहिए, जो बिना माँ और बिना पिता दोनों के पैदा हुए। हालाँकि सभी लोग (मुसलमान, ईसाई और यहूदी) इस बात पर इत्तेफ़ाक रखते हैं कि आदम अल्लाह के बन्दे और नबी थे। इसलिए ईसा (अलैहिस्सलाम) भी अल्लाह के बन्दे और रसूल हैं, न कि खुदा या खुदा के बेटे। अल्लाह की कुदरत यह है कि वह जब किसी चीज़ को पैदा करना चाहता है, तो बस कहता है "हो जा", और वह चीज़ फौरन हो जाती है। उसके लिए किसी साधन या वजह की ज़रूरत नहीं होती।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की कुदरत असीम है, वह जब चाहता है, किसी भी चीज़ को बिना किसी सामान्य ज़रिये के पैदा कर सकता है। इसलिए हमें अल्लाह की कुदरत पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए।
  2. ईसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह के नबी और बन्दे हैं, उन्हें खुदा या खुदा का बेटा कहना बिल्कुल ग़लत और बातिल है। इस आयत से उनकी इज़्ज़त और रुतबा साबित होता है कि वे अल्लाह के पैग़म्बर हैं।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि किसी भी इंसान की फज़ीलत और बुज़ुर्गी उसके पैदाइश के तरीक़े से नहीं, बल्कि अल्लाह की इताअत और उसके दीन पर चलने से है।
  4. अल्लाह के हुक्म (कुन) की ताक़त का ज़िक्र हमें याद दिलाता है कि जब अल्लाह किसी काम का इरादा कर लेता है, तो उसे कोई रोक नहीं सकता। इसलिए हमें हर मामले में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी तक़दीर पर राज़ी रहना चाहिए।


📜 आयत 57-61 — सूरा आल-इमरान

57وَأَمَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فَيُوَفِّيهِمْ أُجُورَهُمْ ۗ وَاللَّهُ لَا يُحِبُّ الظَّالِمِينَ
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए तो ख़ुदा उनको उनका पूरा अज्र व सवाब देगा और ख़ुदा ज़ालिमों को दोस्त नहीं रखता
58ذَٰلِكَ نَتْلُوهُ عَلَيْكَ مِنَ الْآيَاتِ وَالذِّكْرِ الْحَكِيمِ
(ऐ रसूल) ये जो हम तुम्हारे सामने बयान कर रहे हैं कुदरते ख़ुदा की निशानियॉ और हिकमत से भरे हुये तज़किरे हैं
59إِنَّ مَثَلَ عِيسَىٰ عِندَ اللَّهِ كَمَثَلِ آدَمَ ۖ خَلَقَهُ مِن تُرَابٍ ثُمَّ قَالَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
ख़ुदा के नज़दीक तो जैसे ईसा की हालत वैसी ही आदम की हालत कि उनको को मिट्टी का पुतला बनाकर कहा कि 'हो जा' पस (फ़ौरन ही) वह (इन्सान) हो गया
60الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُن مِّنَ الْمُمْتَرِينَ
(ऐ रसूल ये है) हक़ बात (जो) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ़ से (बताई जाती है) तो तुम शक करने वालों में से न हो जाना
61فَمَنْ حَاجَّكَ فِيهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْا نَدْعُ أَبْنَاءَنَا وَأَبْنَاءَكُمْ وَنِسَاءَنَا وَنِسَاءَكُمْ وَأَنفُسَنَا وَأَنفُسَكُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَتَ اللَّهِ عَلَى الْكَاذِبِينَ
फिर जब तुम्हारे पास इल्म (कुरान) आ चुका उसके बाद भी अगर तुम से कोई (नसरानी) ईसा के बारे में हुज्जत करें तो कहो कि (अच्छा मैदान में) आओ हम अपने बेटों को बुलाएं तुम अपने बेटों को और हम अपनी औरतों को (बुलाएं) और तुम अपनी औरतों को और हम अपनी जानों को बुलाएं ओर तुम अपनी जानों को
आल-इमरानकुरान सूची
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अनुवाद — आल-इमरान 59

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Monday, September 28, 2026

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