अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِمَ (लिमा): क्यों, किस कारण से
- تَكْفُرُونَ (तक्फुरून): तुम इनकार करते हो, झुठलाते हो
- بِآيَاتِ اللَّهِ (बिआयातिल्लाह): अल्लाह की निशानियों और उसकी प्रकट की हुई आयतों के साथ
- تَشْهَدُونَ (तश्हदून): तुम गवाही देते हो, तुम्हें यक़ीन है और तुम जानते हो
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला अपने नबी मुहम्मद ﷺ के ज़रिए अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "ऐ किताब वालो! तुम अल्लाह की आयतों और उसकी निशानियों को क्यों झुठलाते हो और उनका इनकार क्यों करते हो?" ये आयतें वो हैं जो अल्लाह ने अपने रसूलों पर उतारीं, जिनमें तौरात और इंजील में मौजूद वो स्पष्ट निशानियाँ और गुण शामिल हैं जो मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत की गवाही देती हैं। इन किताबों में उनके आने की ख़ुशख़बरी दी गई थी और उनके नाम, गुण और आने के समय का ज़िक्र मौजूद था।
अल्लाह उनसे कहता है: तुम ख़ुद जानते हो और गवाही देते हो कि ये बातें तुम्हारी किताबों में लिखी हुई हैं, फिर भी तुम हठ और ज़िद की वजह से इन्हें छिपाते हो और मुहम्मद ﷺ पर ईमान नहीं लाते। तुम्हारा ये इनकार किसी अज्ञानता की वजह से नहीं, बल्कि सच्चाई जानते हुए भी उसे ठुकराने की वजह से है। तुम्हारे पास इल्म है, फिर भी तुम अल्लाह की आयतों का इनकार करते हो, जबकि तुम ख़ुद गवाह हो कि ये सच हैं। ये तुम्हारी सबसे बड़ी ग़लती और सरकशी है।
फ़ायदे और सबक़:
- इस आयत से पता चलता है कि इल्म और जानकारी के बावजूद सच्चाई को न मानना सबसे बड़ा ज़ुल्म और गुमराही है। अल्लाह के पास इंसान का इल्म उसके हुज्जत (प्रमाण) के ख़िलाफ़ गवाह बनेगा।
- अल्लाह तआला ने अपने नबी ﷺ की नबुव्वत की पुष्टि पहले की किताबों में भी की थी, ताकि लोगों पर हुज्जत क़ायम हो जाए और कोई बहाना न बचे।
- ये आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कबूल करने में देरी नहीं करनी चाहिए, चाहे वो किसी भी ज़रिए से मिले। जब दिल को यक़ीन हो जाए तो फ़ौरन ईमान लाना चाहिए।
- अल्लाह की आयतों को छिपाना और जानते हुए उनका इनकार करना बहुत बड़ा गुनाह है, जिससे बचना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
- ये आयत हमें बताती है कि क़ुरआन और पहले की किताबों में जो भी सच्चाई है, वो एक ही अल्लाह की तरफ़ से है, और इस्लाम ही वो दीन है जिसे अल्लाह ने सब नबियों के ज़रिए भेजा।
📜 आयत 68-72 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 70
सूरा आल-इमरान आयत 70 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसको समझते (भी) नहीं ऐ अहले किताब तुम ख़ुदा…सूरा आयत 70/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 68–72. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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