अर-रूम · 4/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
فِي بِضْعِ سِنِينَ ۗ لِلَّهِ الْأَمْرُ مِن قَبْلُ وَمِن بَعْدُ ۚ وَيَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ ۝٤
Fee bid`i sineen; lillaahil amru min qablu wa mim ba`d; wa yawma`iziny yafrahul mu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर अम्र का एख्तेयार ख़ुदा ही को है और उस दिन ईमानदार लोग ख़ुदा की मदद से खुश हो जाएँगे

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بِضْعِ سِنِينَ: तीन से दस वर्षों के बीच की अवधि।
  • لِلَّهِ الْأَمْرُ مِن قَبْلُ وَمِن بَعْدُ: पहले और बाद का सारा मामला अल्लाह ही के हाथ में है।
  • يَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ: उस दिन ईमानवाले खुश होंगे।

तफसीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में रूम (बाइज़ेंटाइन साम्राज्य) और फारस (ईरान) के बीच हुई जंग का ज़िक्र किया है। उस समय फारस की सेना ने रूम को शिकस्त दी थी, और यह घटना अरब प्रायद्वीप के नज़दीक "अदना अल-अर्द" (शाम की सबसे नज़दीकी ज़मीन) पर हुई थी। मुशरिकीन मक्का इस पर बहुत खुश थे, क्योंकि फारस के लोग आग की पूजा करने वाले थे और उन्हें रूम के ईसाइयों (जो अहले-किताब थे) पर जीत मिली थी। मुशरिकीन ने मुसलमानों से कहा कि जिस तरह फारस ने रूम को हराया, उसी तरह हम तुम्हें हरा देंगे।

तब अल्लाह ने यह आयत उतारी कि रूम वालों को फारस पर तीन से दस साल के बीच फिर से जीत मिलेगी। यह एक बड़ा भविष्यवाणी था, क्योंकि उस वक़्त रूम इतना कमज़ोर हो चुका था कि कोई यक़ीन नहीं कर सकता था कि वे इतनी जल्दी जीत हासिल कर लेंगे। लेकिन अल्लाह की क़ुदरत से ठीक सात साल बाद रूम ने फारस को हरा दिया, और यह घटना बद्र की जंग के दिन हुई। उसी दिन मुसलमानों को भी बद्र में फ़तह मिली, इसलिए ईमानवाले दोहरी खुशी में खुश हुए।

इस आयत में अल्लाह तआला यह सिखा रहा है कि पहले और बाद का हर मामला अल्लाह के हाथ में है। जीत और हार, उत्थान और पतन — सब कुछ अल्लाह की मर्ज़ी से होता है। वह जिसे चाहता है इज़्ज़त देता है और जिसे चाहता है ज़िल्लत देता है। वह अज़ीज़ (सब पर ग़ालिब) है और रहीम (अपने बंदों पर मेहरबान) है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है। जब अल्लाह किसी बात का वादा करता है, तो वह पूरी होकर रहती है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। मुसलमानों को चाहिए कि वे हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी मदद का इंतज़ार करें। जिस तरह रूम की जीत का वादा पूरा हुआ, उसी तरह अल्लाह ने मुसलमानों को भी बद्र में फ़तह दी। यह हमारे लिए सबक़ है कि जब हम अल्लाह के दीन की मदद करते हैं, तो अल्लाह भी हमारी मदद करता है। आज भी अगर हम सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ लौटें, उसकी इबादत करें और उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलें, तो अल्लाह हमें इज़्ज़त देगा और हमारे दुश्मनों पर हमें ग़ालिब बनाएगा। यही इस आयत का पैग़ाम है — अल्लाह पर भरोसा रखो, उसके वादे पर यक़ीन रखो, और सब्र के साथ उसकी मदद का इंतज़ार करो।



📜 आयत 2-6 — अर-रूम

2غُلِبَتِ الرُّومُ
(यहाँ से) बहुत क़रीब के मुल्क में रोमी (नसारा अहले फ़ारस आतिश परस्तों से) हार गए
3فِي أَدْنَى الْأَرْضِ وَهُم مِّن بَعْدِ غَلَبِهِمْ سَيَغْلِبُونَ
मगर ये लोग अनक़रीब ही अपने हार जाने के बाद चन्द सालों में फिर (अहले फ़ारस पर) ग़ालिब आ जाएँगे
4فِي بِضْعِ سِنِينَ ۗ لِلَّهِ الْأَمْرُ مِن قَبْلُ وَمِن بَعْدُ ۚ وَيَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ
क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर अम्र का एख्तेयार ख़ुदा ही को है और उस दिन ईमानदार लोग ख़ुदा की मदद से खुश हो जाएँगे
5بِنَصْرِ اللَّهِ ۚ يَنصُرُ مَن يَشَاءُ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वह जिसकी चाहता है मदद करता है और वह (सब पर) ग़ालिब रहम करने वाला है
6وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(ये) ख़ुदा का वायदा है) ख़ुदा अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं किया करता मगर अकसर लोग नहीं जानते हैं
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अर-रूम 4

सूरा अर-रूम आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्योंकि (इससे) पहले और बाद (ग़रज़ हर ज़माने में) हर…

सूरा आयत 4/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए