अर-रूम · 58/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ ۝٥٨
Wa laqad darabnaa linnaasi fee haazal Quraani min kulli masal; wa la`in ji`tahum bi aayatil la yaqoolannal lazeena kafaroo in antum illaa mubtiloon
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَرَبْنَا مَثَلًا: हमने उदाहरण दिया, बयान किया
  • مُبْطِلُونَ: बातिल (झूठ) पर होने वाले, असत्य पर चलने वाले

तफसीर:

अल्लाह तआला ने इस पवित्र कुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार की मिसालें बयान की हैं — ताकि उन पर हुज्जत (प्रमाण) क़ायम हो जाए और सत्य (हक़) उन पर स्पष्ट हो जाए। अल्लाह ने अपने इस कलाम में तरह-तरह के उदाहरण, क़िस्से, नसीहतें और तर्क पेश किए हैं, ताकि लोग समझें, विचार करें और अपने रब की तरफ़ रुजू करें। यह कुरआन अपने आप में एक जीता-जागता मौजिज़ा है, जो हर ज़माने में इंसानों के लिए हिदायत का ज़रिया है।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: ऐ रसूल! अगर आप इन काफ़िरों के पास कोई भी निशानी (मौजिज़ा) लेकर आएँ, तो भी ये ईमान नहीं लाएँगे। बल्कि ये ज़िद और हठधर्मी की वजह से कहेंगे: "तुम लोग (आप और आपके साथी) बस बातिल (झूठ) पर हो।" यानी जो कुछ तुम लेकर आए हो, वह सब जादू और झूठ है।

यह उनकी हठधर्मिता और सत्य से मुँह मोड़ने की सबसे बड़ी दलील है। जब इंसान के दिल में अंधेरा और अहंकार भर जाता है, तो वह साफ़ सूरज की रोशनी को भी नहीं देख पाता। यही हाल उन काफ़िरों का था — वे सच्चाई को देखते हुए भी उसे नकार देते थे, क्योंकि उनका मक़सद हक़ को मानना नहीं, बल्कि अपनी बड़ाई और रिवाजों पर अड़े रहना था।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हिदायत अल्लाह के हाथ में है — जिसे वह चाहता है समझाता है। हमारा काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना है, जैसा कि रसूलुल्लाह ﷺ ने पूरी वफ़ादारी से पहुँचाया। और जो लोग हक़ से मुँह मोड़ते हैं, उनका अंजाम अल्लाह के सामने है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि कुरआन की हर आयत, हर मिसाल इंसान की भलाई के लिए है। अल्लाह ने इस किताब में वह सब कुछ रख दिया है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचा सकता है। काश! लोग इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें — तो उनकी ज़िंदगी बदल जाए और वे अल्लाह की रहमत के हक़दार बन जाएँ।

🎧 सुनें

📜 आयत 56-60 — अर-रूम

56وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَالْإِيمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ فِي كِتَابِ اللَّهِ إِلَىٰ يَوْمِ الْبَعْثِ ۖ فَهَٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلَٰكِنَّكُمْ كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और ईमान दिया गया है जवाब देगें कि (हाए) तुम तो ख़ुदा की किताब के मुताबिक़ रोज़े क़यामत तक (बराबर) ठहरे रहे फिर ये तो क़यामत का ही दिन है मगर तुम लोग तो उसका यक़ीन ही न रखते थे
57فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
तो उस दिन सरकश लोगों को न उनकी उज्र माअज़ेरत कुछ काम आएगी और न उनकी सुनवाई होगी
58وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
59كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग निरे दग़ाबाज़ हो जो लोग समझ (और इल्म) नहीं रखते उनके दिलों पर नज़र करके ख़ुदा यू तसदीक़ करता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
60فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है और (कहीं) ऐसा न हो कि जो (तुम्हारी) तसदीक़ नहीं करते तुम्हें (बहका कर) ख़फ़ीफ़ करे दें
अर-रूमकुरान सूची
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58आयत

अनुवाद — अर-रूम 58

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Tuesday, August 18, 2026

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