अर-रूम · 59/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ ۝٥٩
Kazaalika yatba`ul laahu `alaa quloobil lazeena laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग निरे दग़ाबाज़ हो जो लोग समझ (और इल्म) नहीं रखते उनके दिलों पर नज़र करके ख़ुदा यू तसदीक़ करता है (कि ये ईमान न लाएँगें)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَطْبَعُ: मुहर लगाना, सील करना (यहाँ अर्थ है दिल को सत्य समझने से बंद कर देना)
  • قُلُوبِ: दिल (बहुवचन)
  • لَا يَعْلَمُونَ: जो नहीं जानते (अर्थात जो अल्लाह की तौहीद और उसकी आयतों की सच्चाई को नहीं समझते)

तफसीर (व्याख्या):

ऐ रसूल! जिस प्रकार इन काफिरों के दिलों पर मुहर लगा दी गई है, क्योंकि उन्होंने आपके पास आने वाली सच्ची आयतों और निशानियों को देखकर भी ईमान नहीं लाया, ठीक उसी प्रकार अल्लाह उन सभी लोगों के दिलों पर मुहर लगा देता है जो उसकी तौहीद (एकता) और उसकी शक्ति के प्रमाणों को जानने से इनकार करते हैं। यह मुहर उनकी अपनी हठधर्मिता और अहंकार का परिणाम है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति सत्य को देखकर भी उसे ठुकरा देता है, तो उसका दिल धीरे-धीरे अंधा हो जाता है और फिर वह किसी भी नसीहत या चेतावनी को स्वीकार नहीं कर पाता।

यह अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) है कि जो लोग जानबूझकर सत्य से मुँह मोड़ते हैं, उनके दिलों पर वह मुहर लगा देता है, जिससे वे हिदायत की रोशनी को कभी नहीं देख पाते। यह उनके लिए सबसे बड़ी सजा है कि उन्हें उनके ही अंधेरे में छोड़ दिया जाता है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि हम अपने दिलों को सत्य के लिए खुला रखें। अल्लाह की आयतें, कुरआन की आयतें और इस कायनात में बिखरी हुई निशानियाँ — ये सब हमें उसकी तरफ बुला रही हैं। जो व्यक्ति इन पर गौर करता है और उनसे सीख लेता है, उसका दिल रोशन होता जाता है। लेकिन जो व्यक्ति इनसे आँखें मूँद लेता है, वह धीरे-धीरे उस मुहर का शिकार बन जाता है जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।

आओ, हम अपने दिलों को अल्लाह की याद से, उसकी आयतों पर विचार से और नेक अमल से ज़िंदा रखें। याद रखिए, जब तक दिल खुला है, तौबा और हिदायत का दरवाज़ा भी खुला है। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमारे दिलों को सत्य की समझ दे और उन पर कोई मुहर न लगाए। आमीन।



📜 आयत 57-60 — अर-रूम

57فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
तो उस दिन सरकश लोगों को न उनकी उज्र माअज़ेरत कुछ काम आएगी और न उनकी सुनवाई होगी
58وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
59كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग निरे दग़ाबाज़ हो जो लोग समझ (और इल्म) नहीं रखते उनके दिलों पर नज़र करके ख़ुदा यू तसदीक़ करता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
60فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है और (कहीं) ऐसा न हो कि जो (तुम्हारी) तसदीक़ नहीं करते तुम्हें (बहका कर) ख़फ़ीफ़ करे दें
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
59आयत

अनुवाद — अर-रूम 59

सूरा अर-रूम आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग…

सूरा आयत 59/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 57–60. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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