अर-रूम · 57/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रूम
فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ ۝٥٧
Fa Yawma`izil laa yanfa`ul lazeena zalamoo ma`ziratu hum wa laa hum yusta`taboon
📖 हिंदी अर्थ
तो उस दिन सरकश लोगों को न उनकी उज्र माअज़ेरत कुछ काम आएगी और न उनकी सुनवाई होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَعْذِرَتُهُمْ (मअज़िरतुहुम): उनके बहाने, सफ़ाई या माफ़ी के लिए पेश किए जाने वाले तर्क।
  • يُسْتَعْتَبُونَ (युस्तअतबून): उनसे यह नहीं कहा जाएगा कि वे (तौबा करके) अपने रब को राज़ी करें; यानी उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस दिन अल्लाह तआला सभी प्राणियों को हिसाब और जज़ा (बदला) के लिए उठाएगा, उस दिन ज़ालिमों (अत्याचारियों) के बहाने और सफ़ाई बिल्कुल काम नहीं आएंगे। वे चाहे कितने भी तर्क गढ़ लें या कितनी भी माफ़ी माँग लें, उनकी कोई बात स्वीकार नहीं की जाएगी। न ही उनसे यह कहा जाएगा कि वे तौबा करके अपने रब की रज़ा हासिल करें, क्योंकि तौबा और इस्तिग़फ़ार का दरवाज़ा दुनिया में खुला था, जबकि उन्होंने उसे ठुकरा दिया। अब वह मौका हमेशा के लिए खत्म हो चुका है। उस दिन उन्हें उनके बुरे कर्मों और गुनाहों की सज़ा दी जाएगी, और वे किसी भी तरह अपने आपको बचा नहीं पाएँगे।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बड़ी सख्त लेकिन अहम हक़ीक़त की याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा अभी खुला है। आज हमारे पास वह मौका है जो क़यामत के दिन किसी को नहीं मिलेगा। आज हम ज़ुल्म (चाहे वह अल्लाह के हुक्म की उल्लंघना हो या इंसानों के साथ नाइंसाफ़ी) छोड़कर तौबा कर लें, तो अल्लाह हमें माफ़ कर देगा। लेकिन अगर हमने यह मौका गँवा दिया, तो उस दिन पछतावे और बहानों का कोई फ़ायदा नहीं होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ़ लौटें, अपनी गलतियों से तौबा करें और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 55-59 — सूरा अर-रूम

55وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ يُقْسِمُ الْمُجْرِمُونَ مَا لَبِثُوا غَيْرَ سَاعَةٍ ۚ كَذَٰلِكَ كَانُوا يُؤْفَكُونَ
और जिस दिन क़यामत बरपा होगी तो गुनाहगार लोग कसमें खाएँगें कि वह (दुनिया में) घड़ी भर से ज्यादा नहीं ठहरे यूँ ही लोग (दुनिया में भी) इफ़तेरा परदाज़ियाँ करते रहे
56وَقَالَ الَّذِينَ أُوتُوا الْعِلْمَ وَالْإِيمَانَ لَقَدْ لَبِثْتُمْ فِي كِتَابِ اللَّهِ إِلَىٰ يَوْمِ الْبَعْثِ ۖ فَهَٰذَا يَوْمُ الْبَعْثِ وَلَٰكِنَّكُمْ كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और जिन लोगों को (ख़ुदा की बारगाह से) इल्म और ईमान दिया गया है जवाब देगें कि (हाए) तुम तो ख़ुदा की किताब के मुताबिक़ रोज़े क़यामत तक (बराबर) ठहरे रहे फिर ये तो क़यामत का ही दिन है मगर तुम लोग तो उसका यक़ीन ही न रखते थे
57فَيَوْمَئِذٍ لَّا يَنفَعُ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَعْذِرَتُهُمْ وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُونَ
तो उस दिन सरकश लोगों को न उनकी उज्र माअज़ेरत कुछ काम आएगी और न उनकी सुनवाई होगी
58وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
59كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग निरे दग़ाबाज़ हो जो लोग समझ (और इल्म) नहीं रखते उनके दिलों पर नज़र करके ख़ुदा यू तसदीक़ करता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
अर-रूमकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
57आयत

अनुवाद — अर-रूम 57

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Friday, October 2, 2026

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