अर-रूम · 60/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ ۝٦٠
Fasbir inna wa`dal laahi haqqunw wa laa yastakhif fannakal lazeena laa yooqinoon
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है और (कहीं) ऐसा न हो कि जो (तुम्हारी) तसदीक़ नहीं करते तुम्हें (बहका कर) ख़फ़ीफ़ करे दें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
  • وَعْدَ اللَّهِ: अल्लाह का वादा।
  • حَقٌّ: सत्य, निश्चित।
  • لَا يَسْتَخِفَّنَّكَ: वे तुम्हें हल्का न कर दें, तुम्हें उकसाकर बेसब्र न कर दें।
  • الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ: वे लोग जो (पुनरुत्थान और प्रतिफल पर) विश्वास नहीं रखते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन लोगों की ओर से जो आपको झुठलाते हैं और आपको तकलीफ़ पहुँचाते हैं, धैर्य और सब्र का दामन थामे रहें। याद रखें कि अल्लाह का वादा — चाहे वह आपकी मदद का हो, आपके दीन (धर्म) की सर्वोच्चता का हो, या आपको मिलने वाले प्रतिफल का हो — बिल्कुल सत्य और निश्चित है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अल्लाह अपना वादा अवश्य पूरा करेगा, चाहे उसमें कितना भी समय क्यों न लगे।

और देखिए! जो लोग पुनरुत्थान (आख़िरत) और प्रतिफल (जज़ा) पर यक़ीन नहीं रखते, वे आपको उकसाकर बेसब्र न कर दें। वे आपको धैर्य छोड़ने और जल्दबाज़ी करने पर मजबूर न कर सकें। उनकी बातें, उनके तंज़ और उनकी कोशिशें आपको हल्का न कर दें। क्योंकि जिन लोगों को आख़िरत पर विश्वास नहीं होता, वे केवल इसी दुनिया की चीज़ों को देखते हैं और जल्दी में फ़ैसला चाहते हैं। लेकिन आप तो उस सच्चाई पर ईमान रखते हैं जो उनसे छिपी है — आप जानते हैं कि अल्लाह का वादा अवश्य पूरा होगा, और यही आपके धैर्य की असली ताक़त है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हर उस मुसलमान के लिए एक नुस्ख़ा है जो अल्लाह के रास्ते में मुश्किलों का सामना करता है। जब भी आप पर मुसीबत आए, याद रखें कि अल्लाह का वादा सत्य है — उसकी मदद ज़रूर आएगी, उसका इंसाफ़ ज़रूर होगा। जो लोग आपको बेसब्र करना चाहते हैं, वे दरअसल उस यक़ीन से महरूम हैं जो आपके दिल में है। आपका सब्र ही आपकी ताक़त है, और यही सब्र आपको उस कामयाबी तक पहुँचाएगा जिसका वादा अल्लाह ने किया है। इसलिए सब्र को अपनी ढाल बनाएँ, और अल्लाह पर भरोसा रखें — क्योंकि अल्लाह का वादा कभी झूठा नहीं होता।

🎧 सुनें

📜 आयत 58-60 — अर-रूम

58وَلَقَدْ ضَرَبْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَلَئِن جِئْتَهُم بِآيَةٍ لَّيَقُولَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُبْطِلُونَ
और हमने तो इस कुरान में (लोगों के समझाने को) हर तरह की मिसल बयान कर दी और अगर तुम उनके पास कोई सा मौजिज़ा ले आओ
59كَذَٰلِكَ يَطْبَعُ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ
तो भी यक़ीनन कुफ्फ़ार यही बोल उठेंगे कि तुम लोग निरे दग़ाबाज़ हो जो लोग समझ (और इल्म) नहीं रखते उनके दिलों पर नज़र करके ख़ुदा यू तसदीक़ करता है (कि ये ईमान न लाएँगें)
60فَاصْبِرْ إِنَّ وَعْدَ اللَّهِ حَقٌّ ۖ وَلَا يَسْتَخِفَّنَّكَ الَّذِينَ لَا يُوقِنُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम सब्र करो बेशक ख़ुदा का वायदा सच्चा है और (कहीं) ऐसा न हो कि जो (तुम्हारी) तसदीक़ नहीं करते तुम्हें (बहका कर) ख़फ़ीफ़ करे दें
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अनुवाद — अर-रूम 60

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Tuesday, August 18, 2026

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