लुकमान · 18/34
अनुवाद उच्चारण — सूरा लुकमान
وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِي الْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ ۝١٨
Wa laa tusa`-`ir khaddaka linnaasi wa laa tamshi fil ardi maarahan innal laaha laa yuhibbu kulla mukhtaalin fakhoor
📖 हिंदी अर्थ
और लोगों के सामने (गुरुर से) अपना मुँह न फुलाना और ज़मीन पर अकड़कर न चलना क्योंकि ख़ुदा किसी अकड़ने वाले और इतराने वाले को दोस्त नहीं रखता और अपनी चाल ढाल में मियाना रवी एख्तेयार करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُصَعِّرْ: चेहरा फेर लेना, घमंड से मुँह मोड़ लेना।
  • خَدَّكَ: अपना गाल (चेहरा)।
  • مَرَحًا: इतराना, अकड़कर चलना, घमंड से भरा हुआ।
  • مُخْتَالٍ: घमंडी, जो अपने आप को बड़ा समझे।
  • فَخُورٍ: अपनी तारीफ़ खुद करने वाला, शेखी बघारने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों को नेक अख़्लाक़ (अच्छे आचरण) की तालीम देते हुए फ़रमाता है कि लोगों से बात करते समय या उनके सामने अपने चेहरे को घमंड और अहंकार के साथ न फेरो। यानी किसी से बात करते वक़्त उसे हक़ीर (तुच्छ) समझकर मुँह न मोड़ो, बल्कि नरमी, मुस्कुराहट और इनसानियत के साथ पेश आओ। यह एक बड़ी बुरी आदत है जो इंसान के दिल में किब्र (घमंड) पैदा करती है और लोगों के दिलों में नफ़रत का सबब बनती है।

इसी तरह अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ज़मीन पर इतराते हुए, अकड़कर और घमंड से भरे अंदाज़ में न चलो। क्योंकि यह चाल अल्लाह को बिल्कुल पसंद नहीं है। जो शख्स अपनी चाल, अपनी बात, अपनी शक्ल और अपने हाव-भाव में घमंड रखता है और लोगों पर अपनी बड़ाई जताता है, अल्लाह उससे महब्बत (प्रेम) नहीं करता। वह ऐसे लोगों को पसंद नहीं करता जो अपनी तारीफ़ खुद करते हैं, अपनी नेमतों (अल्लाह की दी हुई दौलत, इल्म, ताकत) पर इतराते हैं और दूसरों को हेय (तुच्छ) समझते हैं।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि इंसान को हमेशा अज्ज़त (विनम्रता) और इनकिसारी (नम्रता) अपनानी चाहिए। जो लोग अल्लाह के बंदों के साथ नरमी और मुहब्बत से पेश आते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है। और जो लोग घमंड करते हैं, वह अल्लाह की नज़र में सबसे ज़्यादा नापसंद हैं। याद रखो, घमंड सिर्फ़ अल्लाह की नेमतों का इनकार है, क्योंकि जब इंसान घमंड करता है तो वह भूल जाता है कि यह सब कुछ अल्लाह की देन है। इसलिए हमेशा शुक्रगुज़ार बनो, नम्र रहो और लोगों के साथ अच्छा सुलूक करो। यही वह रास्ता है जो अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत तक पहुँचाता है।



📜 आयत 16-20 — सूरा लुकमान

16يَا بُنَيَّ إِنَّهَا إِن تَكُ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِّنْ خَرْدَلٍ فَتَكُن فِي صَخْرَةٍ أَوْ فِي السَّمَاوَاتِ أَوْ فِي الْأَرْضِ يَأْتِ بِهَا اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَطِيفٌ خَبِيرٌ
(उस वक्त उसका अन्जाम) बता दूँगा ऐ बेटा इसमें शक नहीं कि वह अमल (अच्छा हो या बुरा) अगर राई के बराबर भी हो और फिर वह किसी सख्त पत्थर के अन्दर या आसमान में या ज़मीन मे (छुपा हुआ) हो तो भी ख़ुदा उसे (क़यामत के दिन) हाज़िर कर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा बारीकबीन वाक़िफकार है
17يَا بُنَيَّ أَقِمِ الصَّلَاةَ وَأْمُرْ بِالْمَعْرُوفِ وَانْهَ عَنِ الْمُنكَرِ وَاصْبِرْ عَلَىٰ مَا أَصَابَكَ ۖ إِنَّ ذَٰلِكَ مِنْ عَزْمِ الْأُمُورِ
ऐ बेटा नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा कर और (लोगों से) अच्छा काम करने को कहो और बुरे काम से रोको और जो मुसीबत तुम पर पडे उस पर सब्र करो (क्योंकि) बेशक ये बड़ी हिम्मत का काम है
18وَلَا تُصَعِّرْ خَدَّكَ لِلنَّاسِ وَلَا تَمْشِ فِي الْأَرْضِ مَرَحًا ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ مُخْتَالٍ فَخُورٍ
और लोगों के सामने (गुरुर से) अपना मुँह न फुलाना और ज़मीन पर अकड़कर न चलना क्योंकि ख़ुदा किसी अकड़ने वाले और इतराने वाले को दोस्त नहीं रखता और अपनी चाल ढाल में मियाना रवी एख्तेयार करो
19وَاقْصِدْ فِي مَشْيِكَ وَاغْضُضْ مِن صَوْتِكَ ۚ إِنَّ أَنكَرَ الْأَصْوَاتِ لَصَوْتُ الْحَمِيرِ
और दूसरो से बोलने में अपनी आवाज़ धीमी रखो क्योंकि आवाज़ों में तो सब से बुरी आवाज़ (चीख़ने की वजह से) गधों की है
20أَلَمْ تَرَوْا أَنَّ اللَّهَ سَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَأَسْبَغَ عَلَيْكُمْ نِعَمَهُ ظَاهِرَةً وَبَاطِنَةً ۗ وَمِنَ النَّاسِ مَن يُجَادِلُ فِي اللَّهِ بِغَيْرِ عِلْمٍ وَلَا هُدًى وَلَا كِتَابٍ مُّنِيرٍ
क्या तुम लोगों ने इस पर ग़ौर नहीं किया कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही ने यक़ीनी तुम्हारा ताबेए कर दिया है और तुम पर अपनी ज़ाहिरी और बातिनी नेअमतें पूरी कर दीं और बाज़ लोग (नुसर बिन हारिस वगैरह) ऐसे भी हैं जो (ख्वाह मा ख्वाह) ख़ुदा के बारे में झगड़ते हैं (हालॉकि उनके पास) न इल्म है और न हिदायत है और न कोई रौशन किताब है
लुकमानकुरान सूची
34आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — लुकमान 18

सूरा लुकमान आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और लोगों के सामने (गुरुर से) अपना मुँह न फुलाना…

सूरा आयत 18/34 — सूरा लुकमान لقمان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा लुकमान सुनें, सूरा लुकमान अनुवाद, सूरा लुकमान mp3, सूरा लुकमान pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए