अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- افْتَرَاهُ — इसे स्वयं रच लिया, झूठ गढ़ लिया।
- لِتُنْذِرَ — ताकि आप डराएँ, सचेत करें।
- نَذِيرٍ — डराने वाला, चेतावनी देने वाला (पैगंबर)।
- لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ — ताकि वे सीधा मार्ग पा लें।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये मक्का के मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की बात है, जो कहते थे कि मुहम्मद ﷺ ने ये क़ुरआन खुद गढ़ लिया है। अल्लाह तआला उनके इस झूठे इल्ज़ाम का जवाब देते हुए फ़रमाता है: क्या वे सचमुच ये कहते हैं कि ये क़ुरआन आपने ﷺ अपनी तरफ़ से बना लिया है? हरगिज़ नहीं! ये उनकी महज़ बुहतान और झूठ है। बल्कि ये क़ुरआन सर्वथा सत्य है, इसमें कोई संदेह नहीं, और ये आपके रब की ओर से उतारा गया है।
इस क़ुरआन को उतारने का उद्देश्य ये है कि आप ﷺ उन लोगों को डराएँ और सचेत करें, जिनके पास आपसे पहले कोई डराने वाला (नबी) नहीं आया — यानी अरब की क़ौम। अरब के लोग ईसा अलैहिस्सलाम और मुहम्मद ﷺ के बीच की अवधि (फ़तरत) में ऐसे दौर में जी रहे थे जब उनके पास कोई नबी नहीं आया था। वे अल्लाह की इबादत छोड़कर बुतों की पूजा कर रहे थे, अंधेरे और अज्ञान में डूबे हुए थे।
अल्लाह ने अपनी रहमत से आपको ﷺ उनकी ओर भेजा, ताकि आप उन्हें सीधा रास्ता दिखाएँ, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराएँ, और उन्हें सच्चाई की ओर बुलाएँ — ताकि वे हिदायत पा लें, सत्य को पहचानें, उस पर ईमान लाएँ और उस पर अमल करें।
दावत और नसीहत:
ये आयत हमें बताती है कि क़ुरआन कोई इंसानी किताब नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है। जो लोग इसे इंसानी रचना कहते हैं, वे सच्चाई से दूर हैं। ये किताब हर उस इंसान के लिए रहनुमा है जो सच्चाई की तलाश में है। अल्लाह ने इस क़ुरआन को इसलिए उतारा कि हम अंधेरों से निकलकर रोशनी की ओर आएँ, अपने रब को पहचानें और उसकी इबादत करें। जो इसे मान ले और इस पर अमल करे, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होगा। आइए, हम इस क़ुरआन को पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें — यही हमारी सच्ची भलाई है।
📜 आयत 1-5 — अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 3
सूरा अस-सजदा आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या ये लोग (ये कहते हैं कि इसको इस शख्स…सूरा आयत 3/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, August 19, 2026
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