अस-सजदा · 4/30
अनुवाद उच्चारण — अस-सजदा
اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ مَا لَكُم مِّن دُونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا شَفِيعٍ ۚ أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ ۝٤
Allaahul lazee khalaqas samaawaati wal arda wa maa bainahumaa fee sittati ayyaam;Thummas tawaa `alal `arsh; maa lakum min doonihee minw-wwaliyyinw-wala shafee`; afala tatazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ही तो है जिसने सारे आसमान और ज़मीन और जितनी चीज़े इन दोनो के दरमियान हैं छह: दिन में पैदा की फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ उसके सिवा न कोई तुम्हारा सरपरस्त है न कोई सिफारिशी तो क्या तुम (इससे भी) नसीहत व इबरत हासिल नहीं करते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ – आसमानों और ज़मीन को पैदा किया।
  • فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ – छह दिनों में (अपनी हिकमत से)।
  • اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ – अर्श (सिंहासन) पर ऊपर उठे, जो उनकी शान के अनुकूल है।
  • وَلِيٍّ – मददगार और कार्यसंभालने वाला।
  • شَفِيعٍ – सिफ़ारिश करने वाला।
  • أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ – क्या तुम नसीहत और विचार नहीं करते?

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह ही वह (एकमात्र) है जिसने आसमानों, ज़मीन और उनके बीच की सारी चीज़ों को छह दिनों में पैदा किया। वह इस पर पूरी तरह क़ादिर है कि उन्हें सिर्फ़ "कुन" (हो जा) कहकर एक पल में पैदा कर देता, लेकिन उसने यह अपनी हिकमत और मस्लिहत से किया, ताकि बंदे उसकी क़ुदरत और कारीगरी पर ग़ौर करें। इसके बाद वह अपने अर्श पर उठा – ऐसा उठना जो उसकी अज़मत और बुज़ुर्गी के लायक़ है, न किसी मख़लूक़ के उठने जैसा, न उसकी कैफ़ियत बयान की जा सकती है और न उसकी मिसाल दी जा सकती है।

ऐ लोगों! जब अल्लाह ही तुम्हारा ख़ालिक़ और मालिक है, तो उसके सिवा तुम्हारा कोई वली (मददगार) नहीं जो तुम्हारे काम संभाल सके, और न कोई शफ़ी (सिफ़ारिशी) है जो उसके पास तुम्हारी सिफ़ारिश कर सके और तुम्हें उसके अज़ाब से बचा सके। अगर तुम उसकी नाफ़रमानी करोगे, तो कोई तुम्हें उसके अज़ाब से नहीं बचा सकता। तो क्या तुम इन नसीहतों से सबक़ नहीं लेते? क्या तुम अपने दिलों की आँखें खोलकर नहीं देखते कि यह कितनी बड़ी सच्चाई है?

दावती पहलू:

यह आयत हमें उस ज़ात की याद दिलाती है जिसने यह पूरी काइनात बनाई – यह विशाल आसमान, यह फैली हुई ज़मीन, और उनके बीच की हर चीज़। जिसने इतनी बड़ी दुनिया बनाई, वह तुम्हारी छोटी-छोटी ज़रूरतों से ज़रूर वाक़िफ़ है। वही तुम्हारा असली मददगार है, वही तुम्हारी सिफ़ारिश करने वाला है – लेकिन सिर्फ़ उसी की इबादत करो, उसी से मदद माँगो। जब वह इतना क़ादिर है कि छह दिनों में यह सब बना देता है, तो क्या वह तुम्हारी दुआएँ सुनने से आजिज़ होगा? हरगिज़ नहीं! तो उठो, अपने दिल को उसकी याद से जोड़ो, और उसकी रहमत की तरफ़ लौट आओ – क्योंकि वही तुम्हारा सच्चा सहारा है।

🎧 सुनें

📜 आयत 2-6 — अस-सजदा

2تَنزِيلُ الْكِتَابِ لَا رَيْبَ فِيهِ مِن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
इसमे कुछ शक नहीं कि किताब क़ुरान का नाज़िल करना सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से है
3أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۚ بَلْ هُوَ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أَتَاهُم مِّن نَّذِيرٍ مِّن قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ
क्या ये लोग (ये कहते हैं कि इसको इस शख्स (रसूल) ने अपनी जी से गढ़ लिया है नहीं ये बिल्कुल तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ है ताकि तुम उन लोगों को (ख़ुदा के अज़ाब से) डराओ जिनके पास तुमसे पहले कोई डराने वाला आया ही नहीं ताकि ये लोग राह पर आएँ
4اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۖ مَا لَكُم مِّن دُونِهِ مِن وَلِيٍّ وَلَا شَفِيعٍ ۚ أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने सारे आसमान और ज़मीन और जितनी चीज़े इन दोनो के दरमियान हैं छह: दिन में पैदा की फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ उसके सिवा न कोई तुम्हारा सरपरस्त है न कोई सिफारिशी तो क्या तुम (इससे भी) नसीहत व इबरत हासिल नहीं करते
5يُدَبِّرُ الْأَمْرَ مِنَ السَّمَاءِ إِلَى الْأَرْضِ ثُمَّ يَعْرُجُ إِلَيْهِ فِي يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهُ أَلْفَ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ
आसमान से ज़मीन तक के हर अम्र का वही मुद्ब्बिर (व मुन्तज़िम) है फिर ये बन्दोबस्त उस दिन जिस की मिक़दार तुम्हारे शुमार से हज़ार बरस से होगी उसी की बारगाह में पेश होगा
6ذَٰلِكَ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
वही (मुदब्बिर) पोशीदा और ज़ाहिर का जानने वाला (सब पर) ग़ालिब मेहरबान है
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अनुवाद — अस-सजदा 4

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Tuesday, August 18, 2026

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