अल-अहज़ाब · 29/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
وَإِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَالدَّارَ الْآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَاتِ مِنكُنَّ أَجْرًا عَظِيمًا ۝٢٩
Wa in kuntunna turidnal laaha wa Rasoolahoo wad Daaral Aakhirata fa innal laaha a`adda lil muhsinaati min kunna ajjran `azeemaa
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम लोग खुदा और उसके रसूल और आखेरत के घर की ख्वाहॉ हो तो (अच्छी तरह ख्याल रखो कि) तुम लोगों में से नेकोकार औरतों के लिए खुदा ने यक़ीनन् बड़ा (बड़ा) अज्र व (सवाब) मुहय्या कर रखा है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تُرِدْنَ: तुम चाहती हो, इच्छा रखती हो
  • الدَّارَ الْآخِرَةَ: आख़िरत का घर, यानी जन्नत
  • أَعَدَّ: तैयार किया है
  • لِلْمُحْسِنَاتِ: नेकी करने वाली महिलाओं के लिए
  • أَجْرًا عَظِيمًا: बहुत बड़ा इनाम

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में नबी ﷺ की पाक बीवियों को एक अहम एहतियार (विकल्प) दिया था—दुनिया की रौनक़ें और आराम, या अल्लाह और उसके रसूल की रज़ा और आख़िरत की कामयाबी। अल्लाह फ़रमाता है: "अगर तुम अल्लाह, उसके रसूल और आख़िरत के घर (जन्नत) को चाहती हो, तो अपनी ज़िंदगी में सब्र और अच्छे अख़्लाक़ पर क़ायम रहो, अल्लाह और उसके रसूल की इताअत करो। बेशक अल्लाह ने तुममें से नेकी करने वालियों के लिए बहुत बड़ा इनाम तैयार कर रखा है।"

यह आयत सिर्फ़ उम्महातुल मोमिनीन तक महदूद नहीं, बल्कि हर उस मुसलमान औरत के लिए एक आम पैग़ाम है जो दुनिया की चमक-दमक और आराम के मुक़ाबले अल्लाह की रज़ा को तरजीह देती है। जब हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा को यह एहतियार दिया गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अल्लाह और उसके रसूल को चुन लिया। उनके बाद बाक़ी पाक बीवियों ने भी यही चुनाव किया—यह उनके ईमान और मुहब्बत की सबसे बड़ी गवाही है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि दुनिया की कामयाबी और आराम कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह आख़िरत की कामयाबी के सामने कोई हैसियत नहीं रखता। जो लोग अल्लाह की रज़ा के लिए दुनिया की ख़्वाहिशों को छोड़ देते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसा अज्र देगा जिसका अंदाज़ा कोई नहीं कर सकता। यह अज्र सिर्फ़ जन्नत तक महदूद नहीं, बल्कि दुनिया में भी अल्लाह उन्हें सुकून, इत्मिनान और बरकत अता करता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी दुनिया और दीन के बीच चुनाव का मौक़ा आए, तो हमेशा अल्लाह और उसके रसूल को चुनें। यही वह रास्ता है जो हमें कामयाबी-ए-दारैन (दोनों जहान की भलाई) तक पहुँचाता है। अल्लाह ने नेकी करने वालों के लिए जो इनाम तैयार किया है, वह हमारी समझ से बाहर है—बस ज़रूरत है सब्र, इताअत और अच्छे अख़्लाक़ की।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-अहज़ाब

27وَأَوْرَثَكُمْ أَرْضَهُمْ وَدِيَارَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ وَأَرْضًا لَّمْ تَطَئُوهَا ۚ وَكَانَ اللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرًا
और कुछ को क़ैदी (और गुलाम) बनाने और तुम ही लोगों को उनकी ज़मीन और उनके घर और उनके माल और उस ज़मीन (खैबर) का खुदा ने मालिक बना दिया जिसमें तुमने क़दम तक नहीं रखा था और खुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर वतवाना है
28يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ قُل لِّأَزْوَاجِكَ إِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ الْحَيَاةَ الدُّنْيَا وَزِينَتَهَا فَتَعَالَيْنَ أُمَتِّعْكُنَّ وَأُسَرِّحْكُنَّ سَرَاحًا جَمِيلًا
ऐ रसूल अपनी बीवियों से कह दो कि अगर तुम (फक़त) दुनियावी ज़िन्दगी और उसकी आराइश व ज़ीनत की ख्वाहॉ हो तो उधर आओ मैं तुम लोगों को कुछ साज़ो सामान दे दूँ और उनवाने शाइस्ता से रूख़सत कर दूँ
29وَإِن كُنتُنَّ تُرِدْنَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَالدَّارَ الْآخِرَةَ فَإِنَّ اللَّهَ أَعَدَّ لِلْمُحْسِنَاتِ مِنكُنَّ أَجْرًا عَظِيمًا
और अगर तुम लोग खुदा और उसके रसूल और आखेरत के घर की ख्वाहॉ हो तो (अच्छी तरह ख्याल रखो कि) तुम लोगों में से नेकोकार औरतों के लिए खुदा ने यक़ीनन् बड़ा (बड़ा) अज्र व (सवाब) मुहय्या कर रखा है
30يَا نِسَاءَ النَّبِيِّ مَن يَأْتِ مِنكُنَّ بِفَاحِشَةٍ مُّبَيِّنَةٍ يُضَاعَفْ لَهَا الْعَذَابُ ضِعْفَيْنِ ۚ وَكَانَ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرًا
ऐ पैग़म्बर की बीबियों तुममें से जो कोई किसी सरीही ना शाइस्ता हरकत की का मुरतिब हुई तो (याद रहे कि) उसका अज़ाब भी दुगना बढ़ा दिया जाएगा और खुदा के वास्ते (निहायत) आसान है
31۞ وَمَن يَقْنُتْ مِنكُنَّ لِلَّهِ وَرَسُولِهِ وَتَعْمَلْ صَالِحًا نُّؤْتِهَا أَجْرَهَا مَرَّتَيْنِ وَأَعْتَدْنَا لَهَا رِزْقًا كَرِيمًا
और तुममें से जो (बीवी) खुदा और उसके रसूल की ताबेदारी अच्छे (अच्छे) काम करेगी उसको हम उसका सवाब भी दोहरा अता करेगें और हमने उसके लिए (जन्नत में) इज्ज़त की रोज़ी तैयार कर रखी है
अल-अहज़ाबकुरान सूची
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29आयत

अनुवाद — अल-अहज़ाब 29

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Tuesday, August 18, 2026

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