अल-अहज़ाब · 39/73
अनुवाद उच्चारण — अल-अहज़ाब
الَّذِينَ يُبَلِّغُونَ رِسَالَاتِ اللَّهِ وَيَخْشَوْنَهُ وَلَا يَخْشَوْنَ أَحَدًا إِلَّا اللَّهَ ۗ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ حَسِيبًا ۝٣٩
Allazeena yuballighoona Risaalaatil laahi wa yakhshaw nahoo wa laa yakkhshawna ahadan illal laah; wa kafaa billaahi Haseebaa
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُبَلِّغُونَ رِسَالَاتِ اللَّهِ: अल्लाह के संदेशों को पहुँचाना।
  • يَخْشَوْنَهُ: उसी से डरना।
  • حَسِيبًا: हिसाब लेने वाला, देखभाल करने वाला।

तफ़सीर:

यह आयत अल्लाह तआला के पैग़म्बरों की प्रशंसा में है, जिन्होंने अल्लाह के संदेशों को बिना किसी भय के लोगों तक पहुँचाया। ये वे लोग थे जो अल्लाह के हुक्मों को पूरा करते थे, उसकी इबादत करते थे और उसके दीन का प्रचार करते थे। उनका एक विशेष गुण यह था कि वे केवल अल्लाह से डरते थे और किसी इंसान के डर से अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होते थे। चाहे उन्हें कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, चाहे लोग उनका मज़ाक उड़ाएँ या उन्हें धमकाएँ, वे अल्लाह का संदेश पहुँचाने में कभी पीछे नहीं हटे।

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बरों की इसी दृढ़ता और साहस की तारीफ़ की है। वे अल्लाह के आदेशों का पालन करते थे, भले ही लोग उन्हें नापसंद करें। उन्होंने कभी किसी इंसान की नाराज़गी का ख्याल नहीं किया, बल्कि केवल अल्लाह की रज़ा को सामने रखा। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें अपना पैग़म्बर बनाया और उन्हें सफलता दी।

आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "अल्लाह ही हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।" यानी अल्लाह हर चीज़ का देखभाल करने वाला है, वह अपने बंदों के सभी कर्मों को जानता है और उनका हिसाब लेगा। जो लोग अल्लाह के रास्ते में काम करते हैं, उन्हें किसी इंसान के डर की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह उनकी मदद करेगा और उन्हें इनाम देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चे मोमिन की पहचान यह है कि वह अल्लाह के हुक्मों को सबसे आगे रखता है। हमें भी अपने जीवन में यही रवैया अपनाना चाहिए — अल्लाह की रज़ा को प्राथमिकता दें, किसी इंसान के डर या लालच से अपने ईमान और अमल में कमज़ोरी न आने दें। अल्लाह हमारी हर अच्छाई और बुराई का हिसाब लेगा, इसलिए हमें उसी से डरना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।



📜 आयत 37-41 — अल-अहज़ाब

37وَإِذْ تَقُولُ لِلَّذِي أَنْعَمَ اللَّهُ عَلَيْهِ وَأَنْعَمْتَ عَلَيْهِ أَمْسِكْ عَلَيْكَ زَوْجَكَ وَاتَّقِ اللَّهَ وَتُخْفِي فِي نَفْسِكَ مَا اللَّهُ مُبْدِيهِ وَتَخْشَى النَّاسَ وَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَاهُ ۖ فَلَمَّا قَضَىٰ زَيْدٌ مِّنْهَا وَطَرًا زَوَّجْنَاكَهَا لِكَيْ لَا يَكُونَ عَلَى الْمُؤْمِنِينَ حَرَجٌ فِي أَزْوَاجِ أَدْعِيَائِهِمْ إِذَا قَضَوْا مِنْهُنَّ وَطَرًا ۚ وَكَانَ أَمْرُ اللَّهِ مَفْعُولًا
और (ऐ रसूल वह वक्त याद करो) जब तुम उस शख्स (ज़ैद) से कह रहे थे जिस पर खुदा ने एहसान (अलग) किया था और तुमने उस पर (अलग) एहसान किया था कि अपनी बीबी (ज़ैनब) को अपनी ज़ौज़ियत में रहने दे और खुदा से डेर खुद तुम इस बात को अपने दिल में छिपाते थे जिसको (आख़िरकार) खुदा ज़ाहिर करने वाला था और तुम लोगों से डरते थे हालॉकि खुदा इसका ज्यादा हक़दार है कि तुम उस से डरो ग़रज़ जब ज़ैद अपनी हाजत पूरी कर चुका (तलाक़ दे दी) तो हमने (हुक्म देकर) उस औरत (ज़ैनब) का निकाह तुमसे कर दिया ताकि आम मोमिनीन को अपने ले पालक लड़कों की बीवियों (से निकाह करने) में जब वह अपना मतलब उन औरतों से पूरा कर चुकें (तलाक़ दे दें) किसी तरह की तंगी न रहे और खुदा का हुक्म तो किया कराया हुआ (क़तई) होता है
38مَّا كَانَ عَلَى النَّبِيِّ مِنْ حَرَجٍ فِيمَا فَرَضَ اللَّهُ لَهُ ۖ سُنَّةَ اللَّهِ فِي الَّذِينَ خَلَوْا مِن قَبْلُ ۚ وَكَانَ أَمْرُ اللَّهِ قَدَرًا مَّقْدُورًا
जो हुक्म खुदा ने पैग़म्बर पर फर्ज क़र दिया (उसके करने) में उस पर कोई मुज़ाएका नहीं जो लोग (उनसे) पहले गुज़र चुके हैं उनके बारे में भी खुदा का (यही) दस्तूर (जारी) रहा है (कि निकाह में तंगी न की) और खुदा का हुक्म तो (ठीक अन्दाज़े से) मुक़र्रर हुआ होता है
39الَّذِينَ يُبَلِّغُونَ رِسَالَاتِ اللَّهِ وَيَخْشَوْنَهُ وَلَا يَخْشَوْنَ أَحَدًا إِلَّا اللَّهَ ۗ وَكَفَىٰ بِاللَّهِ حَسِيبًا
वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है
40مَّا كَانَ مُحَمَّدٌ أَبَا أَحَدٍ مِّن رِّجَالِكُمْ وَلَٰكِن رَّسُولَ اللَّهِ وَخَاتَمَ النَّبِيِّينَ ۗ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا
(लोगों) मोहम्मद तुम्हारे मर्दों में से (हक़ीक़तन) किसी के बाप नहीं हैं (फिर जैद की बीवी क्यों हराम होने लगी) बल्कि अल्लाह के रसूल और नबियों की मोहर (यानी ख़त्म करने वाले) हैं और खुदा तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ है
41يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اذْكُرُوا اللَّهَ ذِكْرًا كَثِيرًا
ऐ ईमानवालों बाकसरत खुदा की याद किया करो और
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अनुवाद — अल-अहज़ाब 39

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Tuesday, August 18, 2026

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