सबा · 54/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَحِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشْيَاعِهِم مِّن قَبْلُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا فِي شَكٍّ مُّرِيبٍ ۝٥٤
Wa heela bainahum wa baina maa yashtahoona kamaa fu`ila bi-ashyaa`ihim min qabl; innahum kaanoo fee shakkim mureeb
📖 हिंदी अर्थ
और अब तो उनके और उनकी तमन्नाओं के दरमियान (उसी तरह) पर्दा डाल दिया गया है जिस तरह उनसे पहले उनके हमरंग लोगों के साथ (यही बरताव) किया जा चुका इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ: उनके और उनकी इच्छाओं के बीच रुकावट डाल दी गई।
  • أَشْيَاعِهِم: उनके जैसे लोग, उनके साथी, पिछली उम्मतें।
  • شَكٍّ مُّرِيبٍ: ऐसा संदेह जो दिल को बेचैन कर दे और सच्चाई से दूर रखे।

तफसीर:

जब काफिरों को आख़िरत का अज़ाब सामने आएगा और वे मौत की पीड़ा देखेंगे, तो वे दुनिया में लौटने की, ईमान लाने की और अपने कु़फ्र से तौबा करने की सख्त ख्वाहिश रखेंगे। लेकिन उस वक्त उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होगी, क्योंकि तौबा और ईमान का दरवाजा उनके लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। यही हाल उनके पहले के काफिरों का हुआ, जिन्होंने भी आख़िरी वक्त में ईमान लाना चाहा, लेकिन उनकी तौबा कबूल नहीं हुई। यह अल्लाह का कायदा है कि जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान का वक्त खत्म हो जाता है।

इन काफिरों का यह अंजाम इसलिए हुआ क्योंकि वे दुनिया में रसूलों के पैगाम, तौहीद, आख़िरत और हिसाब-किताब के बारे में ऐसे संदेह में डूबे रहे जो उन्हें सच्चाई से दूर रखता था। उनका यह संदेह सिर्फ इल्मी कमी नहीं था, बल्कि यह उनके दिलों की सख्ती और हक़ से दुश्मनी की वजह से था। उन्होंने जानबूझकर सच्चाई को नकारा और अपनी जिद पर अड़े रहे, यही वजह है कि उनके लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं बची।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी सबक है कि ईमान और तौबा का दरवाजा अभी खुला है। अल्लाह रहीम और गफूर है, वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है, लेकिन यह मौका हमेशा नहीं रहेगा। जब मौत आ जाए या अज़ाब नाजिल हो जाए, तो फिर पछतावा बेकार है। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ लौट आओ, अपने गुनाहों से तौबा करो और ईमान की हालत में जीओ, ताकि उस दिन की रुसवाई और पछतावे से बच सको। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ दौड़ते हैं, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो हक़ से मुंह मोड़ते हैं।



📜 आयत 52-54 — सबा

52وَقَالُوا آمَنَّا بِهِ وَأَنَّىٰ لَهُمُ التَّنَاوُشُ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
और आस ही पास से (बाआसानी) गिरफ्तार कर लिए जाएँगे और (उस वक्त बेबसी में) कहेंगे कि अब हम रसूलों पर ईमान लाए और इतनी दूर दराज़ जगह से (ईमान पर) उनका दसतरस (पहुँचना) कहाँ मुमकिन है
53وَقَدْ كَفَرُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۖ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
हालॉकि ये लोग उससे पहले ही जब उनका दसतरस था इन्कार कर चुके और (दुनिया में तमाम उम्र) बे देखे भाले (अटकल के) तके बड़ी-बड़ी दूर से चलाते रहे
54وَحِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشْيَاعِهِم مِّن قَبْلُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا فِي شَكٍّ مُّرِيبٍ
और अब तो उनके और उनकी तमन्नाओं के दरमियान (उसी तरह) पर्दा डाल दिया गया है जिस तरह उनसे पहले उनके हमरंग लोगों के साथ (यही बरताव) किया जा चुका इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे
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अनुवाद — सबा 54

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Tuesday, August 18, 2026

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