अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ: उनके और उनकी इच्छाओं के बीच रुकावट डाल दी गई।
- أَشْيَاعِهِم: उनके जैसे लोग, उनके साथी, पिछली उम्मतें।
- شَكٍّ مُّرِيبٍ: ऐसा संदेह जो दिल को बेचैन कर दे और सच्चाई से दूर रखे।
तफसीर:
जब काफिरों को आख़िरत का अज़ाब सामने आएगा और वे मौत की पीड़ा देखेंगे, तो वे दुनिया में लौटने की, ईमान लाने की और अपने कु़फ्र से तौबा करने की सख्त ख्वाहिश रखेंगे। लेकिन उस वक्त उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होगी, क्योंकि तौबा और ईमान का दरवाजा उनके लिए हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। यही हाल उनके पहले के काफिरों का हुआ, जिन्होंने भी आख़िरी वक्त में ईमान लाना चाहा, लेकिन उनकी तौबा कबूल नहीं हुई। यह अल्लाह का कायदा है कि जब अज़ाब आ जाए, तो ईमान का वक्त खत्म हो जाता है।
इन काफिरों का यह अंजाम इसलिए हुआ क्योंकि वे दुनिया में रसूलों के पैगाम, तौहीद, आख़िरत और हिसाब-किताब के बारे में ऐसे संदेह में डूबे रहे जो उन्हें सच्चाई से दूर रखता था। उनका यह संदेह सिर्फ इल्मी कमी नहीं था, बल्कि यह उनके दिलों की सख्ती और हक़ से दुश्मनी की वजह से था। उन्होंने जानबूझकर सच्चाई को नकारा और अपनी जिद पर अड़े रहे, यही वजह है कि उनके लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं बची।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी सबक है कि ईमान और तौबा का दरवाजा अभी खुला है। अल्लाह रहीम और गफूर है, वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है, लेकिन यह मौका हमेशा नहीं रहेगा। जब मौत आ जाए या अज़ाब नाजिल हो जाए, तो फिर पछतावा बेकार है। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ लौट आओ, अपने गुनाहों से तौबा करो और ईमान की हालत में जीओ, ताकि उस दिन की रुसवाई और पछतावे से बच सको। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ दौड़ते हैं, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो हक़ से मुंह मोड़ते हैं।
📜 आयत 52-54 — सबा
अनुवाद — सबा 54
सूरा सबा आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अब तो उनके और उनकी तमन्नाओं के दरमियान (उसी…सूरा आयत 54/54 — सबा سبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सबा सुनें, सबा अनुवाद, सबा mp3, सबा pdf. आयत 52–54. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








