सबा · 53/54
अनुवाद उच्चारण — सबा
وَقَدْ كَفَرُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۖ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ ۝٥٣
Wa qad kafaroo bihee min qablu wa yaqzifoona bilghaibi mim makaanim ba`eed
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि ये लोग उससे पहले ही जब उनका दसतरस था इन्कार कर चुके और (दुनिया में तमाम उम्र) बे देखे भाले (अटकल के) तके बड़ी-बड़ी दूर से चलाते रहे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا بِهِ: उस (क़ुरआन और रसूल ﷺ) के साथ कुफ़्र किया, यानी उसे नकारा और झुठलाया।
  • يَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ: बिना किसी ज्ञान या प्रमाण के, अनुमान और अटकलों के आधार पर बातें फेंकना (आरोप लगाना)।
  • مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ: सत्य से बहुत दूर की जगह से, यानी ऐसी दूरी से जहाँ से सत्य का कोई ठिकाना नहीं लग सकता।

तफ़सीर:

यह आयत उस हालत का वर्णन कर रही है जब क़ियामत के दिन काफ़िर लोग ईमान लाना चाहेंगे और माफ़ी की गुहार लगाएँगे, लेकिन उनका यह ईमान क़बूल नहीं किया जाएगा। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि उन्होंने पहले (दुनिया में) इस सत्य (क़ुरआन और रसूल ﷺ) का इनकार किया, और अब वे ऐसी बातें कह रहे हैं जो सिर्फ़ अटकलें और अनुमान हैं। वे रसूलुल्लाह ﷺ के बारे में ऐसी बातें कहते थे जो उनमें थीं ही नहीं — कभी उन्हें जादूगर कहते, कभी कवि, कभी काहिन (भविष्यवक्ता) — ये सब आरोप थे जो सच्चाई से बिल्कुल दूर थे, जैसे कोई व्यक्ति बहुत दूर से किसी निशाने पर तीर चलाए और उसे लगने की कोई उम्मीद ही न हो।

यानी उनका यह व्यवहार बिल्कुल उस व्यक्ति जैसा था जो अंधेरे में, बहुत दूर से, बिना किसी निशाने के तीर चलाए — उसका निशाना लगना असंभव है। इसी तरह, उनका यह दावा कि रसूल ﷺ जादूगर या शायर हैं, सत्य से इतना दूर था कि उसका कोई आधार ही नहीं था। वे सिर्फ़ अपने मन की बातें बना रहे थे, और यही उनका अंधापन और हठधर्मिता थी।


दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य को झुठलाना और बिना ज्ञान के बातें बनाना कितना बड़ा पाप है। अल्लाह तआला ने हमें अक़्ल दी है, और इस अक़्ल का सही उपयोग यह है कि हम क़ुरआन और सुन्नत को खुले दिल से स्वीकार करें। जो लोग सत्य को नकारते हैं, वे दुनिया में भी अंधेरे में भटकते हैं और आख़िरत में भी उनका कोई सहारा नहीं होगा।

आज हमारे पास सबसे बड़ी नेमत यह है कि हमें क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाएँ मिली हैं। हमें चाहिए कि इन पर अमल करें, और किसी भी चीज़ को बिना जाँचे-परखे न मानें और न ही कहें। अल्लाह तआला हमें सत्य को समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 51-54 — सबा

51وَلَوْ تَرَىٰ إِذْ فَزِعُوا فَلَا فَوْتَ وَأُخِذُوا مِن مَّكَانٍ قَرِيبٍ
और (ऐ रसूल) काश तुम देखते (तो सख्त ताज्जुब करते) जब ये कुफ्फार (मैदाने हशर में) घबराए-घबराए फिरते होंगे तो भी छुटकारा न होगा
52وَقَالُوا آمَنَّا بِهِ وَأَنَّىٰ لَهُمُ التَّنَاوُشُ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
और आस ही पास से (बाआसानी) गिरफ्तार कर लिए जाएँगे और (उस वक्त बेबसी में) कहेंगे कि अब हम रसूलों पर ईमान लाए और इतनी दूर दराज़ जगह से (ईमान पर) उनका दसतरस (पहुँचना) कहाँ मुमकिन है
53وَقَدْ كَفَرُوا بِهِ مِن قَبْلُ ۖ وَيَقْذِفُونَ بِالْغَيْبِ مِن مَّكَانٍ بَعِيدٍ
हालॉकि ये लोग उससे पहले ही जब उनका दसतरस था इन्कार कर चुके और (दुनिया में तमाम उम्र) बे देखे भाले (अटकल के) तके बड़ी-बड़ी दूर से चलाते रहे
54وَحِيلَ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ مَا يَشْتَهُونَ كَمَا فُعِلَ بِأَشْيَاعِهِم مِّن قَبْلُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا فِي شَكٍّ مُّرِيبٍ
और अब तो उनके और उनकी तमन्नाओं के दरमियान (उसी तरह) पर्दा डाल दिया गया है जिस तरह उनसे पहले उनके हमरंग लोगों के साथ (यही बरताव) किया जा चुका इसमें शक नहीं कि वह लोग बड़े बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए थे
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अनुवाद — सबा 53

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Tuesday, August 18, 2026

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