फातिर · 37/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَا أَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ ۚ أَوَلَمْ نُعَمِّرْكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَاءَكُمُ النَّذِيرُ ۖ فَذُوقُوا فَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ ۝٣٧
Wa hum yastarikhoona feehaa Rabbanaa akhrijnaa na`mal saalihan ghairal lazee kunnaa na`mal; awa lamnu `ammirkum maa yatazak karu feehi man tazakkara wa jaaa`akumun nazeeru fazooqoo famaa lizzaalimeena min naseer
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग दोजख़ में (पड़े) चिल्लाया करेगें कि परवरदिगार अब हमको (यहाँ से) निकाल दे तो जो कुछ हम करते थे उसे छोड़कर नेक काम करेंगे (तो ख़ुदा जवाब देगा कि) क्या हमने तुम्हें इतनी उम्रें न दी थी कि जिनमें जिसको जो कुछ सोंचना समझना (मंज़ूर) हो खूब सोच समझ ले और (उसके अलावा) तुम्हारे पास (हमारा) डराने वाला (पैग़म्बर) भी पहुँच गया था तो (अपने किए का मज़ा) चखो क्योंकि सरकश लोगों का कोई मद्दगार नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَصْطَرِخُونَ – चीखें मारना, बहुत ऊँची आवाज़ में मदद माँगना।
  • أَخْرِجْنَا – हमें निकाल दे (आग से)।
  • نُعَمِّرْكُم – हमने तुम्हें उम्र दी, जीवन की लंबी अवधि दी।
  • النَّذِيرُ – डराने वाला (पैगंबर मुहम्मद ﷺ, या क़ुरआन, या बुढ़ापा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफ़िर लोग जहन्नम की आग में डाले जाएँगे और उसके अज़ाब की सख्ती उन पर हावी हो जाएगी, तो वे बुरी तरह चीखें मारेंगे और फ़रियाद करेंगे। वे अपने रब से गिड़गिड़ाते हुए कहेंगे: "ऐ हमारे रब! हमें यहाँ से निकाल दे, हमें एक बार फिर दुनिया में भेज दे, हम अच्छे काम करेंगे, वे काम नहीं करेंगे जो हम पहले करते थे।" वे अब अपनी गलती समझ चुके होंगे, लेकिन यह समझ उन्हें बहुत देर से आई होगी।

तब अल्लाह तआला उन्हें जवाब देगा, और यह जवाब उन्हें शर्मसार करने वाला होगा: "क्या हमने तुम्हें इतनी लंबी उम्र नहीं दी थी कि जो कोई सीखना चाहता, वह सीख लेता? और क्या तुम्हारे पास डराने वाला (पैगंबर ﷺ) नहीं आया था, जिसने तुम्हें इस दिन से डराया था?" यानी तुम्हारे पास हर चीज़ मौजूद थी — समय, स्वास्थ्य, जवानी, और रसूल का संदेश — फिर भी तुमने ध्यान नहीं दिया। अब तुम्हारे पास कोई बहाना नहीं बचा।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाएगा: "तो अब इस अज़ाब का मज़ा चखो। ज़ालिमों (काफ़िरों) के लिए आज कोई मददगार नहीं है, कोई उन्हें इस आग से बचाने वाला नहीं।"


दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने हमें ज़िंदगी दी है, और यह ज़िंदगी हमारे लिए एक मौका है — मौका है तौबा करने का, अच्छे काम करने का, और अल्लाह की रहमत कमाने का। हमें इस मौके को गंवाना नहीं चाहिए। आज हमारे पास क़ुरआन है, हमारे पास पैगंबर ﷺ की सुन्नत है, हमारे पास समय है — क्या हम इसे सोच-समझकर इस्तेमाल करेंगे? याद रखिए, जहन्नम की आग से निकलने की फ़रियाद उस दिन किसी काम नहीं आएगी। आज का दिन अमल का है, कल का दिन हिसाब का। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और अच्छे कामों में बिताएँ, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदा न होना पड़े।



📜 आयत 35-39 — फातिर

35الَّذِي أَحَلَّنَا دَارَ الْمُقَامَةِ مِن فَضْلِهِ لَا يَمَسُّنَا فِيهَا نَصَبٌ وَلَا يَمَسُّنَا فِيهَا لُغُوبٌ
जिसने हमको अपने फज़ल (व करम) से हमेशगी के घर (बेहिश्त) में उतारा (मेहमान किया) जहाँ हमें कोई तकलीफ छुयेगी भी तो नहीं और न कोई थकान ही पहुँचेगी
36وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे उनके लिए जहन्नुम की आग है न उनकी कज़ा ही आएगी कि वह मर जाए और तकलीफ से नजात मिले और न उनसे उनके अज़ाब ही में तख़फीफ की जाएगी हम हर नाशुक्रे की सज़ा यूँ ही किया करते हैं
37وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَا أَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ ۚ أَوَلَمْ نُعَمِّرْكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَاءَكُمُ النَّذِيرُ ۖ فَذُوقُوا فَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
और ये लोग दोजख़ में (पड़े) चिल्लाया करेगें कि परवरदिगार अब हमको (यहाँ से) निकाल दे तो जो कुछ हम करते थे उसे छोड़कर नेक काम करेंगे (तो ख़ुदा जवाब देगा कि) क्या हमने तुम्हें इतनी उम्रें न दी थी कि जिनमें जिसको जो कुछ सोंचना समझना (मंज़ूर) हो खूब सोच समझ ले और (उसके अलावा) तुम्हारे पास (हमारा) डराने वाला (पैग़म्बर) भी पहुँच गया था तो (अपने किए का मज़ा) चखो क्योंकि सरकश लोगों का कोई मद्दगार नहीं
38إِنَّ اللَّهَ عَالِمُ غَيْبِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
बेशक खुदा सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों से ख़ूब वाक़िफ है वह यक़ीनी दिलों के पोशीदा राज़ से बाख़बर है
39هُوَ الَّذِي جَعَلَكُمْ خَلَائِفَ فِي الْأَرْضِ ۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِلَّا مَقْتًا ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ إِلَّا خَسَارًا
वह वही खुदा है जिसने रूए ज़मीन में तुम लोगों को (अगलों का) जानशीन बनाया फिर जो शख्स काफ़िर होगा तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर पड़ेगा और काफ़िरों को उनका कुफ्र उनके परवरदिगार की बारगाह में ग़ज़ब के सिवा कुछ बढ़ाएगा नहीं और कुफ्फ़ार को उनका कुफ़्र घाटे के सिवा कुछ नफ़ा न देगा
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37आयत

अनुवाद — फातिर 37

सूरा फातिर आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग दोजख़ में (पड़े) चिल्लाया करेगें कि परवरदिगार…

सूरा आयत 37/45 — फातिर فاطر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: फातिर सुनें, फातिर अनुवाद, फातिर mp3, फातिर pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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