फातिर · 38/45
अनुवाद उच्चारण — फातिर
إِنَّ اللَّهَ عَالِمُ غَيْبِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ ۝٣٨
Innal laaha `aalimu ghaibis samaawaati wal ard; innahoo `aleemum bizaatis sudoor
📖 हिंदी अर्थ
बेशक खुदा सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों से ख़ूब वाक़िफ है वह यक़ीनी दिलों के पोशीदा राज़ से बाख़बर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (मुख्य शब्दों के अर्थ):

  • ग़ैब – छिपी हुई चीज़ें, वह जो आँखों से ओझल हो।
  • बिज़ातिस्सुदूर – सीनों के भीतर की बातें, दिलों के राज़, छिपे हुए विचार और इरादे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह तआला के उस ज्ञान की याद दिलाती है जो हर चीज़ को घेरे हुए है। अल्लाह ही वह हस्ती है जो आसमानों और ज़मीन के हर छिपे हुए रहस्य को जानता है। कोई भी चीज़, चाहे वह कितनी ही छोटी या गुप्त क्यों न हो, उसके ज्ञान से बाहर नहीं है। वह जानता है कि आसमानों में क्या हो रहा है, ज़मीन की गहराइयों में क्या छिपा है, और कौन सा राज़ किसी पहाड़ की तह में दबा हुआ है।

फिर अल्लाह तआला ख़ास तौर पर यह बताता है कि वह "सीनों के भीतर की बातों" का भी जानने वाला है। यानी हमारे दिलों में जो नीयतें हैं, जो इरादे हैं, जो ख़यालात हैं, जो वसवसे (बुरे ख़याल) हैं, जो अच्छे या बुरे भेद हैं – सब कुछ अल्लाह के सामने खुला हुआ है। हम चाहे जितना छिपाने की कोशिश करें, हमारे दिल की हर धड़कन, हर सोच, हर इरादा अल्लाह के इल्म में मौजूद है।

जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमारे दिलों के राज़ तक जानता है, तो हमारे अंदर एक अजीब सी सावधानी और परहेज़गारी पैदा होती है। हम अकेले में भी वह काम नहीं करते जो अल्लाह को नापसंद हो, क्योंकि हम जानते हैं कि अल्लाह देख रहा है और सुन रहा है। यही असली तक़वा (परहेज़गारी) है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें। अल्लाह ने हमें जो आज़ादी दी है, उसका ग़लत इस्तेमाल न करें। जिस तरह हम अपने बाहरी कामों को साफ़ रखते हैं, उसी तरह अपने अंदरूनी हालात को भी साफ़ रखें – नीयत को साफ़ रखें, इरादों को साफ़ रखें, और दिल में किसी के लिए बुराई या ईर्ष्या न पालें।

यह आयत मोमिन के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी भी है। क्योंकि जब अल्लाह दिलों का हाल जानता है, तो वह हमारी अच्छी नीयतों को भी जानता है। जो शख्स अल्लाह की राह में कदम उठाता है, जो नेकी का इरादा करता है, जो दिल से अल्लाह से जुड़ा होता है – अल्लाह उसकी इस नीयत की क़द्र करता है और उसे उसका पूरा अज्र (इनाम) देता है।

तो इस आयत से हमें दो चीज़ें सीखने को मिलती हैं: एक, अल्लाह से डरना और उसकी निगरानी का एहसास रखना; और दूसरा, अल्लाह की रहमत पर भरोसा रखना कि वह हमारी अच्छी नीयतों को जानता है और उन्हें अज्र देगा। यही वह चीज़ है जो एक मुसलमान को ज़िंदगी के हर मोड़ पर सीधे रास्ते पर चलाती है।



📜 आयत 36-40 — फातिर

36وَالَّذِينَ كَفَرُوا لَهُمْ نَارُ جَهَنَّمَ لَا يُقْضَىٰ عَلَيْهِمْ فَيَمُوتُوا وَلَا يُخَفَّفُ عَنْهُم مِّنْ عَذَابِهَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي كُلَّ كَفُورٍ
और जो लोग काफिर हो बैठे उनके लिए जहन्नुम की आग है न उनकी कज़ा ही आएगी कि वह मर जाए और तकलीफ से नजात मिले और न उनसे उनके अज़ाब ही में तख़फीफ की जाएगी हम हर नाशुक्रे की सज़ा यूँ ही किया करते हैं
37وَهُمْ يَصْطَرِخُونَ فِيهَا رَبَّنَا أَخْرِجْنَا نَعْمَلْ صَالِحًا غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ ۚ أَوَلَمْ نُعَمِّرْكُم مَّا يَتَذَكَّرُ فِيهِ مَن تَذَكَّرَ وَجَاءَكُمُ النَّذِيرُ ۖ فَذُوقُوا فَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
और ये लोग दोजख़ में (पड़े) चिल्लाया करेगें कि परवरदिगार अब हमको (यहाँ से) निकाल दे तो जो कुछ हम करते थे उसे छोड़कर नेक काम करेंगे (तो ख़ुदा जवाब देगा कि) क्या हमने तुम्हें इतनी उम्रें न दी थी कि जिनमें जिसको जो कुछ सोंचना समझना (मंज़ूर) हो खूब सोच समझ ले और (उसके अलावा) तुम्हारे पास (हमारा) डराने वाला (पैग़म्बर) भी पहुँच गया था तो (अपने किए का मज़ा) चखो क्योंकि सरकश लोगों का कोई मद्दगार नहीं
38إِنَّ اللَّهَ عَالِمُ غَيْبِ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
बेशक खुदा सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों से ख़ूब वाक़िफ है वह यक़ीनी दिलों के पोशीदा राज़ से बाख़बर है
39هُوَ الَّذِي جَعَلَكُمْ خَلَائِفَ فِي الْأَرْضِ ۚ فَمَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ إِلَّا مَقْتًا ۖ وَلَا يَزِيدُ الْكَافِرِينَ كُفْرُهُمْ إِلَّا خَسَارًا
वह वही खुदा है जिसने रूए ज़मीन में तुम लोगों को (अगलों का) जानशीन बनाया फिर जो शख्स काफ़िर होगा तो उसके कुफ़्र का वबाल उसी पर पड़ेगा और काफ़िरों को उनका कुफ्र उनके परवरदिगार की बारगाह में ग़ज़ब के सिवा कुछ बढ़ाएगा नहीं और कुफ्फ़ार को उनका कुफ़्र घाटे के सिवा कुछ नफ़ा न देगा
40قُلْ أَرَأَيْتُمْ شُرَكَاءَكُمُ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ أَرُونِي مَاذَا خَلَقُوا مِنَ الْأَرْضِ أَمْ لَهُمْ شِرْكٌ فِي السَّمَاوَاتِ أَمْ آتَيْنَاهُمْ كِتَابًا فَهُمْ عَلَىٰ بَيِّنَتٍ مِّنْهُ ۚ بَلْ إِن يَعِدُ الظَّالِمُونَ بَعْضُهُم بَعْضًا إِلَّا غُرُورًا
(ऐ रसूल) तुम (उनसे) पूछो तो कि खुदा के सिवा अपने जिन शरीकों की तुम क़यादत करते थे क्या तुमने उन्हें (कुछ) देखा भी मुझे भी ज़रा दिखाओ तो कि उन्होंने ज़मीन (की चीज़ों) से कौन सी चीज़ पैदा की या आसमानों में कुछ उनका आधा साझा है या हमने खुद उन्हें कोई किताब दी है कि वह उसकी दलील रखते हैं (ये सब तो कुछ नहीं) बल्कि ये ज़ालिम एक दूसरे से (धोखे और) फरेब ही का वायदा करते हैं
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अनुवाद — फातिर 38

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Tuesday, August 18, 2026

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