Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْعُرْجُونِ: खजूर का वह गुच्छा जो पुराना होने पर सूखकर टेढ़ा और पीला हो जाता है।
- الْقَدِيمِ: पुराना, जो समय बीतने के कारण कमज़ोर और बेजान हो गया हो।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में चाँद की अपनी कुदरत की एक अज़ीम निशानी बयान की है। वह फ़रमाता है कि हमने ही चाँद के लिए मंज़िलें (क़दम-ब-क़दम की मंज़िलें) मुक़र्रर की हैं, यानी हर रात उसकी एक अलग मंज़िल है। वह पहले एक पतले हिलाल (चाँद के टुकड़े) के रूप में निकलता है, फिर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है यहाँ तक कि पूरा चाँद (बदर) बन जाता है, और फिर घटने लगता है। आख़िर में वह इस हालत को पहुँच जाता है कि पुराने खजूर के सूखे, टेढ़े और पीले गुच्छे जैसा दिखाई देता है, जो बिल्कुल कमज़ोर और बेजान हो चुका होता है।
यह चाँद का यह नियमित सफ़र — बढ़ना, घटना, और हर महीने इसी तरह दोहराना — अल्लाह की कुदरत की सबसे बड़ी निशानी है। यह किसी अंधे, बेजान सिस्टम का काम नहीं, बल्कि उस ज़ाते-वाजिबुल-वुजूद की तदबीर है जिसने हर चीज़ को एक अंदाज़े से पैदा किया है। इसी तरह चाँद की मंज़िलों से इंसान अपने दीनी और दुनियावी मामलों में फ़ायदा उठाता है — रोज़े, हज, ईद, और अपने लेन-देन के हिसाब-किताब के लिए।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि जिस तरह चाँद अपनी हर मंज़िल पर अल्लाह के हुक्म की ताबेदारी करता है और कभी अपनी राह से नहीं भटकता, उसी तरह हमें भी अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करनी चाहिए। चाँद का घटना-बढ़ना हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया हमेशा एक हालत पर नहीं रहती — कभी उतार है तो कभी चढ़ाव। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी रहमत से निराश नहीं होना चाहिए। यह भी एक दलील है कि क़यामत का दिन आएगा, जब यह सारा निज़ाम बदल दिया जाएगा और हर इंसान को अपने अमल का हिसाब देना होगा।
अल्लाह तआला ने यह सब कुछ हमारी हिदायत के लिए बयान किया है, ताकि हम उसकी कुदरत पर ग़ौर करें, उसकी वहदानियत को पहचानें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें। यह चाँद की यह तरतीब हर महीने दोहराई जाती है, और हर बार यह हमें यही पैग़ाम देती है कि इस कायनात का मालिक एक है, और उसी की इबादत ही सच्ची कामयाबी है।
📜 आयत 37-41 — सूरा यासीन
अनुवाद — यासीन 39
सूरा यासीन आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने चाँद के लिए मंज़िलें मुक़र्रर कर दीं हैं…सूरा आयत 39/83 — सूरा यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यासीन सुनें, सूरा यासीन अनुवाद, सूरा यासीन mp3, सूरा यासीन pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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