यासीन · 56/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
هُمْ وَأَزْوَاجُهُمْ فِي ظِلَالٍ عَلَى الْأَرَائِكِ مُتَّكِئُونَ ۝٥٦
Hum wa azwaajuhum fee zilaalin `alal araaa`iki muttaki`oon
📖 हिंदी अर्थ
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अराइक (الأرائك): यह 'अरीकah' का बहुवचन है, जिसका अर्थ है सजा-सजाया हुआ तख्त या पलंग, जिस पर चादरें और गद्दे बिछे हों और जिसके चारों ओर पर्दे हों।
  • ज़िलाल (ظلال): घनी और ठंडी छायाएँ।
  • मुत्तकिऊन (متكئون): तकिया लगाकर आराम से बैठने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

यह उस महान सुख और आनंद का वर्णन है जो अल्लाह तआला ने अपने नेक बंदों के लिए जन्नत में तैयार किया है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते रहे, उसके आदेशों का पालन करते रहे और उसकी मनाही से बचते रहे, वे और उनकी पत्नियाँ (जो दुनिया में नेक थीं) जन्नत की ठंडी, घनी और आरामदायक छायाओं में होंगे। वे सजे-सजाए तख्तों पर तकिया लगाकर आराम से बैठे होंगे, जहाँ न धूप की तपिश होगी, न गर्मी की तकलीफ़, न कोई दुख या चिंता। उनके चेहरों पर खुशी और संतोष की चमक होगी, और उनके दिलों में सुकून और शांति होगी। यह वह इनाम है जो अल्लाह ने अपने रहमत और कृपा से उन्हें दिया है, और यह उनके अच्छे कर्मों का फल है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों के साथ कितना दयालु और करीम है। उसने जन्नत में वह सब कुछ तैयार किया है जो इंसान के दिल को खुशी दे सकता है और उसकी आँखों को ठंडक पहुँचा सकता है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की राह में मेहनत करते हैं, वे इस आराम और सुकून के हकदार बनते हैं। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के अनुसार बनाएँ, ताकि हमें भी यह शानदार इनाम मिल सके। याद रखिए, दुनिया की मेहनत और परेशानी कुछ दिनों की है, लेकिन जन्नत का सुख और आराम हमेशा के लिए है। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से जन्नत का हकदार बनाए। आमीन।



📜 आयत 54-58 — यासीन

54فَالْيَوْمَ لَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا وَلَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
55إِنَّ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ الْيَوْمَ فِي شُغُلٍ فَاكِهُونَ
बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं
56هُمْ وَأَزْوَاجُهُمْ فِي ظِلَالٍ عَلَى الْأَرَائِكِ مُتَّكِئُونَ
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं
57لَهُمْ فِيهَا فَاكِهَةٌ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ
बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है
58سَلَامٌ قَوْلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ
मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा
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अनुवाद — यासीन 56

सूरा यासीन आयत 56 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए…

सूरा आयत 56/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 54–58. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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