अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِنَّهُ - निस्संदेह वह (हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम)
- مِنْ عِبَادِنَا - हमारे (अल्लाह के) बंदों में से
- الْمُؤْمِنِينَ - सच्चे ईमान वाले
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने ख़लील (दोस्त) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की प्रशंसा कर रहे हैं। यह आयत उस महान घटना के बाद आई है जब हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटे इस्माईल को अल्लाह के हुक्म की पालना में क़ुर्बानी के लिए पेश किया और दोनों ने मिलकर अल्लाह के आदेश के सामने पूर्ण समर्पण दिखाया। यह एक ऐसा इम्तिहान था जिसमें उन्होंने कामयाबी हासिल की।
अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि हज़रत इब्राहीम हमारे उन ख़ास बंदों में से थे जो सच्चे ईमान रखते थे। उनका ईमान सिर्फ़ ज़बानी नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने अमल से यह साबित कर दिया कि वे अल्लाह की बंदगी का पूरा हक़ अदा करते हैं। उन्होंने अपनी जान, अपनी औलाद और अपनी हर चीज़ को अल्लाह की राह में क़ुर्बान करने का जज़्बा रखा।
यहाँ "बंदा" होने का ज़िक्र बड़ी मुहब्बत और इज़्ज़त के साथ किया गया है। यह सिखाता है कि अल्लाह के नज़दीक सबसे बड़ा मर्तबा "अच्छा बंदा" होने का है। जो शख्स अल्लाह की बंदगी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत में सरफ़राज़ी अता फ़रमाता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ दिल में यक़ीन रखने का नाम नहीं, बल्कि उस ईमान का तक़ाज़ा है कि हम अपने अमल से अल्लाह की रज़ा को पेशे-नज़र रखें। जब हम अपनी ज़िंदगी के हर फ़ैसले में अल्लाह की पैरवी करेंगे, तो अल्लाह हमें भी अपने नेक बंदों में शामिल फ़रमाएगा।
यह आयत हमें हज़रत इब्राहीम की सीरत पर चलने की तरग़ीब देती है — वफ़ादारी, सब्र, अल्लाह के हुक्म के सामने सर झुकाना और हर हाल में शुक्रगुज़ार रहना। यही वो सिफ़ात हैं जो एक मुसलमान को अल्लाह का पसंदीदा बंदा बनाती हैं।
📜 आयत 109-113 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 111
सूरा अस-साफ्फात आयत 111 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक इबराहीम हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों में थेसूरा आयत 111/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 109–113. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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