अस-साफ्फात · 157/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝١٥٧
Faatoo bi Kitaabikum in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَأْتُوا: लाओ, प्रस्तुत करो
  • بِكِتَابِكُمْ: अपनी किताब (जो तुम्हारे पास हो)
  • إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ: यदि तुम सच्चे हो (अपने दावे में)

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मशरिकीन (बुतपरस्तों) और उन लोगों को चुनौती दे रहे हैं जो यह दावा करते थे कि अल्लाह के साथ कोई और भी पूज्य है, या फरिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, या वे ऐसी बातें कहते थे जिनका कोई सबूत नहीं था। अल्लाह फरमाता है: "यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो, तो अपनी कोई किताब लाओ जो अल्लाह की तरफ से उतरी हो और जिसमें तुम्हारे इस दावे का समर्थन हो।"

यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि अल्लाह ने जो भी किताबें उतारीं—तौरात, इंजील, ज़बूर, कुरआन—उनमें से किसी में भी शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाने) की इजाज़त नहीं दी गई। सभी किताबें तौहीद (एकेश्वरवाद) पर इत्तफाक रखती हैं। इसलिए यह चुनौती उनके झूठ को उजागर करने के लिए काफी थी।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दलील और सबूत का धर्म है। हर बात में हमें सच्चाई और प्रमाण की तलाश करनी चाहिए। अल्लाह ने कुरआन में कई जगह लोगों को दलील की चुनौती दी है, क्योंकि सच्चाई वही है जो सबूत से साबित हो। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह अंधी नकल या बिना सोचे-समझे मानने की बात नहीं करता, बल्कि तर्क और प्रमाण की बुनियाद पर खड़ा है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो लोग झूठे दावे करते हैं, वे कभी सबूत नहीं दे सकते। लेकिन इस्लाम का हर सिद्धांत, हर आदेश और हर बात किताब और सुन्नत की रोशनी में साबित है। हमें चाहिए कि हम अपने दीन को समझें, उसकी दलीलों को जानें और दूसरों के सामने भी प्यार और हिकमत से पेश करें। अल्लाह हमें सच्चाई पर चलने और उसे फैलाने की तौफीक दे। आमीन।



📜 आयत 155-159 — अस-साफ्फात

155أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
तो क्या तुम (इतना भी) ग़ौर नहीं करते
156أَمْ لَكُمْ سُلْطَانٌ مُّبِينٌ
या तुम्हारे पास (इसकी) कोई वाज़ेए व रौशन दलील है
157فَأْتُوا بِكِتَابِكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी किताब पेश करो
158وَجَعَلُوا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ الْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
और उन लोगों ने खुदा और जिन्नात के दरमियान रिश्ता नाता मुक़र्रर किया है हालाँकि जिन्नात बखूबी जानते हैं कि वह लोग यक़ीनी (क़यामत में बन्दों की तरह) हाज़िर किए जाएँगे
159سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें बनाया करते हैं इनसे खुदा पाक साफ़ है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 157

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Tuesday, August 18, 2026

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