अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَأْتُوا: लाओ, प्रस्तुत करो
- بِكِتَابِكُمْ: अपनी किताब (जो तुम्हारे पास हो)
- إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ: यदि तुम सच्चे हो (अपने दावे में)
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मशरिकीन (बुतपरस्तों) और उन लोगों को चुनौती दे रहे हैं जो यह दावा करते थे कि अल्लाह के साथ कोई और भी पूज्य है, या फरिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, या वे ऐसी बातें कहते थे जिनका कोई सबूत नहीं था। अल्लाह फरमाता है: "यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो, तो अपनी कोई किताब लाओ जो अल्लाह की तरफ से उतरी हो और जिसमें तुम्हारे इस दावे का समर्थन हो।"
यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि अल्लाह ने जो भी किताबें उतारीं—तौरात, इंजील, ज़बूर, कुरआन—उनमें से किसी में भी शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझीदार बनाने) की इजाज़त नहीं दी गई। सभी किताबें तौहीद (एकेश्वरवाद) पर इत्तफाक रखती हैं। इसलिए यह चुनौती उनके झूठ को उजागर करने के लिए काफी थी।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम दलील और सबूत का धर्म है। हर बात में हमें सच्चाई और प्रमाण की तलाश करनी चाहिए। अल्लाह ने कुरआन में कई जगह लोगों को दलील की चुनौती दी है, क्योंकि सच्चाई वही है जो सबूत से साबित हो। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह अंधी नकल या बिना सोचे-समझे मानने की बात नहीं करता, बल्कि तर्क और प्रमाण की बुनियाद पर खड़ा है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो लोग झूठे दावे करते हैं, वे कभी सबूत नहीं दे सकते। लेकिन इस्लाम का हर सिद्धांत, हर आदेश और हर बात किताब और सुन्नत की रोशनी में साबित है। हमें चाहिए कि हम अपने दीन को समझें, उसकी दलीलों को जानें और दूसरों के सामने भी प्यार और हिकमत से पेश करें। अल्लाह हमें सच्चाई पर चलने और उसे फैलाने की तौफीक दे। आमीन।
📜 आयत 155-159 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 157
सूरा अस-साफ्फात आयत 157 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो अगर तुम (अपने दावे में) सच्चे हो तो अपनी…सूरा आयत 157/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 155–159. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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