अस-साफ्फात · 174/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ۝١٧٤
Fatawalla `anhum hatta heen
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَتَوَلَّ: मुँह फेर लो, उनसे किनारा कर लो
  • عَنْهُمْ: उन (मक्का के काफिरों) से
  • حَتَّى حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अर्थात जब तक अल्लाह की ओर से युद्ध का आदेश न आ जाए

व्याख्या:

ऐ नबी! उन लोगों से जो सत्य को ठुकरा रहे हैं और हठधर्मी पर अड़े हुए हैं, अभी के लिए किनारा कर लो। उनकी बातों, उनके उपहास और उनकी ओर से होने वाली तकलीफ़ों को झेलते हुए उन्हें उनके हाल पर छोड़ दो। यह आदेश उस समय तक के लिए है जब तक अल्लाह तआला की ओर से युद्ध की अनुमति न आ जाए। यह एक ऐसा निर्देश है जो रणनीतिक धैर्य और सहनशीलता की शिक्षा देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हर चीज़ का एक समय होता है। जब अल्लाह की ओर से आदेश आएगा, तो उसका इंतज़ार करो। उनकी सज़ा का समय निश्चित है, और वह अवश्य आएगा। जैसे नबी करीम ﷺ ने मक्का में तेरह साल तक सब्र किया, फिर अल्लाह ने जिहाद की अनुमति दी, उसी प्रकार हर मुसलमान को चाहिए कि कठिनाइयों में धैर्य रखे और अल्लाह के फैसले का इंतज़ार करे।

इस आयत में एक बड़ी खुशखबरी भी है — यह कि यह संघर्ष हमेशा नहीं रहेगा, और न ही यह कठिनाई स्थायी है। जैसे ही अल्लाह का आदेश आएगा, हालात बदल जाएँगे। यही वह दृढ़ विश्वास है जो मोमिन के दिल को सुकून देता है और उसे आगे बढ़ने की ताक़त देता है। अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, और हर मुश्किल के बाद आसानी का वादा उसकी ओर से है।



📜 आयत 172-176 — सूरा अस-साफ्फात

172إِنَّهُمْ لَهُمُ الْمَنصُورُونَ
कि इन लोगों की (हमारी बारगाह से) यक़ीनी मदद की जाएगी
173وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ الْغَالِبُونَ
और हमारा लश्कर तो यक़ीनन ग़ालिब रहेगा
174فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
175وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे
176أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
174आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 174

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Saturday, October 3, 2026

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