अस-साफ्फात · 177/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ ۝١٧٧
Fa izaa nazala bisaahatihim fasaaa`a sabaahul munzareen
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ: अर्थात उनके आँगन में या उनके पड़ाव में उतर आया, यानी उन पर आ पड़ा।
  • فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ: तो बहुत बुरा सुबह होगा उन लोगों का जिन्हें डराया गया था (चेतावनी दी गई थी)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब ये काफ़िर और मुशरिक लोग मज़ाक़ उड़ाते हुए अज़ाब (यातना) को जल्दी माँगते थे और कहते थे कि "ये अज़ाब कब आएगा?", तो अल्लाह तआला ने फ़रमाया: जब हमारा अज़ाब उनके आँगन में उतर आएगा—यानी उनके घरों और बस्तियों को घेर लेगा—तो उस दिन उनका सुबह बहुत बुरा होगा। वह सुबह उनके लिए तबाही और बर्बादी लेकर आएगी, जिसकी उन्हें पहले से चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन उन्होंने उसे झुठला दिया और उसका मज़ाक़ उड़ाया।

यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि जब वह किसी क़ौम पर अज़ाब भेजता है, तो वह उन्हें पहले चेतावनी देता है ताकि वे सुधर जाएँ। लेकिन जो लोग चेतावनी को नज़रअंदाज़ करते हैं और हठधर्मी पर अड़े रहते हैं, उन पर अज़ाब आकर रहता है। यही हाल उन लोगों का होगा जो रसूलुल्लाह ﷺ की चेतावनी को झुठला रहे थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की पकड़ से डराती है और बताती है कि अल्लाह की चेतावनी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जो लोग नबियों की बातों को मज़ाक़ समझते हैं, वे अक्सर उसी अज़ाब की जद में आ जाते हैं जिसकी उन्हें चेतावनी दी गई थी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के कलाम और उसके रसूल की शिक्षाओं को गंभीरता से लें, क्योंकि अल्लाह की ओर से जो चेतावनी आती है, वह हमारी भलाई के लिए होती है। जो उसे मान लेता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है, और जो उसे ठुकरा देता है, उसका अंजाम बहुत बुरा होता है। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी चेतावनियों से सबक़ सीखते हैं और उसकी राह पर चलते हैं। आमीन।



📜 आयत 175-179 — सूरा अस-साफ्फात

175وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे
176أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
177فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी
178وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
179وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
177आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 177

सूरा अस-साफ्फात आयत 177 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो…

सूरा आयत 177/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 175–179. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए