अस-साफ्फात · 178/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ۝١٧٨
Wa tawalla `anhum hattaa heen
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّ: मुँह फेर लो, उनसे अलग हो जाओ, उनकी परवाह न करो।
  • حَتَّىٰ حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अर्थात जब तक अल्लाह की ओर से उनके लिए यातना का फैसला न आ जाए।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन इनकार करने वालों से कुछ समय के लिए मुँह फेर लीजिए और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दीजिए। यह आदेश आपको धैर्य और सब्र का पाठ पढ़ाता है, क्योंकि हर चीज़ का एक वक़्त मुक़र्रर है। अल्लाह तआला ने अपनी बेहद हिकमत से इन लोगों को मोहलत दी है, लेकिन यह मोहलत उनके लिए राहत नहीं, बल्कि उनकी परीक्षा और उनके गुनाहों में इज़ाफ़े का ज़रिया है।

जब आप उनसे ए'राज़ करेंगे, तो वे अपने कुकर्मों में मशगूल रहेंगे, लेकिन जल्द ही वह समय आएगा जब अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल होगा और वे देख लेंगे कि उनका अंजाम कितना बुरा था। यह आदेश नबी ﷺ के दिल को तसल्ली देता है कि आपका काम सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है, फैसला अल्लाह के हाथ में है।

इस आयत में हमारे लिए भी एक बड़ा सबक़ है — जब हमारे सामने ऐसे लोग हों जो हक़ को नकारें और हमारी बात न मानें, तो हमें उनके साथ बेहूदा बहस या झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी निभाकर उन्हें अल्लाह के हवाले कर देना चाहिए। अल्लाह ही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है।

याद रखिए, अल्लाह की मोहलत उसकी रहमत से खाली नहीं होती — वह चाहता है कि बंदे तौबा कर लें और अपनी गलतियों से बाज़ आ जाएँ। लेकिन जो लोग अपनी सरकशी पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब निश्चित है। जब वह अज़ाब आएगा, तो कोई उसे टाल नहीं सकेगा। इसलिए ऐ बंदे! अल्लाह की नेमतों की क़द्र कर, उसकी तरफ़ रुजू कर, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चल — यही तेरी कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 176-180 — सूरा अस-साफ्फात

176أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
177فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी
178وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
179وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और देखते रहो ये लोग तो खुद अनक़रीब ही अपना अन्जाम देख लेगें
180سُبْحَانَ رَبِّكَ رَبِّ الْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ
ये लोग जो बातें (खुदा के बारे में) बनाया करते हैं उनसे तुम्हारा परवरदिगार इज्ज़त का मालिक पाक साफ है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
178आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 178

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Friday, October 2, 2026

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