अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تَوَلَّ: मुँह फेर लो, उनसे अलग हो जाओ, उनकी परवाह न करो।
- حَتَّىٰ حِينٍ: एक निश्चित समय तक, अर्थात जब तक अल्लाह की ओर से उनके लिए यातना का फैसला न आ जाए।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन इनकार करने वालों से कुछ समय के लिए मुँह फेर लीजिए और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दीजिए। यह आदेश आपको धैर्य और सब्र का पाठ पढ़ाता है, क्योंकि हर चीज़ का एक वक़्त मुक़र्रर है। अल्लाह तआला ने अपनी बेहद हिकमत से इन लोगों को मोहलत दी है, लेकिन यह मोहलत उनके लिए राहत नहीं, बल्कि उनकी परीक्षा और उनके गुनाहों में इज़ाफ़े का ज़रिया है।
जब आप उनसे ए'राज़ करेंगे, तो वे अपने कुकर्मों में मशगूल रहेंगे, लेकिन जल्द ही वह समय आएगा जब अल्लाह का अज़ाब उन पर नाज़िल होगा और वे देख लेंगे कि उनका अंजाम कितना बुरा था। यह आदेश नबी ﷺ के दिल को तसल्ली देता है कि आपका काम सिर्फ पैग़ाम पहुँचाना है, फैसला अल्लाह के हाथ में है।
इस आयत में हमारे लिए भी एक बड़ा सबक़ है — जब हमारे सामने ऐसे लोग हों जो हक़ को नकारें और हमारी बात न मानें, तो हमें उनके साथ बेहूदा बहस या झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि अपनी ज़िम्मेदारी निभाकर उन्हें अल्लाह के हवाले कर देना चाहिए। अल्लाह ही सबसे बेहतर फैसला करने वाला है।
याद रखिए, अल्लाह की मोहलत उसकी रहमत से खाली नहीं होती — वह चाहता है कि बंदे तौबा कर लें और अपनी गलतियों से बाज़ आ जाएँ। लेकिन जो लोग अपनी सरकशी पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब निश्चित है। जब वह अज़ाब आएगा, तो कोई उसे टाल नहीं सकेगा। इसलिए ऐ बंदे! अल्लाह की नेमतों की क़द्र कर, उसकी तरफ़ रुजू कर, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चल — यही तेरी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 176-180 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 178
सूरा अस-साफ्फात आयत 178 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे…सूरा आयत 178/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 176–180. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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