अस-साफ्फात · 176/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ۝١٧٦
Afabi`azaabinaa yasta`jiloon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَفَبِعَذَابِنَا: क्या हमारे अज़ाब (यातना) के साथ
  • يَسْتَعْجِلُونَ: वे जल्दी माँग रहे हैं

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए और काफ़िरों की उस हरकत पर अचरज ज़ाहिर करते हुए फ़रमा रहे हैं कि ऐ नबी! क्या ये मुशरिकीन हमारे अज़ाब को देखने की जल्दी कर रहे हैं? यानी जब वे आपसे मज़ाक़िया अंदाज़ में कहते हैं कि "ये अज़ाब कब आएगा?" तो क्या वे सचमुच समझते हैं कि अल्लाह का अज़ाब कोई मज़ाक़ है?

ये वही लोग हैं जो सच्चाई से मुँह मोड़कर उसे झुठला रहे हैं, और जब उन्हें डराया जाता है तो वे उसे खेल-तमाशा समझकर अज़ाब की जल्दी माँगते हैं। अल्लाह तआला उन्हें चेतावनी देते हुए फ़रमाते हैं कि जब हमारा अज़ाब उन पर नाज़िल होगा, तो वह कितना बुरा सुबह होगा उनके लिए! यानी जब अज़ाब आएगा तो वे समझ जाएँगे कि ये कोई मज़ाक़ नहीं था, बल्कि सच्चा वादा था।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह के अज़ाब से डरें और उसकी पकड़ को हल्का न समझें। अल्लाह की रहमत के साथ-साथ उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की ओर रुजू करें, उसकी इबादत करें और उसके दीन पर साबित क़दम रहें। जो लोग अल्लाह के अज़ाब की जल्दी माँगते हैं, वे दरअसल अपनी ही बर्बादी को बुला रहे होते हैं। हमें अल्लाह से उसकी रहमत और माफ़ी की दुआ करनी चाहिए और उसके अज़ाब से पनाह माँगनी चाहिए।

याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह अपने बंदों पर रहम करने वाला भी है। जो लोग तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है। इसलिए हमें कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और न ही उसके अज़ाब से बेख़ौफ़ होना चाहिए।



📜 आयत 174-178 — सूरा अस-साफ्फात

174فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
175وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ
और इनको देखते रहो तो ये लोग अनक़रीब ही (अपना नतीजा) देख लेगे
176أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे हैं
177فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَاءَ صَبَاحُ الْمُنذَرِينَ
फिर जब (अज़ाब) उनकी अंगनाई में उतर पडेग़ा तो जो लोग डराए जा चुके हैं उनकी भी क्या बुरी सुबह होगी
178وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ
और उन लोगों से एक ख़ास वक्त तक मुँह फेरे रहो
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
176आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 176

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Saturday, October 3, 2026

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