अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَبِعَذَابِنَا: क्या हमारे अज़ाब (यातना) के साथ
- يَسْتَعْجِلُونَ: वे जल्दी माँग रहे हैं
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए और काफ़िरों की उस हरकत पर अचरज ज़ाहिर करते हुए फ़रमा रहे हैं कि ऐ नबी! क्या ये मुशरिकीन हमारे अज़ाब को देखने की जल्दी कर रहे हैं? यानी जब वे आपसे मज़ाक़िया अंदाज़ में कहते हैं कि "ये अज़ाब कब आएगा?" तो क्या वे सचमुच समझते हैं कि अल्लाह का अज़ाब कोई मज़ाक़ है?
ये वही लोग हैं जो सच्चाई से मुँह मोड़कर उसे झुठला रहे हैं, और जब उन्हें डराया जाता है तो वे उसे खेल-तमाशा समझकर अज़ाब की जल्दी माँगते हैं। अल्लाह तआला उन्हें चेतावनी देते हुए फ़रमाते हैं कि जब हमारा अज़ाब उन पर नाज़िल होगा, तो वह कितना बुरा सुबह होगा उनके लिए! यानी जब अज़ाब आएगा तो वे समझ जाएँगे कि ये कोई मज़ाक़ नहीं था, बल्कि सच्चा वादा था।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह के अज़ाब से डरें और उसकी पकड़ को हल्का न समझें। अल्लाह की रहमत के साथ-साथ उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की ओर रुजू करें, उसकी इबादत करें और उसके दीन पर साबित क़दम रहें। जो लोग अल्लाह के अज़ाब की जल्दी माँगते हैं, वे दरअसल अपनी ही बर्बादी को बुला रहे होते हैं। हमें अल्लाह से उसकी रहमत और माफ़ी की दुआ करनी चाहिए और उसके अज़ाब से पनाह माँगनी चाहिए।
याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन वह अपने बंदों पर रहम करने वाला भी है। जो लोग तौबा कर लें, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है। इसलिए हमें कभी भी अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए और न ही उसके अज़ाब से बेख़ौफ़ होना चाहिए।
📜 आयत 174-178 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 176
सूरा अस-साफ्फात आयत 176 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या ये लोग हमारे अज़ाब की जल्दी कर रहे…सूरा आयत 176/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 174–178. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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