अस-साफ्फात · 39/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٣٩
Wa maa tujzawna illaa maa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُجْزَوْنَ: तुम्हें बदला दिया जाएगा।
  • إِلَّا: सिवाय, केवल।
  • مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ: जो कुछ तुम करते रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मुशरिको! आख़िरत के दिन तुम्हें उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम दुनिया में करते रहे हो। यानी तुम्हारा किया हुआ कुछ भी रद्द नहीं होगा, न ही तुम पर कोई ज़ुल्म होगा। अल्लाह तआला ने तुम्हें जो आज़ाब की सज़ा सुनाई है, वह तुम्हारे उन्हीं आमाल (कर्मों) का नतीजा है जो तुमने दुनिया में किए — शिर्क (अल्लाह के साथ साझीदार ठहराना), नाफ़रमानी, और गुनाह। यह अल्लाह की पूरी अद्ल (न्याय) है कि वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि हर इंसान को उसकी कमाई का पूरा-पूरा हिसाब देता है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त की याद दिलाती है: यह दुनिया आख़िरत की खेती है। जो जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा। अगर हम आज अच्छे कर्म करेंगे, तो कल क़ियामत के दिन हमें अच्छा बदला मिलेगा; और अगर हम बुरे कर्म करेंगे, तो उसका अंजाम भी हमें भुगतना पड़ेगा। अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें पहले ही आगाह कर दिया है, ताकि हम अपनी ज़िंदगी को सँवार लें और उस रास्ते पर चलें जो उसकी रज़ा (खुशी) का रास्ता है।

इस आयत में हमारे लिए एक प्यारा पैग़ाम है: अल्लाह ने हमें मुफ़्त में जन्नत का वादा नहीं किया, बल्कि हमारे अच्छे आमाल के बदले में उसे अता करने का वादा किया है। यह अल्लाह का इन्साफ़ भी है और उसकी फ़ज़ल (कृपा) भी — कि वह हमारी छोटी-सी नेकी को भी बड़ा अज्र (इनाम) देता है। तो आओ, हम अपने कर्मों को सुधारें, शिर्क और गुनाहों से बचें, और अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम उन लोगों में शामिल हों जिन्हें जन्नत की नेअमतें मिलेंगी।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अस-साफ्फात

37بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ
बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है
38إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ
तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे
39وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे
40إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे
41أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी
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अनुवाद — अस-साफ्फात 39

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Tuesday, August 18, 2026

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