अस-साफ्फात · 40/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ ۝٤٠
Illaa `ibaadal laahil mukhlaseen
📖 हिंदी अर्थ
मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • इल्ला (إِلَّا): लेकिन, परन्तु।
  • इबादल्लाह (عِبَادَ اللَّهِ): अल्लाह के बंदे।
  • मुख़्लसीन (الْمُخْلَصِينَ): जिन्हें अल्लाह ने अपनी विशेष रहमत और भक्ति के लिए चुन लिया हो, या जिन्होंने अपने ईमान और अमल को सिर्फ़ अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लिया हो।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जो लोग उसके ख़ास बंदे हैं, जिन्हें उसने अपनी इबादत के लिए चुन लिया है और जिन्होंने अपने दिल को शिर्क, रिया और दुनियावी आलिशों से पाक करके सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा को अपना निशाना बना लिया है—वे उस अज़ाब से महफ़ूज़ रहेंगे जो गुनाहगारों और काफ़िरों के लिए मुक़र्रर है। ये वो लोग हैं जिनके ईमान में खोट नहीं, जिनकी इबादत में दिखावा नहीं, और जिनके अमल में रियाकारी का कोई शुबा नहीं। अल्लाह ने उन्हें अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ा है और उनके लिए नजात (मुक्ति) और कामयाबी लिख दी है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची नजात सिर्फ़ उन्हीं को मिलेगी जो अपने ईमान और अमल को ख़ालिस कर लें। अल्लाह के दीदार और उसकी रहमत की मंज़िल उन्हीं के लिए है जो दुनिया की चमक-दमक, माल-दौलत, और नफ़्स की ख्वाहिशों से ऊपर उठकर सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा को तलब करते हैं। यही वो लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने क़ुर्ब (नज़दीकी) के लिए चुन लिया है, और यही वो लोग हैं जो क़यामत के दिन हर ख़ौफ़ और अंदेशे से बिल्कुल महफ़ूज़ होंगे।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बुला रही है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लें। जब हम अपने दिल को साफ़ करेंगे, अपनी नीयत को दुरुस्त करेंगे, और अपने हर अमल को अल्लाह की रज़ा के लिए करेंगे, तो अल्लाह हमें अपनी ख़ास मुहब्बत और हिफ़ाज़त में ले लेगा। यही वो रास्ता है जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की राह पर चलाता है। अल्लाह हम सबको अपने मुख़्लसीन बंदों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 38-42 — सूरा अस-साफ्फात

38إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ
तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे
39وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे
40إِلَّا عِبَادَ اللَّهِ الْمُخْلَصِينَ
मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे
41أُولَٰئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ
उनके वास्ते (बेहिश्त में) एक मुक़र्रर रोज़ी होगी
42فَوَاكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ
(और वह भी ऐसी वैसी नहीं) हर क़िस्म के मेवे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 40

सूरा अस-साफ्फात आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर खुदा के बरगुजीदा बन्दे

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Thursday, October 1, 2026

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