अस-साफ्फात · 78/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ ۝٧٨
Wa taraknaa `alaihi fil aakhireen
📖 हिंदी अर्थ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَتَرَكْنَا: हमने छोड़ा / बनाए रखा
  • عَلَيْهِ: उस (नूह अलैहिस्सलाम) पर
  • فِي الْآخِرِينَ: पिछली और आने वाली उम्मतों में / बाद की पीढ़ियों में

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का ज़िक्र कर रहे हैं। जब नूह अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को सैकड़ों साल तक तौहीद (एकेश्वरवाद) की दावत दी, और उन्होंने अल्लाह के दीन के लिए अत्यधिक कष्ट सहे, तो अल्लाह तआला ने उन्हें वह सम्मान दिया जो हर ज़माने में याद रखा जाएगा।

अल्लाह फ़रमाता है कि हमने नूह अलैहिस्सलाम के लिए बाद की उम्मतों में एक अच्छी यादगार और पाकीज़ा नाम छोड़ा। यानी जितने भी लोग उनके बाद आए, वे उन्हें अच्छाई और सम्मान के साथ याद करते हैं। यह सिर्फ़ एक तारीख़ी ज़िक्र नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ओर से उनके नबी के लिए एक ख़ास इनाम है — कि उनका नाम हमेशा के लिए अच्छाई और बरकत के साथ ज़िंदा रहे।

यहाँ अल्लाह तआला हमें एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी दे रहे हैं कि जो लोग अल्लाह के दीन के लिए काम करते हैं, उनका नाम अल्लाह ख़ुद अपनी किताब में और लोगों की ज़ुबान पर अच्छाई के साथ ज़िंदा रखता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी कामयाबी है कि इंसान अपनी ज़िंदगी में अल्लाह को राज़ी कर ले और उसका नाम अच्छाई के साथ याद किया जाए।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अच्छे काम और नेकी की यादगार कभी ख़त्म नहीं होती। चाहे इंसान दुनिया से चला जाए, लेकिन उसकी नेकियाँ और उसका अच्छा किरदार लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को आख़िरत में भी नजात दिलाएगी और दुनिया में भी उसे अज़ीज़ बनाए रखेगी।

आइए हम भी अपनी ज़िंदगी में ऐसे काम करें जो अल्लाह को पसंद हों, ताकि हमारा नाम भी अच्छाई के साथ याद किया जाए और हम उन लोगों में शामिल हों जिन पर अल्लाह की रहमत और मेहरबानी होती है।



📜 आयत 76-80 — सूरा अस-साफ्फात

76وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
77وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
78وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
79سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
80إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
78आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 78

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Saturday, October 3, 2026

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