Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذُرِّيَّتَهُ: उनकी संतान और नस्ल।
- الْبَاقِينَ: बाकी रहने वाले, जीवित रहने वाले।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाया है। जब तूफ़ान-ए-नूह आया और काफ़िरों का सफ़ाया हो गया, तो अल्लाह ने हज़रत नूह की संतान और उनके साथ ईमान लाने वालों को ही बाक़ी रखा। यानी पूरी दुनिया में सिर्फ़ नूह (अलैहिस्सलाम) की नस्ल ही ज़िंदा रही, और आज तक तमाम इंसान उन्हीं की औलाद से हैं। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक बड़ा नमूना है कि उसने अपने नबी की नस्ल को हमेशा के लिए बाक़ी रखा, जबकि दूसरे सब कुछ मिटा दिया गया।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की नस्ल को बरकत देता है और उन्हें दुनिया में जारी रखता है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की सब्र और अल्लाह पर भरोसे की वजह से अल्लाह ने उन्हें यह इज़्ज़त अता की कि पूरी इंसानियत उन्हीं की नस्ल से चली। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जो अल्लाह की राह में सब्र करते हैं और अपनी औलाद की तरबियत नेकी पर करते हैं — उनकी नस्ल को अल्लाह क़ायम रखता है और उनके नाम को ज़िंदा रखता है।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की राह में ईमान और अमल-ए-सालिह ही असली चीज़ है। दुनिया की दौलत और ताक़त कभी भी ख़त्म हो सकती है, लेकिन अल्लाह वालों की नस्ल और उनका ज़िक्र हमेशा बाक़ी रहता है। आज भी पूरी दुनिया में जितने भी इंसान हैं, सब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की औलाद हैं — यह उनकी अज़मत की दलील है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में नेकी और तक़वा अपनाएँ, ताकि हमारी आने वाली नस्लें भी दीन पर क़ायम रहें और अल्लाह की रहमत हमारे ख़ानदान पर हमेशा रहे।
📜 आयत 75-79 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 77
सूरा अस-साफ्फात आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को…सूरा आयत 77/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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