अस-साफ्फात · 77/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ ۝٧٧
Wa ja`alnaa zurriyyatahoo hummul baaqeen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ذُرِّيَّتَهُ: उनकी संतान और नस्ल।
  • الْبَاقِينَ: बाकी रहने वाले, जीवित रहने वाले।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र फ़रमाया है। जब तूफ़ान-ए-नूह आया और काफ़िरों का सफ़ाया हो गया, तो अल्लाह ने हज़रत नूह की संतान और उनके साथ ईमान लाने वालों को ही बाक़ी रखा। यानी पूरी दुनिया में सिर्फ़ नूह (अलैहिस्सलाम) की नस्ल ही ज़िंदा रही, और आज तक तमाम इंसान उन्हीं की औलाद से हैं। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक बड़ा नमूना है कि उसने अपने नबी की नस्ल को हमेशा के लिए बाक़ी रखा, जबकि दूसरे सब कुछ मिटा दिया गया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों की नस्ल को बरकत देता है और उन्हें दुनिया में जारी रखता है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की सब्र और अल्लाह पर भरोसे की वजह से अल्लाह ने उन्हें यह इज़्ज़त अता की कि पूरी इंसानियत उन्हीं की नस्ल से चली। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जो अल्लाह की राह में सब्र करते हैं और अपनी औलाद की तरबियत नेकी पर करते हैं — उनकी नस्ल को अल्लाह क़ायम रखता है और उनके नाम को ज़िंदा रखता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि अल्लाह की राह में ईमान और अमल-ए-सालिह ही असली चीज़ है। दुनिया की दौलत और ताक़त कभी भी ख़त्म हो सकती है, लेकिन अल्लाह वालों की नस्ल और उनका ज़िक्र हमेशा बाक़ी रहता है। आज भी पूरी दुनिया में जितने भी इंसान हैं, सब हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की औलाद हैं — यह उनकी अज़मत की दलील है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में नेकी और तक़वा अपनाएँ, ताकि हमारी आने वाली नस्लें भी दीन पर क़ायम रहें और अल्लाह की रहमत हमारे ख़ानदान पर हमेशा रहे।

🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — अस-साफ्फात

75وَلَقَدْ نَادَانَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ الْمُجِيبُونَ
और नूह ने (अपनी कौम से मायूस होकर) हमें ज़रूर पुकारा था (देखो हम) क्या खूब जवाब देने वाले थे
76وَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और हमने उनको और उनके लड़के वालों को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
77وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
78وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
79سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
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अनुवाद — अस-साफ्फात 77

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Tuesday, August 18, 2026

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