अस-साफ्फात · 79/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ ۝٧٩
Salaamun `alaa Noohin fil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَلَامٌ (सलाम): अमन, सुरक्षा और किसी भी बुराई से पवित्रता।
  • نُوحٍ (नूह): अल्लाह के महान नबी, हज़रत नूह अलैहिस्सलाम।
  • فِي الْعَالَمِينَ (फ़िल आलमीन): सारे जहानों में, सभी युगों और सृष्टियों में।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत नूह अलैहिस्सलाम के लिए अल्लाह की ओर से एक शाश्वत सम्मान और सुरक्षा की घोषणा है। अल्लाह तआला ने अपने इस महान नबी को ऐसा मर्तबा अता किया कि उनका ज़िक्र हमेशा के लिए ख़ैर और सलामती के साथ जुड़ गया। यह सलाम सिर्फ़ उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं था, बल्कि क़यामत तक के लिए उन्हें अमन और पवित्रता का प्रतीक बना दिया गया।

इस आयत का मतलब यह है कि अल्लाह ने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को यह गारंटी दी कि आने वाली सभी पीढ़ियाँ उन्हें बुराई और बदनामी से याद नहीं करेंगी, बल्कि उनके नाम के साथ हमेशा सलाम और दुआएँ जुड़ी रहेंगी। उनकी कुर्बानियों, सब्र और अल्लाह के प्रति समर्पण को हमेशा प्रशंसा की दृष्टि से देखा जाएगा। यह उनके लिए एक ऐसा सम्मान है जो किसी भी दुनियावी इज़्ज़त से बढ़कर है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाते हैं कि सच्ची इज़्ज़त और बुलंदी उसी को मिलती है जो अल्लाह की राह में सब्र करता है और उसकी रज़ा पर क़ायम रहता है। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने 950 साल तक अपनी क़ौम को दावत दी, तकलीफ़ें सहीं, लेकिन अल्लाह पर भरोसा नहीं छोड़ा। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उनका नाम ऐसा रोशन किया कि आज तक हर मुसलमान उन्हें सलाम के साथ याद करता है।

यह आयत हमारे लिए भी एक प्यारा पैग़ाम रखती है — अगर हम अल्लाह की राह में सब्र और ईमानदारी से काम करें, तो अल्लाह हमारे लिए भी दुनिया और आख़िरत में अच्छाई और सलामती के दरवाज़े खोल सकता है। हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की यह फ़ज़ीलत हमें बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि उन्हें ऐसा मुक़ाम देता है जो हमेशा के लिए यादगार बन जाता है।



📜 आयत 77-81 — सूरा अस-साफ्फात

77وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُ هُمُ الْبَاقِينَ
और हमने (उनमें वह बरकत दी कि) उनकी औलाद को (दुनिया में) बरक़रार रखा
78وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِي الْآخِرِينَ
और बाद को आने वाले लोगों में उनका अच्छा चर्चा बाक़ी रखा
79سَلَامٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِي الْعَالَمِينَ
कि सारी खुदायी में (हर तरफ से) नूह पर सलाम है
80إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
हम नेकी करने वालों को यूँ जज़ाए ख़ैर अता फरमाते हैं
81إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُؤْمِنِينَ
इसमें शक नहीं कि नूह हमारे (ख़ास) ईमानदार बन्दों से थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
79आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 79

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Thursday, October 1, 2026

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