साद · 20/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा साद
وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ ۝٢٠
Wa shadadnaa mulkahoo wa aatainaahul Hikmata wa faslal khitaab
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَدَدْنَا: हमने मज़बूत किया, शक्ति प्रदान की।
  • مُلْكَهُ: उसका राज्य, उसका शासन।
  • الْحِكْمَةَ: नबुव्वत (पैग़म्बरी), समझ और सही निर्णय की शक्ति।
  • فَصْلَ الْخِطَابِ: न्यायपूर्ण फैसला, स्पष्ट और निर्णायक बोल, जो सत्य और असत्य को अलग कर दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उनके राज्य को मज़बूत किया — यानी उन्हें ऐसी क़ुव्वत, हयाबत (रोब) और फ़ौजी ताक़त अता की जिससे उनके दुश्मन उनसे डरते थे और उनका शासन अटल रहा। यह सिर्फ़ ज़ाहिरी ताक़त नहीं थी, बल्कि अल्लाह ने उनके दिल में अदल (इंसाफ़) और हक़ की मुहब्बत रखी, जिससे उनका राज्य वास्तव में मज़बूत हुआ।

फिर अल्लाह ने उन्हें हिक्मत अता की — यानी नबुव्वत, गहरी समझ, और हर मामले में सही निर्णय लेने की क्षमता। यह हिक्मत सिर्फ़ इल्म नहीं थी, बल्कि अमल की तौफ़ीक़ भी थी — वे जो जानते थे उस पर अमल करते थे।

और फ़स्लुल ख़िताब से मुराद यह है कि अल्लाह ने उन्हें ऐसी बोली और फैसले की शक्ति दी जो सच और झूठ, हक़ और बातिल को साफ़ अलग कर दे। जब वे किसी झगड़े में फैसला करते थे, तो ऐसा न्यायपूर्ण और स्पष्ट फैसला देते थे कि किसी को कोई शिकायत नहीं रहती थी। यह एक बहुत बड़ी नेमत थी, क्योंकि न्याय और स्पष्ट वाणी के बिना कोई राज्य क़ायम नहीं रह सकता।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह जिसे चाहता है ताक़त और हिक्मत देता है, लेकिन यह ताक़त हमेशा अदल (न्याय) और हक़ के साथ होती है। हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की कामयाबी का राज़ सिर्फ़ उनकी फ़ौजी ताक़त नहीं थी, बल्कि उनका अल्लाह से जुड़ाव, उनकी नेकी और उनका इंसाफ़ था।

आज के दौर में भी अगर हम चाहते हैं कि हमारी ज़िंदगी, हमारा घर, हमारा समाज मज़बूत हो, तो हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करना होगा, उससे हिक्मत माँगनी होगी, और अपने मामलों में इंसाफ़ और सच्चाई को अपनाना होगा। जब अल्लाह किसी को हिक्मत और सच्ची बोली देता है, तो वह इंसान दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

याद रखिए, अल्लाह की अता (देन) सिर्फ़ माल और औलाद तक महदूद नहीं है — सबसे बड़ी अता हिक्मत, समझ, और सच्चाई पर क़ायम रहने की तौफ़ीक़ है। यही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया में इज़्ज़त देती है और आख़िरत में नजात।



📜 आयत 18-22 — सूरा साद

18إِنَّا سَخَّرْنَا الْجِبَالَ مَعَهُ يُسَبِّحْنَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِشْرَاقِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे
19وَالطَّيْرَ مَحْشُورَةً ۖ كُلٌّ لَّهُ أَوَّابٌ
और परिन्दे भी (यादे खुदा के वक्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे
20وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी
21۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
22إِذْ دَخَلُوا عَلَىٰ دَاوُودَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍ فَاحْكُم بَيْنَنَا بِالْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَاهْدِنَا إِلَىٰ سَوَاءِ الصِّرَاطِ
(और) जब दाऊद के पास आ खड़े हुए तो वह उनसे डर गए उन लोगों ने कहा कि आप डरें नहीं (हम दोनों) एक मुक़द्दमें के फ़रीकैन हैं कि हम में से एक ने दूसरे पर ज्यादती की है तो आप हमारे दरमियान ठीक-ठीक फैसला कर दीजिए और इन्साफ से ने गुज़रिये और हमें सीधी राह दिखा दीजिए
सादकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — साद 20

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Friday, October 2, 2026

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