साद · 19/88
अनुवाद उच्चारण — साद
وَالطَّيْرَ مَحْشُورَةً ۖ كُلٌّ لَّهُ أَوَّابٌ ۝١٩
Wattayra mahshoorah; kullul lahooo awwaab
📖 हिंदी अर्थ
और परिन्दे भी (यादे खुदा के वक्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • महशूरा (محشورة): एकत्रित की हुई, इकट्ठा की हुई।
  • अव्वाब (أوّاب): रुजू करने वाला, लौटने वाला, आज्ञाकारी।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) पर जो विशेष कृपा की, उसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है। अल्लाह ने पहाड़ों को दाऊद (अलैहिस्सलाम) के अधीन कर दिया था कि वे उनके साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे। फिर इसी श्रृंखला में अल्लाह ने पक्षियों को भी उनके अधीन कर दिया, जो हवा में रुके हुए (उड़ते हुए) उनके पास एकत्रित हो जाते थे। ये पक्षी भी दाऊद (अलैहिस्सलाम) की आवाज़ के साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह करते थे।

"कुल्लुन लहू अव्वाब" का अर्थ है कि हर एक (पहाड़ और पक्षी) उनकी ओर रुजू करने वाला और आज्ञाकारी था। जब दाऊद (अलैहिस्सलाम) तस्बीह करते, तो ये सब भी उनके साथ तस्बीह में शामिल हो जाते। यह अल्लाह की कुदरत का एक अद्भुत नमूना है कि उसने निर्जीव पहाड़ों और बेसमझ पक्षियों को भी अपने नबी की तस्बीह में शामिल कर दिया।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की तस्बीह और इबादत में पूरी कायनात शामिल है। पहाड़, पक्षी, पेड़, पत्थर — सब किसी न किसी रूप में अल्लाह की तस्बीह कर रहे हैं। जब ये निर्जीव चीज़ें अल्लाह की तस्बीह करती हैं, तो हम इंसानों को चाहिए कि हम अपनी ज़ुबान से, अपने दिल से और अपने अमल से अल्लाह की इबादत करें और उसकी तस्बीह में लगे रहें।

यह आयत हमें दाऊद (अलैहिस्सलाम) की महानता भी बताती है कि अल्लाह ने उन्हें ऐसा मुकाम दिया कि पहाड़ और पक्षी उनके साथ तस्बीह करते थे। यह उनकी नेकी और अल्लाह की तरफ से उनकी क़ुर्बत का इनाम था। हमें भी चाहिए कि अल्लाह के नेक बंदों की तरह अल्लाह की इबादत में मशगूल रहें, ताकि अल्लाह हमें भी अपनी खास रहमतों से नवाज़े।

अल्लाह तआला हम सबको अपनी तस्बीह और इबादत की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 17-21 — साद

17اصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَاذْكُرْ عَبْدَنَا دَاوُودَ ذَا الْأَيْدِ ۖ إِنَّهُ أَوَّابٌ
(ऐ रसूल) जैसी जैसी बातें ये लोग करते हैं उन पर सब्र करो और हमारे बन्दे दाऊद को याद करो जो बड़े कूवत वाले थे
18إِنَّا سَخَّرْنَا الْجِبَالَ مَعَهُ يُسَبِّحْنَ بِالْعَشِيِّ وَالْإِشْرَاقِ
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे
19وَالطَّيْرَ مَحْشُورَةً ۖ كُلٌّ لَّهُ أَوَّابٌ
और परिन्दे भी (यादे खुदा के वक्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे
20وَشَدَدْنَا مُلْكَهُ وَآتَيْنَاهُ الْحِكْمَةَ وَفَصْلَ الْخِطَابِ
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कूवत अता फरमायी थी
21۞ وَهَلْ أَتَاكَ نَبَأُ الْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا الْمِحْرَابَ
(ऐ रसूल) क्या तुम तक उन दावेदारों की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह हुजरे (इबादत) की दीवार फाँद पडे
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अनुवाद — साद 19

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Tuesday, August 18, 2026

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