Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مَا مَنَعَكَ: किस चीज़ ने तुम्हें रोका
- لِمَا خَلَقْتُ بِيَدَيَّ: उस (आदम) के लिए जिसे मैंने अपने हाथों से बनाया
- أَسْتَكْبَرْتَ: क्या तुमने घमंड किया
- مِنَ الْعَالِينَ: उन लोगों में से थे जो ऊँचा दर्जा रखते हैं (या घमंडी हैं)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की पैदाइश के बाद जब सभी फ़रिश्तों को उन्हें सजदा करने का हुक्म दिया, तो इब्लीस ने घमंड और अहंकार की वजह से इस आदेश की अवहेलना की। इस पर अल्लाह तआला ने उससे पूछा: "ऐ इब्लीस! आख़िर किस चीज़ ने तुम्हें रोका कि तुम उस इंसान को सजदा न करो जिसे मैंने अपने दोनों हाथों से बनाया है?"
यह सवाल अल्लाह की ओर से इब्लीस को जवाबदेह ठहराने के लिए था। अल्लाह तआला ने उससे दो सवाल पूछे: पहला, क्या तुमने खुद को बड़ा समझा और घमंड किया? दूसरा, क्या तुम पहले से ही उन लोगों में से थे जो बड़ाई और ऊँचाई चाहते हैं?
इस आयत में अल्लाह तआला ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की इज़्ज़त और शान को बयान किया है कि उन्हें अल्लाह ने अपने हाथों से बनाया, जो उनके सम्मान और गरिमा की सबसे बड़ी दलील है। यह भी साबित करता है कि अल्लाह तआला के लिए "हाथ" की सिफ़त है, लेकिन वह उसकी शान के लायक़ है, जैसा कि अहले सुन्नत वल जमात का अक़ीदा है — बिना कैफ़ियत के, बिना किसी मख़लूक़ से मिलती-जुलती होने के।
इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि घमंड और अहंकार इंसान को अल्लाह की आज्ञा से भटका देता है। इब्लीस ने अपने ज्ञान और अपनी उत्पत्ति पर घमंड किया और कहा कि "मैं आग से बना हूँ और वह मिट्टी से" — यही घमंड उसे हमेशा के लिए अल्लाह की रहमत से दूर कर दिया। हमें चाहिए कि हम अपने अंदर किसी भी तरह के घमंड को न पनपने दें, क्योंकि घमंड इंसान को जन्नत से निकाल सकता है, जैसा कि इब्लीस को निकाल दिया गया।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह तआला की बनाई हुई हर चीज़ में हिकमत है, और हमें उसके हर फ़ैसले के आगे सर झुकाना चाहिए। जब अल्लाह किसी को इज़्ज़त देना चाहता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता, और जो उसकी इज़्ज़त पर रश्क करता है, वह खुद रुसवा होता है।
📜 आयत 73-77 — सूरा साद
अनुवाद — साद 75
सूरा साद आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा ने (इबलीस से) फरमाया कि ऐ इबलीस जिस चीज़…सूरा आयत 75/88 — सूरा साद ص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा साद सुनें, सूरा साद अनुवाद, सूरा साद mp3, सूरा साद pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा साद
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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