अज़-ज़ुमर · 20/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌ مِّن فَوْقِهَا غُرَفٌ مَّبْنِيَّةٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ الْمِيعَادَ ۝٢٠
Laakinil lazeenat taqaw Rabbahum lahum ghurafum min fawqihaa ghurafum mabniyyatun tajree min tahtihal anhaar; wa`dal laah; laa yukhliful laahul mee`aad
📖 हिंदी अर्थ
जो आग में (पड़ा) हो मगर जो लोग अपने परवरदिगार से डरते रहे उनके ऊँचे-ऊँचे महल हैं (और) बाला ख़ानों पर बालाख़ाने बने हुए हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं ये खुदा का वायदा है (और) वायदा ख़िलाफी नहीं किया करता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ग़ुरफ़ (غُرَف): ऊँचे महल, ऊपरी कक्ष और मंज़िलें।
  • मब्नियyah (مَّبْنِيَّة): बनाई हुई, जो एक के ऊपर एक बनाई गई हों।
  • मी'आद (مِيعَاد): वादा, नियत समय।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की स्थिति बयान कर रहे हैं जो उससे डरते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं। ये वे लोग हैं जो अपने रब के आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहते हैं। उनके लिए जन्नत में ऊँचे-ऊँचे महल हैं, जो एक के ऊपर एक बनाए गए हैं — जैसे दुनिया में मंज़िलें बनाई जाती हैं, लेकिन उनकी ख़ूबसूरती और शान का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। उन महलों के नीचे नहरें बहती हैं, जो हर तरफ़ फैली हुई हैं और उनके बाग़ों को सींचती हैं।

यह अल्लाह का वादा है — और अल्लाह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। यह वादा उसने अपने डरने वाले बंदों से किया है, और वह इसे पूरा करके रहेगा। अल्लाह की ज़ात ख़िलाफ़-वादी से पाक है, क्योंकि वादा ख़िलाफ़ करना कमज़ोरी और नुक़्सान की निशानी है, और अल्लाह हर कमज़ोरी और हर नुक़्स से मुक्त है।

दावती पहलू:

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने प्यारे बंदों को सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी दी है। जो लोग दुनिया में उससे डरते हैं और उसकी राह पर चलते हैं, उनके लिए ऐसी जगहें तैयार हैं जिनका कोई दिल में अंदाज़ा नहीं लगा सकता। यह अल्लाह की रहमत और करम का इनाम है — उनके अच्छे कामों के बदले में नहीं, बल्कि उसकी फ़ज़ल से। तो आइए, हम भी उन लोगों में शामिल हों जो अल्लाह से डरते हैं, उसकी इबादत को ख़ालिस करते हैं, और उसके वादे पर भरोसा रखते हैं। यही कामयाबी की राह है — दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत के ऊँचे महल। अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका इनाम बेहतरीन है।

🎧 सुनें

📜 आयत 18-22 — अज़-ज़ुमर

18الَّذِينَ يَسْتَمِعُونَ الْقَوْلَ فَيَتَّبِعُونَ أَحْسَنَهُ ۚ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ هَدَاهُمُ اللَّهُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمْ أُولُو الْأَلْبَابِ
तो (ऐ रसूल) तुम मेरे (ख़ास) बन्दों को खुशख़बरी दे दो जो बात को जी लगाकर सुनते हैं और फिर उसमें से अच्छी बात पर अमल करते हैं यही वह लोग हैं जिनकी खुदा ने हिदायत की और यही लोग अक्लमन्द हैं
19أَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ الْعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِي النَّارِ
तो (ऐ रसूल) भला जिस शख्स पर अज़ाब का वायदा पूरा हो चुका हो तो क्या तुम उस शख्स की ख़लासी दे सकते हो
20لَٰكِنِ الَّذِينَ اتَّقَوْا رَبَّهُمْ لَهُمْ غُرَفٌ مِّن فَوْقِهَا غُرَفٌ مَّبْنِيَّةٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۖ وَعْدَ اللَّهِ ۖ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ الْمِيعَادَ
जो आग में (पड़ा) हो मगर जो लोग अपने परवरदिगार से डरते रहे उनके ऊँचे-ऊँचे महल हैं (और) बाला ख़ानों पर बालाख़ाने बने हुए हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं ये खुदा का वायदा है (और) वायदा ख़िलाफी नहीं किया करता
21أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ أَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَسَلَكَهُ يَنَابِيعَ فِي الْأَرْضِ ثُمَّ يُخْرِجُ بِهِ زَرْعًا مُّخْتَلِفًا أَلْوَانُهُ ثُمَّ يَهِيجُ فَتَرَاهُ مُصْفَرًّا ثُمَّ يَجْعَلُهُ حُطَامًا ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِأُولِي الْأَلْبَابِ
क्या तुमने इस पर ग़ौर नहीं किया कि खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में चश्में बनाकर जारी किया फिर उसके ज़रिए से रंग बिरंग (के गल्ले) की खेती उगाता है फिर (पकने के बाद) सूख जाती है तो तुम को वह ज़र्द दिखायी देती है फिर खुदा उसे चूर-चूर भूसा कर देता है बेशक इसमें अक्लमन्दों के लिए (बड़ी) इबरत व नसीहत है
22أَفَمَن شَرَحَ اللَّهُ صَدْرَهُ لِلْإِسْلَامِ فَهُوَ عَلَىٰ نُورٍ مِّن رَّبِّهِ ۚ فَوَيْلٌ لِّلْقَاسِيَةِ قُلُوبُهُم مِّن ذِكْرِ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो क्या वह शख्स जिस के सीने को खुदा ने (क़ुबूल) इस्लाम के लिए कुशादा कर दिया है तो वह अपने परवरदिगार (की हिदायत) की रौशनी पर (चलता) है मगर गुमराहों के बराबर हो सकता है अफसोस तो उन लोगों पर है जिनके दिल खुदा की याद से (ग़ाफ़िल होकर) सख्त हो गए हैं
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
20आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 20

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो आग में (पड़ा) हो मगर जो लोग अपने परवरदिगार…

सूरा आयत 20/75 — अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुमर सुनें, अज़-ज़ुमर अनुवाद, अज़-ज़ुमर mp3, अज़-ज़ुमर pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए