Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तख़्तसिमून (تَخْتَصِمُونَ): एक-दूसरे से झगड़ना, विवाद करना, और अपना-अपना दावा पेश करना। यानी हर इंसान अपने हक़ के लिए दलीलें देगा और दूसरे पर आरोप लगाएगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
फिर क़यामत के दिन तुम सब अपने रब के सामने हाज़िर होकर आपस में झगड़ोगे और विवाद करोगे। यानी जो लोग दुनिया में एक-दूसरे पर ज़ुल्म करते थे, हक़ मारते थे, झूठे आरोप लगाते थे, या किसी का हक़ दबाते थे — वे सब उस दिन अपने रब के सामने खड़े होकर एक-दूसरे से झगड़ेंगे। हर ज़ालिम से उसका मज़लूम बदला लेगा, हर झूठे से सच्चा अपना हक़ माँगेगा, और हर मुक़द्दमा अल्लाह के सामने पेश होगा। उस दिन कोई रिश्ता, कोई सिफ़ारिश, कोई दौलत या कोई ताक़त किसी के काम नहीं आएगी। अल्लाह तआला अपने न्याय और इंसाफ़ के साथ हर फ़ैसला करेगा — हक़ वाले को उसका हक़ दिलाएगा और बातिल को रुसवा करेगा। यह वह दिन होगा जब हर इंसान अपने अमल का नतीजा देखेगा, और जो कोई दुनिया में किसी पर ज़ुल्म करके गया होगा, उसे उस दिन पूरा-पूरा बदला चुकाना होगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें बड़ी सीख देती है कि इस दुनिया में अगर कोई ज़ालिम अपने ज़ुल्म से बच निकलता है, और कोई हक़ मारने वाला बेपरवाह घूमता है, तो वह समझे कि अल्लाह की पकड़ से कोई नहीं बच सकता। क़यामत का दिन ज़रूर आने वाला है, और उस दिन हर ज़ुल्म, हर नाइंसाफ़ी, हर दबाया गया हक़ सामने आएगा। यह हमारे लिए इंसाफ़ पर चलने की तरग़ीब है — कि हम किसी का हक़ न मारें, किसी पर ज़ुल्म न करें, और अगर हमसे कोई ग़लती हुई है तो दुनिया में ही माफ़ी माँग लें और हक़ वापस कर दें। क्योंकि उस दिन का हिसाब बहुत सख़्त होगा, और वहाँ सिर्फ़ अल्लाह का फ़ैसला होगा — जो सबसे बड़ा न्यायी और रहम करने वाला है। यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का इंसाफ़ कभी ज़ाइए नहीं होता, और यही हमारे दिलों को सुकून देता है कि अगर दुनिया में इंसाफ़ न मिले, तो आख़िरत में ज़रूर मिलेगा।
📜 आयत 29-33 — सूरा अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 31
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग भी यक़ीनन मरने वाले हैं फिर तुम…सूरा आयत 31/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुमर
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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