अज़-ज़ुमर · 4/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
لَّوْ أَرَادَ اللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا لَّاصْطَفَىٰ مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ سُبْحَانَهُ ۖ هُوَ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ ۝٤
Law araadal laahu aiyattakhiza waladal lastafaa mimmaa yakhluqu maa yashaaa`; Subhaanahoo Huwal laahul Waahidul Qahhaar
📖 हिंदी अर्थ
अगर खुदा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَّوْ أَرَادَ: अगर चाहता
  • لَاصْطَفَىٰ: तो चुन लेता
  • سُبْحَانَهُ: वह पाक-पवित्र है
  • الْقَهَّارُ: सब पर ग़ालिब, सबको अपने वश में रखने वाला

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की बातों का खंडन कर रहा है जो उसके लिए औलाद (संतान) होने का दावा करते हैं। अल्लाह फ़रमाता है कि अगर वह कभी कोई बेटा बनाना चाहता, तो वह अपनी मख़लूक़ात (सृष्टि) में से जो चाहता, चुन लेता — किसी इंसान या फ़रिश्ते को नहीं, बल्कि अपनी कुदरत से कोई ऐसी मख़लूक़ पैदा कर लेता जो उसके शान के लायक़ होती। लेकिन अल्लाह ने ऐसा कभी नहीं किया और न ही कर सकता है, क्योंकि वह हर ऐब और कमी से पाक है।

अल्लाह तआला अपनी ज़ात को "सुब्हानहु" कहकर पाक बताता है — यानी वह हर उस चीज़ से मुक़द्दस है जो उसके बारे में ग़लत ख़यालात किए जाते हैं। वह "वाहिद" है — एक है, जिसका कोई जोड़ा नहीं, कोई हमसर नहीं, कोई औलाद नहीं। और वह "क़ह्हार" है — सब पर ग़ालिब है, उसकी कुदरत के आगे हर चीज़ झुकी हुई है, हर मख़लूक़ उसके इख़्तियार में है।

याद रखिए, जब कोई इंसान बेटा चाहता है, तो इसलिए कि उसे अपनी ज़ात की तकमील, अपने नाम की बक़ा, या अपने बुढ़ापे का सहारा चाहिए होता है। लेकिन अल्लाह तआला इन सब चीज़ों से बेनियाज़ है। वह न किसी का मोहताज है, न उसे किसी सहारे की ज़रूरत है। वह हमेशा से था और हमेशा रहेगा, उसकी ज़ात को किसी औलाद की ज़रूरत नहीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात के बारे में सिर्फ़ वही अक़ीदा रखें जो उसने ख़ुद बयान किया है। वह एक है, बेमिसाल है, बेहमता है। उसकी कुदरत का अंदाज़ा हम उसकी मख़लूक़ात से लगा सकते हैं — ज़मीन, आसमान, पहाड़, समुंदर, सितारे, और हर साँस लेने वाला जानदार — सब उसी की पैदा की हुई चीज़ें हैं। फिर भला वह जो चाहता, क्यों नहीं पैदा कर सकता? लेकिन उसने औलाद नहीं बनाई, क्योंकि यह उसकी शान के ख़िलाफ़ है।

इस आयत पर ग़ौर करने वाले के दिल में अल्लाह की अज़मत और पाकीज़गी का एहसास पैदा होता है, और वह उसकी तौहीद (एकता) पर अपना ईमान मज़बूत करता है। हमें चाहिए कि हर वक़्त अल्लाह की ज़ात को हर ऐब से पाक जानें, उसकी बड़ाई बयान करें, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। वही हमारा ख़ालिक़ है, वही हमारा रिज़्क़ देने वाला है, और उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है।



📜 आयत 2-6 — सूरा अज़-ज़ुमर

2إِنَّا أَنزَلْنَا إِلَيْكَ الْكِتَابَ بِالْحَقِّ فَاعْبُدِ اللَّهَ مُخْلِصًا لَّهُ الدِّينَ
(ऐ रसूल) हमने किताब (कुरान) को बिल्कुल ठीक नाज़िल किया है तो तुम इबादत को उसी के लिए निरा खुरा करके खुदा की बन्दगी किया करो
3أَلَا لِلَّهِ الدِّينُ الْخَالِصُ ۚ وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ مَا نَعْبُدُهُمْ إِلَّا لِيُقَرِّبُونَا إِلَى اللَّهِ زُلْفَىٰ إِنَّ اللَّهَ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ فِي مَا هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَنْ هُوَ كَاذِبٌ كَفَّارٌ
आगाह रहो कि इबादत तो ख़ास खुदा ही के लिए है और जिन लोगों ने खुदा के सिवा (औरों को अपना) सरपरस्त बना रखा है और कहते हैं कि हम तो उनकी परसतिश सिर्फ़ इसलिए करते हैं कि ये लोग खुदा की बारगाह में हमारा तक़र्रब बढ़ा देगें इसमें शक नहीं कि जिस बात में ये लोग झगड़ते हैं (क़यामत के दिन) खुदा उनके दरमियान इसमें फैसला कर देगा बेशक खुदा झूठे नाशुक्रे को मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचाया करता
4لَّوْ أَرَادَ اللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا لَّاصْطَفَىٰ مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ ۚ سُبْحَانَهُ ۖ هُوَ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ
अगर खुदा किसी को (अपना) बेटा बनाना चाहता तो अपने मख़लूक़ात में से जिसे चाहता मुन्तखिब कर लेता (मगर) वह तो उससे पाक व पाकीज़ा है वह तो यकता बड़ा ज़बरदस्त अल्लाह है
5خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ يُكَوِّرُ اللَّيْلَ عَلَى النَّهَارِ وَيُكَوِّرُ النَّهَارَ عَلَى اللَّيْلِ ۖ وَسَخَّرَ الشَّمْسَ وَالْقَمَرَ ۖ كُلٌّ يَجْرِي لِأَجَلٍ مُّسَمًّى ۗ أَلَا هُوَ الْعَزِيزُ الْغَفَّارُ
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन को बजा (दुरूस्त) पैदा किया वही रात को दिन पर ऊपर तले लपेटता है और वही दिन को रात पर तह ब तह लपेटता है और उसी ने आफताब और महताब को अपने बस में कर लिया है कि ये सबके सब अपने (अपने) मुक़रर्र वक्त चलते रहेगें आगाह रहो कि वही ग़ालिब बड़ा बख्शने वाला है
6خَلَقَكُم مِّن نَّفْسٍ وَاحِدَةٍ ثُمَّ جَعَلَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ الْأَنْعَامِ ثَمَانِيَةَ أَزْوَاجٍ ۚ يَخْلُقُكُمْ فِي بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ خَلْقًا مِّن بَعْدِ خَلْقٍ فِي ظُلُمَاتٍ ثَلَاثٍ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لَهُ الْمُلْكُ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَأَنَّىٰ تُصْرَفُونَ
उसी ने तुम सबको एक ही शख्स से पैदा किया फिर उस (की बाक़ी मिट्टी) से उसकी बीबी (हौव्वा) को पैदा किया और उसी ने तुम्हारे लिए आठ क़िस्म के चारपाए पैदा किए वही तुमको तुम्हारी माँओं के पेट में एक क़िस्म की पैदाइश के बाद दूसरी क़िस्म (नुत्फे जमा हुआ खून लोथड़ा) की पैदाइश से तेहरे तेहरे अंधेरों (पेट) रहम और झिल्ली में पैदा करता है वही अल्लाह तुम्हारा परवरदिगार है उसी की बादशाही है उसके सिवा माबूद नहीं तो तुम लोग कहाँ फिरे जाते हो
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 4

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Tuesday, September 29, 2026

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