अज़-ज़ुमर · 68/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुमर
وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخْرَىٰ فَإِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنظُرُونَ ۝٦٨
Wa nufikha fis Soori fas`iqa man fis samaawaati wa man fil ardi illaa man shaa`al lahu summa nufikha feehi ukhraa fa izaa hum qiyaamuny yanzuroon
📖 हिंदी अर्थ
और जब (पहली बार) सूर फँका जाएगा तो जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं (मौत से) बेहोश होकर गिर पड़ेंगें) मगर (हाँ) जिस को ख़ुदा चाहे वह अलबत्ता बच जाएगा) फिर जब दोबारा सूर फूँका जाएगा तो फौरन सब के सब खड़े हो कर देखने लगेंगें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصُّور (अस-सूर): यह एक विशेष सींग (नरसिंगा) है, जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँक मारेंगे।
  • فَصَعِقَ (फ़स'अक़): बेहोश होकर गिर पड़ना, यहाँ अर्थ है मृत्यु।
  • قِيَامٌ (क़ियाम): खड़े होने वाले।
  • يَنظُرُونَ (यन्ज़ुरून): देख रहे होंगे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान दिन का वर्णन करती है जब अल्लाह तआला की इच्छा से यह दुनिया समाप्त होगी और एक नया युग शुरू होगा। पहली बार सूर (नरसिंगा) में फूँक मारी जाएगी, जिससे आसमानों और ज़मीन में जितने भी जीवित प्राणी हैं—फ़रिश्ते, इंसान, जिन्नात, सभी—बेहोश होकर मर जाएँगे। केवल वही लोग बचेंगे जिन्हें अल्लाह ने चाहा, जैसे कुछ विशेष फ़रिश्ते, हूरें और गिलमान (जन्नत के सेवक), क्योंकि अल्लाह की शक्ति और इच्छा के आगे सब कुछ है।

फिर दूसरी बार सूर में फूँक मारी जाएगी, और यह फूँक पुनरुत्थान (क़ियामत) की होगी। उसी क्षण सभी मृत लोग अपनी क़ब्रों से जीवित होकर उठ खड़े होंगे और अपनी आँखों से उस दिन के भयानक दृश्य देखेंगे—हर इंसान अपने अच्छे और बुरे कर्मों का सामना करने के लिए तैयार खड़ा होगा, और वे सब देखेंगे कि अल्लाह उनके साथ क्या करता है।

दावती पहलू (प्रेरक संदेश):

यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी। जिस तरह एक साधारण फूँक से सारी दुनिया समाप्त हो जाएगी, उसी तरह एक और फूँक से सब कुछ फिर से जीवित हो जाएगा। यह अल्लाह की असीम शक्ति का प्रमाण है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को इस तरह बनाएँ कि उस दिन हम शर्मिंदा न हों। जो लोग अल्लाह पर ईमान रखते हैं और अच्छे कर्म करते हैं, उनके लिए वह दिन राहत और खुशी का होगा, जबकि जो लोग दुनिया में ग़ाफ़िल रहे, वे पछताएँगे। आइए, हम इस आयत से सबक लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, ताकि उस महान दिन पर हमारा चेहरा खिला हुआ हो और हम जन्नत की ओर बढ़ते हुए देखे जाएँ। अल्लाह हम सबको सीधी राह दिखाए। आमीन।



📜 आयत 66-70 — सूरा अज़-ज़ुमर

66بَلِ اللَّهَ فَاعْبُدْ وَكُن مِّنَ الشَّاكِرِينَ
बल्कि तुम ख़ुदा ही कि इबादत करो और शुक्र गुज़ारों में हो
67وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالْأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَالسَّمَاوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَمِينِهِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और उन लोगों ने ख़ुदा की जैसी क़द्र दानी करनी चाहिए थी उसकी ( कुछ भी ) कद्र न की हालाँकि ( वह ऐसा क़ादिर है कि) क़यामत के दिन सारी ज़मीन (गोया) उसकी मुट्ठी में होगी और सारे आसमान (गोया) उसके दाहिने हाथ में लिपटे हुए हैं जिसे ये लोग उसका शरीक बनाते हैं वह उससे पाकीज़ा और बरतर है
68وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخْرَىٰ فَإِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنظُرُونَ
और जब (पहली बार) सूर फँका जाएगा तो जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं (मौत से) बेहोश होकर गिर पड़ेंगें) मगर (हाँ) जिस को ख़ुदा चाहे वह अलबत्ता बच जाएगा) फिर जब दोबारा सूर फूँका जाएगा तो फौरन सब के सब खड़े हो कर देखने लगेंगें
69وَأَشْرَقَتِ الْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَجِيءَ بِالنَّبِيِّينَ وَالشُّهَدَاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ज़मीन अपने परवरदिगार के नूर से जगमगा उठेगी और (आमाल की) किताब (लोगों के सामने) रख दी जाएगी और पैग़म्बर और गवाह ला हाज़िर किए जाएँगे और उनमें इन्साफ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ( ज़र्रा बराबर ) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
70وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ
और जिस शख्स ने जैसा किया हो उसे उसका पूरा पूरा बदला मिल जाएगा, और जो कुछ ये लोग करते हैं वह उससे ख़ूब वाक़िफ है
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 68

सूरा अज़-ज़ुमर आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब (पहली बार) सूर फँका जाएगा तो जो लोग…

सूरा आयत 68/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए