Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَشْرَقَتْ: चमक उठी, प्रकाशित हो गई
- بِنُورِ رَبِّهَا: अपने रब के प्रकाश से
- وُضِعَ الْكِتَابُ: (आमाल का) लेखा-जोखा रखा गया, किताब रखी गई
- الشُّهَدَاءِ: गवाह (जो लोगों के कर्मों पर गवाही देंगे)
- قُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ: उनके बीच सच्चाई और न्याय के साथ फैसला किया गया
तफ़सीर (व्याख्या):
क़यामत का दिन आएगा, और जब अल्लाह तआला अपने बंदों के बीच फ़ैसला करने के लिए अपनी महानता और जलाल के साथ प्रकट होंगे, तो उस दिन की ज़मीन अपने रब के नूर से रोशन हो जाएगी। यह नूर ऐसा होगा कि उस दिन की सारी अंधेरियाँ दूर हो जाएँगी, और हर चीज़ साफ़ और स्पष्ट हो जाएगी। यह अल्लाह की उस महान शक्ति का प्रदर्शन होगा जो उस दिन पूरी तरह से प्रकट होगी।
फिर हर इंसान का आमालनामा (कर्मों की किताब) सामने रखा जाएगा। हर छोटे-बड़े अमल को लिखा हुआ पाया जाएगा। कोई चीज़ छूटेगी नहीं, कोई बात छिपी नहीं रहेगी। यह वह किताब है जिसे अल्लाह के फ़रिश्तों ने लिखा था, और अब उसे इंसान के सामने पेश किया जाएगा।
उस दिन सभी नबियों को बुलाया जाएगा, ताकि वे अपनी-अपनी उम्मतों के बारे में गवाही दें कि उन्होंने अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया था या नहीं। साथ ही, गवाहों को भी लाया जाएगा—और इन गवाहों में हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ की उम्मत भी शामिल होगी, जिन्हें अल्लाह ने पिछले नबियों की उम्मतों पर गवाह बनाया है। जब कोई उम्मत यह इनकार करेगी कि उनके पास नबी नहीं आया, तो मुहम्मद ﷺ की उम्मत गवाही देगी कि नबियों ने पैग़ाम पहुँचाया था। इस तरह अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) सभी पर क़ायम हो जाएगी।
इसके बाद अल्लाह तआला सभी प्राणियों के बीच पूर्ण न्याय के साथ फ़ैसला करेगा। वहाँ कोई ज़ुल्म नहीं होगा, किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। न किसी की नेकियाँ कम की जाएँगी, न किसी की बुराइयाँ बढ़ाई जाएँगी। हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया का जीवन आख़िरी नहीं है। एक दिन ऐसा आएगा जब सब कुछ खुलकर सामने आ जाएगा। आज हम जो भी कर रहे हैं—अच्छा या बुरा—वह लिखा जा रहा है, और उस दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को संवारें, अपने आमाल को सुधारें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई माफ़ी नहीं माँगी जा सकेगी और कोई मौक़ा दोबारा नहीं मिलेगा।
अल्लाह का न्याय पूर्ण है, उसकी रहमत असीम है। जो लोग उस पर ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है। और जो लोग ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं होगा। आओ, हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत करें, और उस दिन की तैयारी करें जब ज़मीन अपने रब के नूर से रोशन होगी और हर इंसान अपने कर्मों का फल पाएगा।
📜 आयत 67-71 — सूरा अज़-ज़ुमर
अनुवाद — अज़-ज़ुमर 69
सूरा अज़-ज़ुमर आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ज़मीन अपने परवरदिगार के नूर से जगमगा उठेगी और…सूरा आयत 69/75 — सूरा अज़-ज़ुमर الزمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुमर सुनें, सूरा अज़-ज़ुमर अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुमर mp3, सूरा अज़-ज़ुमर pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुमर
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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