अज़-ज़ुमर · 69/75
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुमर
وَأَشْرَقَتِ الْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَجِيءَ بِالنَّبِيِّينَ وَالشُّهَدَاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ ۝٦٩
Wa ashraqatil ardu binoori Rabbihaa wa wudi`al Kitaabu wa jeee`a bin nabiyyeena wash shuhadaaa`i wa qudiya bainahum bilhaqqi wa hum laa yuzlamoon
📖 हिंदी अर्थ
और ज़मीन अपने परवरदिगार के नूर से जगमगा उठेगी और (आमाल की) किताब (लोगों के सामने) रख दी जाएगी और पैग़म्बर और गवाह ला हाज़िर किए जाएँगे और उनमें इन्साफ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ( ज़र्रा बराबर ) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَشْرَقَتْ: चमक उठी, प्रकाशित हो गई
  • بِنُورِ رَبِّهَا: अपने रब के प्रकाश से
  • وُضِعَ الْكِتَابُ: (आमाल का) लेखा-जोखा रखा गया, किताब रखी गई
  • الشُّهَدَاءِ: गवाह (जो लोगों के कर्मों पर गवाही देंगे)
  • قُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ: उनके बीच सच्चाई और न्याय के साथ फैसला किया गया

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत का दिन आएगा, और जब अल्लाह तआला अपने बंदों के बीच फ़ैसला करने के लिए अपनी महानता और जलाल के साथ प्रकट होंगे, तो उस दिन की ज़मीन अपने रब के नूर से रोशन हो जाएगी। यह नूर ऐसा होगा कि उस दिन की सारी अंधेरियाँ दूर हो जाएँगी, और हर चीज़ साफ़ और स्पष्ट हो जाएगी। यह अल्लाह की उस महान शक्ति का प्रदर्शन होगा जो उस दिन पूरी तरह से प्रकट होगी।

फिर हर इंसान का आमालनामा (कर्मों की किताब) सामने रखा जाएगा। हर छोटे-बड़े अमल को लिखा हुआ पाया जाएगा। कोई चीज़ छूटेगी नहीं, कोई बात छिपी नहीं रहेगी। यह वह किताब है जिसे अल्लाह के फ़रिश्तों ने लिखा था, और अब उसे इंसान के सामने पेश किया जाएगा।

उस दिन सभी नबियों को बुलाया जाएगा, ताकि वे अपनी-अपनी उम्मतों के बारे में गवाही दें कि उन्होंने अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाया था या नहीं। साथ ही, गवाहों को भी लाया जाएगा—और इन गवाहों में हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ की उम्मत भी शामिल होगी, जिन्हें अल्लाह ने पिछले नबियों की उम्मतों पर गवाह बनाया है। जब कोई उम्मत यह इनकार करेगी कि उनके पास नबी नहीं आया, तो मुहम्मद ﷺ की उम्मत गवाही देगी कि नबियों ने पैग़ाम पहुँचाया था। इस तरह अल्लाह की हुज्जत (प्रमाण) सभी पर क़ायम हो जाएगी।

इसके बाद अल्लाह तआला सभी प्राणियों के बीच पूर्ण न्याय के साथ फ़ैसला करेगा। वहाँ कोई ज़ुल्म नहीं होगा, किसी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। न किसी की नेकियाँ कम की जाएँगी, न किसी की बुराइयाँ बढ़ाई जाएँगी। हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।


दावत और नसीहत:

यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया का जीवन आख़िरी नहीं है। एक दिन ऐसा आएगा जब सब कुछ खुलकर सामने आ जाएगा। आज हम जो भी कर रहे हैं—अच्छा या बुरा—वह लिखा जा रहा है, और उस दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को संवारें, अपने आमाल को सुधारें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब कोई माफ़ी नहीं माँगी जा सकेगी और कोई मौक़ा दोबारा नहीं मिलेगा।

अल्लाह का न्याय पूर्ण है, उसकी रहमत असीम है। जो लोग उस पर ईमान लाए और नेक अमल करते रहे, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है। और जो लोग ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं होगा। आओ, हम सब अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत करें, और उस दिन की तैयारी करें जब ज़मीन अपने रब के नूर से रोशन होगी और हर इंसान अपने कर्मों का फल पाएगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 67-71 — अज़-ज़ुमर

67وَمَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ وَالْأَرْضُ جَمِيعًا قَبْضَتُهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَالسَّمَاوَاتُ مَطْوِيَّاتٌ بِيَمِينِهِ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
और उन लोगों ने ख़ुदा की जैसी क़द्र दानी करनी चाहिए थी उसकी ( कुछ भी ) कद्र न की हालाँकि ( वह ऐसा क़ादिर है कि) क़यामत के दिन सारी ज़मीन (गोया) उसकी मुट्ठी में होगी और सारे आसमान (गोया) उसके दाहिने हाथ में लिपटे हुए हैं जिसे ये लोग उसका शरीक बनाते हैं वह उससे पाकीज़ा और बरतर है
68وَنُفِخَ فِي الصُّورِ فَصَعِقَ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَمَن فِي الْأَرْضِ إِلَّا مَن شَاءَ اللَّهُ ۖ ثُمَّ نُفِخَ فِيهِ أُخْرَىٰ فَإِذَا هُمْ قِيَامٌ يَنظُرُونَ
और जब (पहली बार) सूर फँका जाएगा तो जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में हैं (मौत से) बेहोश होकर गिर पड़ेंगें) मगर (हाँ) जिस को ख़ुदा चाहे वह अलबत्ता बच जाएगा) फिर जब दोबारा सूर फूँका जाएगा तो फौरन सब के सब खड़े हो कर देखने लगेंगें
69وَأَشْرَقَتِ الْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ الْكِتَابُ وَجِيءَ بِالنَّبِيِّينَ وَالشُّهَدَاءِ وَقُضِيَ بَيْنَهُم بِالْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ
और ज़मीन अपने परवरदिगार के नूर से जगमगा उठेगी और (आमाल की) किताब (लोगों के सामने) रख दी जाएगी और पैग़म्बर और गवाह ला हाज़िर किए जाएँगे और उनमें इन्साफ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ( ज़र्रा बराबर ) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
70وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ
और जिस शख्स ने जैसा किया हो उसे उसका पूरा पूरा बदला मिल जाएगा, और जो कुछ ये लोग करते हैं वह उससे ख़ूब वाक़िफ है
71وَسِيقَ الَّذِينَ كَفَرُوا إِلَىٰ جَهَنَّمَ زُمَرًا ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءُوهَا فُتِحَتْ أَبْوَابُهَا وَقَالَ لَهُمْ خَزَنَتُهَا أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَتْلُونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِ رَبِّكُمْ وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا بَلَىٰ وَلَٰكِنْ حَقَّتْ كَلِمَةُ الْعَذَابِ عَلَى الْكَافِرِينَ
और जो लोग काफिर थे उनके ग़ोल के ग़ोल जहन्नुम की तरफ हॅकाए जाएँगे और यहाँ तक की जब जहन्नुम के पास पहुँचेगें तो उसके दरवाज़े खोल दिए जाएगें और उसके दरोग़ा उनसे पूछेंगे कि क्या तुम लोगों में के पैग़म्बर तुम्हारे पास नहीं आए थे जो तुमको तुम्हारे परवरदिगार की आयतें पढ़कर सुनाते और तुमको इस रोज़ (बद) के पेश आने से डराते वह लोग जवाब देगें कि हाँ (आए तो थे) मगर (हमने न माना) और अज़ाब का हुक्म काफिरों के बारे में पूरा हो कर रहेगा
अज़-ज़ुमरकुरान सूची
75आयत
मक्कीRevelation
69आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुमर 69

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Tuesday, August 18, 2026

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