Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَخْتَانُونَ: धोखा देना, ख़ियानत करना।
- أَنفُسَهُمْ: स्वयं अपनी आत्माओं को।
- خَوَّانًا: बहुत अधिक ख़ियानत करने वाला।
- أَثِيمًا: बहुत अधिक पाप करने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो ख़ुद को धोखा देते हैं—यानी जो गुनाह और ख़ियानत के रास्ते पर चलकर अपनी ही आत्माओं को नुक़सान पहुँचाते हैं। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को निर्देश दे रहा है कि ऐसे लोगों की ओर से झगड़ा न करें, उनके बचाव में दलीलें न दें, और न ही उनके लिए कोई वकालत करें। क्योंकि ये लोग जान-बूझकर ख़ियानत करते हैं और अपने कर्मों से अल्लाह की नाराज़गी मोल लेते हैं।
अल्लाह तआला स्पष्ट करता है कि वह उन लोगों से प्रेम नहीं करता जो ख़ियानत में डूबे हों और लगातार पापों में मशगूल रहते हों। यह एक गंभीर चेतावनी है कि ख़ियानत और पाप का रास्ता अल्लाह की मुहब्बत से दूर कर देता है। जो व्यक्ति इस हद तक गिर जाए कि उसकी पहचान ही ख़ियानत और गुनाह बन जाए, वह अल्लाह की रहमत से महरूम हो जाता है।
इस आयत में एक बड़ी शिक्षा है कि मुसलमान को चाहिए कि वह सच्चाई और इंसाफ़ पर क़ायम रहे। किसी की मदद करना अच्छा है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति ख़ुद गुनाहगार हो और अपनी ख़ियानत छिपाने की कोशिश कर रहा हो, तो उसके बचाव में झूठी वकालत करना अल्लाह की नज़र में बहुत बुरा काम है। यह सिर्फ़ उस व्यक्ति को और गुनाह में धकेलता है और उसे अल्लाह की पनाह से दूर करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमानदारी और सच्चाई ही वह रास्ता है जो अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत तक पहुँचाता है। जो लोग ख़ियानत और धोखे से बचते हैं, अल्लाह उन्हें इज़्ज़त देता है और उनके दिलों को सुकून से भर देता है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में सच्चाई को अपनाएँ, किसी की हक़ तलफ़ी न करें, और न ही किसी गुनाहगार की मदद उसके गुनाह में करें। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सच्चे, ईमानदार और नेक हों। याद रखें, अल्लाह की मुहब्बत सबसे बड़ी नेमत है, और वह उन्हीं को मिलती है जो पापों से बचते हैं और तौबा करके सीधे रास्ते पर चलते हैं।
📜 आयत 105-109 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 107
सूरा अन-निसा आयत 107 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम (उन बदमाशों) की तरफ़ होकर (लोगों…सूरा आयत 107/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 105–109. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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