Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاسْتَغْفِرِ اللهَ: अल्लाह से क्षमा माँगो।
- غَفُورًا: बहुत क्षमा करने वाला।
- رَّحِيمًا: अत्यंत दयालु।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को निर्देश दे रहे हैं कि वे हर हालत में अल्लाह से क्षमा माँगते रहें। यह आदेश उस घटना के संदर्भ में है जब नबी ﷺ ने एक यहूदी व्यक्ति के मामले में कुछ इरादा किया था, जिसके बाद अल्लाह ने आपको सच्चाई से अवगत कराया। अल्लाह आपको सिखा रहे हैं कि किसी भी मामले में जल्दबाज़ी न करें और अपने फ़ैसलों में अल्लाह से क्षमा और मार्गदर्शन माँगते रहें। यह आदेश नबी ﷺ के लिए है, और उनकी उम्मत के लिए भी एक शिक्षा है कि हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी कमियों और गलतियों पर अल्लाह से क्षमा माँगे। अल्लाह तआला अपने बंदों के लिए बहुत क्षमा करने वाला और अत्यंत दयालु है, वह उन लोगों की क्षमा की प्रार्थना स्वीकार करता है जो सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करते हैं और उससे माफ़ी माँगते हैं। यह आयत इस बात की तरफ़ इशारा करती है कि अल्लाह की रहमत और क्षमा असीम है, और वह अपने बंदों की भूलों को माफ़ करने के लिए हमेशा तैयार है।
फ़ायदे (लाभ):
- अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को भी क्षमा माँगने का निर्देश दे रहे हैं, ताकि उम्मत के लिए यह एक आदर्श हो कि इस्तिग़फ़ार (क्षमा माँगना) कितनी बड़ी नेमत है। यह हमें सिखाता है कि इंसान चाहे कितना भी अच्छा हो, उसे अल्लाह से क्षमा माँगते रहना चाहिए।
- यह आयत हमें यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह की क्षमा और दया असीम है। चाहे हमसे कितनी भी गलतियाँ हुई हों, अगर हम सच्चे दिल से तौबा करें और क्षमा माँगें, तो अल्लाह हमें माफ़ कर देगा।
- इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि किसी भी मामले में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, बल्कि अल्लाह से मार्गदर्शन और क्षमा माँगनी चाहिए, क्योंकि इंसान की समझ सीमित है और अल्लाह का ज्ञान असीम है।
- यह आयत मुसलमानों को यह प्रेरणा देती है कि वे अपने जीवन के हर पल में अल्लाह से जुड़े रहें और उसकी रहमत और क्षमा की उम्मीद रखें, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के साथ बहुत दयालु और क्षमाशील है।
📜 आयत 104-108 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 106
सूरा अन-निसा आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (अपनी उम्मत के लिये) ख़ुदा से मग़फ़िरत की दुआ…सूरा आयत 106/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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