अन-निसा · 108/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
يَسْتَخْفُونَ مِنَ النَّاسِ وَلَا يَسْتَخْفُونَ مِنَ اللَّهِ وَهُوَ مَعَهُمْ إِذْ يُبَيِّتُونَ مَا لَا يَرْضَىٰ مِنَ الْقَوْلِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطًا ۝١٠٨
Yastakhfoona minannaasi wa laa yastakh foona minal laahi wa huwa ma`ahum iz yubaiyitoona maa laa yardaa minal qawl; wa kaanal laahu bimaa ya`maloona muheetaa
📖 हिंदी अर्थ
लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और (ख़ुदा से नहीं छुपा सकते) हालॉकि वह तो उस वक्त भी उनके साथ साथ है जब वह लोग रातों को (बैठकर) उन बातों के मशवरे करते हैं जिनसे ख़ुदा राज़ी नहीं और ख़ुदा तो उनकी सब करतूतों को (इल्म के अहाते में) घेरे हुए है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَسْتَخْفُونَ – छिपते हैं, गुप्त रखते हैं
  • يُبَيِّتُونَ – रात में साजिश रचते हैं, रात में कोई बात तय करते हैं
  • مُحِيطًا – घेरने वाला, हर चीज़ को अपने ज्ञान से घेरे हुए

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयत उन लोगों के बारे में है जो बुरे काम करते हैं, लेकिन लोगों से शर्मिंदा होकर अपने काम छिपाते हैं। वे इस बात से डरते हैं कि कहीं लोगों को उनकी बुराई का पता न चल जाए, इसलिए वे चोरी-छिपे अपने गलत काम अंजाम देते हैं। मगर अफ़सोस! वे अल्लाह से नहीं छिपते, और न ही उससे शर्म खाते हैं। वे भूल जाते हैं कि अल्लाह उनके साथ है – उसका ज्ञान उन्हें घेरे हुए है। जब वे रात में आपस में मिलकर ऐसी बातें तय करते हैं जो अल्लाह को पसंद नहीं हैं – जैसे किसी निर्दोष पर इल्ज़ाम लगाना या किसी गुनाहगार को बचाने की साज़िश रचना – तो अल्लाह उस वक़्त भी उनके पास होता है और उनकी हर बात को देख और सुन रहा होता है। अल्लाह तआला उनके सारे कामों को, चाहे वे खुले हों या छिपे, पूरी तरह से अपने इल्म में घेरे हुए है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का ज्ञान हर जगह और हर वक़्त मौजूद है – चाहे हम रात के अंधेरे में हों या एकांत में, अल्लाह हमें देख रहा है। ये एहसास इंसान को गुनाह से रोकता है।
  2. जिस तरह हम लोगों के सामने अपनी बुराइयाँ छिपाते हैं, क्या हमें अल्लाह से ज़्यादा शर्म नहीं करनी चाहिए जो हमारा मालिक है और हमें हर वक़्त देख रहा है?
  3. रात में की जाने वाली साज़िशें और बुरी योजनाएँ अल्लाह से छिपी नहीं हैं – इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी नीयत और अपने कामों को साफ़ रखे।
  4. ये आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने अंदर अल्लाह का खौफ़ और शर्म पैदा करनी चाहिए, क्योंकि यही वो चीज़ है जो उसे बुराई से बचाती है और उसे अच्छे इंसान बनाती है।
  5. अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है – ये बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि उसका रब उसकी हर अच्छाई और हर कुर्बानी को देख रहा है, और उसका अज्र (इनाम) कभी ज़ाइया नहीं होगा।


📜 आयत 106-110 — अन-निसा

106وَاسْتَغْفِرِ اللَّهَ ۖ إِنَّ اللَّهَ كَانَ غَفُورًا رَّحِيمًا
और (अपनी उम्मत के लिये) ख़ुदा से मग़फ़िरत की दुआ मॉगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
107وَلَا تُجَادِلْ عَنِ الَّذِينَ يَخْتَانُونَ أَنفُسَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ مَن كَانَ خَوَّانًا أَثِيمًا
और (ऐ रसूल) तुम (उन बदमाशों) की तरफ़ होकर (लोगों से) न लड़ो जो अपने ही (लोगों) से दग़ाबाज़ी करते हैं बेशक ख़ुदा ऐसे शख्स को दोस्त नहीं रखता जो दग़ाबाज़ गुनाहगार हो
108يَسْتَخْفُونَ مِنَ النَّاسِ وَلَا يَسْتَخْفُونَ مِنَ اللَّهِ وَهُوَ مَعَهُمْ إِذْ يُبَيِّتُونَ مَا لَا يَرْضَىٰ مِنَ الْقَوْلِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطًا
लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और (ख़ुदा से नहीं छुपा सकते) हालॉकि वह तो उस वक्त भी उनके साथ साथ है जब वह लोग रातों को (बैठकर) उन बातों के मशवरे करते हैं जिनसे ख़ुदा राज़ी नहीं और ख़ुदा तो उनकी सब करतूतों को (इल्म के अहाते में) घेरे हुए है
109هَا أَنتُمْ هَٰؤُلَاءِ جَادَلْتُمْ عَنْهُمْ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا فَمَن يُجَادِلُ اللَّهَ عَنْهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ أَم مَّن يَكُونُ عَلَيْهِمْ وَكِيلًا
(मुसलमानों) ख़बरदार हो जाओ भला दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी में तो तुम उनकी तरफ़ होकर लड़ने खडे हो गए (मगर ये तो बताओ) फिर क़यामत के दिन उनका तरफ़दार बनकर ख़ुदा से कौन लड़ेगा या कौन उनका वकील होगा
110وَمَن يَعْمَلْ سُوءًا أَوْ يَظْلِمْ نَفْسَهُ ثُمَّ يَسْتَغْفِرِ اللَّهَ يَجِدِ اللَّهَ غَفُورًا رَّحِيمًا
और जो शख्स कोई बुरा काम करे या (किसी तरह) अपने नफ्स पर ज़ुल्म करे उसके बाद ख़ुदा से अपनी मग़फ़िरत की दुआ मॉगे तो ख़ुदा को बड़ा बख्शने वाला मेहरबान पाएगा
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अनुवाद — अन-निसा 108

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Tuesday, August 18, 2026

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