Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَسْتَخْفُونَ – छिपते हैं, गुप्त रखते हैं
- يُبَيِّتُونَ – रात में साजिश रचते हैं, रात में कोई बात तय करते हैं
- مُحِيطًا – घेरने वाला, हर चीज़ को अपने ज्ञान से घेरे हुए
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन लोगों के बारे में है जो बुरे काम करते हैं, लेकिन लोगों से शर्मिंदा होकर अपने काम छिपाते हैं। वे इस बात से डरते हैं कि कहीं लोगों को उनकी बुराई का पता न चल जाए, इसलिए वे चोरी-छिपे अपने गलत काम अंजाम देते हैं। मगर अफ़सोस! वे अल्लाह से नहीं छिपते, और न ही उससे शर्म खाते हैं। वे भूल जाते हैं कि अल्लाह उनके साथ है – उसका ज्ञान उन्हें घेरे हुए है। जब वे रात में आपस में मिलकर ऐसी बातें तय करते हैं जो अल्लाह को पसंद नहीं हैं – जैसे किसी निर्दोष पर इल्ज़ाम लगाना या किसी गुनाहगार को बचाने की साज़िश रचना – तो अल्लाह उस वक़्त भी उनके पास होता है और उनकी हर बात को देख और सुन रहा होता है। अल्लाह तआला उनके सारे कामों को, चाहे वे खुले हों या छिपे, पूरी तरह से अपने इल्म में घेरे हुए है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, और वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह का ज्ञान हर जगह और हर वक़्त मौजूद है – चाहे हम रात के अंधेरे में हों या एकांत में, अल्लाह हमें देख रहा है। ये एहसास इंसान को गुनाह से रोकता है।
- जिस तरह हम लोगों के सामने अपनी बुराइयाँ छिपाते हैं, क्या हमें अल्लाह से ज़्यादा शर्म नहीं करनी चाहिए जो हमारा मालिक है और हमें हर वक़्त देख रहा है?
- रात में की जाने वाली साज़िशें और बुरी योजनाएँ अल्लाह से छिपी नहीं हैं – इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी नीयत और अपने कामों को साफ़ रखे।
- ये आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपने अंदर अल्लाह का खौफ़ और शर्म पैदा करनी चाहिए, क्योंकि यही वो चीज़ है जो उसे बुराई से बचाती है और उसे अच्छे इंसान बनाती है।
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है – ये बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि उसका रब उसकी हर अच्छाई और हर कुर्बानी को देख रहा है, और उसका अज्र (इनाम) कभी ज़ाइया नहीं होगा।
📜 आयत 106-110 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 108
सूरा अन-निसा आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लोगों से तो अपनी शरारत छुपाते हैं और (ख़ुदा से…सूरा आयत 108/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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