अन-निसा · 124/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ مِن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ نَقِيرًا ۝١٢٤
Wa mai ya`mal minas saalihaati min zakarin aw unsaa wa huwa mu`minun fa ulaaa`ika yadkhuloonal Jannata wa laa yuzlamoona naqeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • नक़ीर (نَقِيرًا): खजूर की गुठली के पिछले हिस्से पर बनी हुई छोटी सी खोह या नुकीला गड्ढा, जो अत्यंत तुच्छ और बहुत ही कम मात्रा को दर्शाता है।
  • सालिहात (الصَّالِحَات): वे सभी अच्छे कर्म जो अल्लाह की रज़ा के लिए किए जाएँ और शरीयत के अनुसार हों।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने रहमत भरे दरवाज़े को सबके लिए खोलते हुए फ़रमा रहे हैं कि जो कोई भी नेक काम करे — चाहे वह पुरुष हो या स्त्री — बशर्ते कि वह अल्लाह पर सच्चा ईमान रखता हो, तो ऐसे लोगों को अल्लाह अपनी जन्नत में दाखिल करेगा। यहाँ अल्लाह ने "मिन अस-सालिहात" (कुछ नेक काम) कहकर यह स्पष्ट कर दिया कि किसी इंसान पर सारे नेक काम करना लाज़िमी नहीं है, बल्कि जितना भी अच्छा काम वह कर सकता है, उसे करे। अल्लाह ने किसी को भी सब कुछ करने का बोझ नहीं दिया।

इस आयत में अल्लाह ने "ज़कर या उन्सा" (पुरुष या स्त्री) कहकर इस्लाम की वह खूबसूरत तस्वीर पेश की है कि अल्लाह के यहाँ किसी भी इंसान की अहमियत उसके जिस्म या जिंस से नहीं, बल्कि उसके ईमान और अमल से है। औरत हो या मर्द, दोनों को अल्लाह की रहमत से एक जैसा हक़ दिया गया है। यह उस दौर की बड़ी इंक़िलाबी तालीम थी जब दुनिया में औरतों को इंसान ही नहीं समझा जाता था।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोग जन्नत में दाखिल होंगे और उनके अमल का सवाब कम नहीं किया जाएगा — यहाँ तक कि खजूर की गुठली के पीछे वाले छोटे से गड्ढे के बराबर भी नहीं। यानी अल्लाह की इंसाफ़ वाली रहमत यह है कि वह छोटे से छोटे नेक काम का भी पूरा-पूरा बदला देगा, और उसमें कोई कमी नहीं करेगा। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा कभी टूटता नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए खुशखबरी है जो यह सोचता है कि उसके गुनाह बहुत ज़्यादा हैं या उसकी नेकियाँ बहुत कम हैं। अल्लाह यहाँ फ़रमा रहा है कि ज़रा सी भी नेकी, जो ईमान के साथ हो, वह जन्नत का रास्ता बना सकती है। अल्लाह ने किसी को निराश नहीं किया। चाहे आपकी उम्र कितनी भी हो, चाहे आपके अंदर कितनी भी कमज़ोरियाँ हों, बस आप अल्लाह पर ईमान रखें और जितना हो सके नेक काम करते रहें। अल्लाह की रहमत इतनी वसीअ है कि वह आपके छोटे से छोटे अच्छे काम को भी कभी बेकार नहीं जाने देगा। यही इस्लाम की रूह है — उम्मीद और रहमत का पैग़ाम।

🎧 सुनें

📜 आयत 122-126 — अन-निसा

122وَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا ۚ وَمَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उन्हें हम अनक़रीब ही (बेहिश्त के) उन (हरे भरे) बाग़ों में जा पहुंचाएगें जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरें जारी होंगी और ये लोग उसमें हमेशा आबादुल आबाद तक रहेंगे (ये उनसे) ख़ुदा का पक्का वायदा है और ख़ुदा से ज्यादा (अपनी) बात में सच्चा कौन होगा
123لَّيْسَ بِأَمَانِيِّكُمْ وَلَا أَمَانِيِّ أَهْلِ الْكِتَابِ ۗ مَن يَعْمَلْ سُوءًا يُجْزَ بِهِ وَلَا يَجِدْ لَهُ مِن دُونِ اللَّهِ وَلِيًّا وَلَا نَصِيرًا
न तुम लोगों की आरज़ू से (कुछ काम चल सकता है) न अहले किताब की तमन्ना से कुछ हासिल हो सकता है बल्कि (जैसा काम वैसा दाम) जो बुरा काम करेगा उसे उसका बदला दिया जाएगा और फिर ख़ुदा के सिवा किसी को न तो अपना सरपरस्त पाएगा और न मददगार
124وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ مِن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ نَقِيرًا
और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा
125وَمَنْ أَحْسَنُ دِينًا مِّمَّنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۗ وَاتَّخَذَ اللَّهُ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا
और उस शख्स से दीन में बेहतर कौन होगा जिसने ख़ुदा के सामने अपना सरे तसलीम झुका दिया और नेको कार भी है और इबराहीम के तरीके पर चलता है जो बातिल से कतरा कर चलते थे और ख़ुदा ने इब्राहिम को तो अपना ख़लिस दोस्त बना लिया
126وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطًا
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है और ख़ुदा ही सब चीज़ को (अपनी) कुदरत से घेरे हुए है
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अनुवाद — अन-निसा 124

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Tuesday, August 18, 2026

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