अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ضَلَالًا بَعِيدًا: सत्य से अत्यधिक दूर हो जाना, सीधे मार्ग से बिल्कुल भटक जाना।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमान लाने वालों! तुम जो अल्लाह और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान ला चुके हो, उसी ईमान पर स्थिर रहो और उसे बनाए रखो। अल्लाह पर ईमान रखो, उसके रसूल पर ईमान रखो, उस किताब (क़ुरआन) पर ईमान रखो जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारी है, और उन सभी किताबों पर ईमान रखो जो अल्लाह ने पहले के रसूलों पर उतारी थीं (जैसे तौरात, इंजील, ज़बूर आदि)। यह ईमान का सम्पूर्ण रूप है।
जो व्यक्ति अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर और आख़िरत के दिन (क़ियामत) पर ईमान नहीं रखता या इनमें से किसी एक का भी इनकार करता है, तो वह सीधे मार्ग से इतना दूर भटक गया कि उसका भटकाव अत्यंत गहरा और दूर तक फैला हुआ है। उसने हिदायत का रास्ता पूरी तरह खो दिया है और वह धर्म (इस्लाम) के दायरे से बाहर निकल गया है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- ईमान एक स्थिर चीज़ है, इसे हमेशा मज़बूत करते रहना चाहिए। सिर्फ़ एक बार ईमान लाना काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर स्थिर रहना और उसे बढ़ाते रहना ज़रूरी है।
- पूर्ण ईमान वही है जो अल्लाह, उसके रसूल, उसकी किताबों, फ़रिश्तों और आख़िरत के दिन — इन सब पर एक साथ हो। इनमें से किसी एक का इनकार करना भी ईमान के लिए घातक है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सभी रसूलों और उन पर उतारी गई किताबों पर ईमान लाना अनिवार्य है। किसी एक रसूल या किताब को मानना और दूसरे को नकारना सही ईमान नहीं है।
- कुफ़्र (इनकार) का अंजाम बहुत भयानक है — यह इंसान को हिदायत से इतना दूर कर देता है कि वह सत्य को देखते हुए भी उसे पहचान नहीं पाता। इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त के लिए दुआ करते रहना चाहिए और बुरे विचारों व संदेहों से बचना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं के लिए है जो पूर्ण ईमान रखते हैं, और यही ईमान इंसान को सच्ची सफलता और शांति तक पहुँचाता है।
📜 आयत 134-138 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 136
सूरा अन-निसा आयत 136 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी…सूरा आयत 136/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 134–138. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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