अन-निसा · 136/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا آمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَالْكِتَابِ الَّذِي نَزَّلَ عَلَىٰ رَسُولِهِ وَالْكِتَابِ الَّذِي أَنزَلَ مِن قَبْلُ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَعِيدًا ۝١٣٦
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo aaminoo billaahi wa Rasoolihee wal Kitaabil lazee nazzala `alaa Rasoolihee wal Kitaabil lazeee anzala min qabl; wa mai yakfur billaahi wa Malaaa`ikatihee wa Kutubihee wa Rusulihee wal Yawmil Aakhiri faqad dalla dalaalam ba`eedaa
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी किताब पर जो उसने अपने रसूल (मोहम्मद) पर नाज़िल की है और उस किताब पर जो उसने पहले नाज़िल की ईमान लाओ और (ये भी याद रहे कि) जो शख्स ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों और रोज़े आख़िरत का मुन्किर हुआ तो वह राहे रास्त से भटक के जूर जा पड़ा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضَلَالًا بَعِيدًا: सत्य से अत्यधिक दूर हो जाना, सीधे मार्ग से बिल्कुल भटक जाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे ईमान लाने वालों! तुम जो अल्लाह और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान ला चुके हो, उसी ईमान पर स्थिर रहो और उसे बनाए रखो। अल्लाह पर ईमान रखो, उसके रसूल पर ईमान रखो, उस किताब (क़ुरआन) पर ईमान रखो जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारी है, और उन सभी किताबों पर ईमान रखो जो अल्लाह ने पहले के रसूलों पर उतारी थीं (जैसे तौरात, इंजील, ज़बूर आदि)। यह ईमान का सम्पूर्ण रूप है।

जो व्यक्ति अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर और आख़िरत के दिन (क़ियामत) पर ईमान नहीं रखता या इनमें से किसी एक का भी इनकार करता है, तो वह सीधे मार्ग से इतना दूर भटक गया कि उसका भटकाव अत्यंत गहरा और दूर तक फैला हुआ है। उसने हिदायत का रास्ता पूरी तरह खो दिया है और वह धर्म (इस्लाम) के दायरे से बाहर निकल गया है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. ईमान एक स्थिर चीज़ है, इसे हमेशा मज़बूत करते रहना चाहिए। सिर्फ़ एक बार ईमान लाना काफ़ी नहीं, बल्कि उस पर स्थिर रहना और उसे बढ़ाते रहना ज़रूरी है।
  2. पूर्ण ईमान वही है जो अल्लाह, उसके रसूल, उसकी किताबों, फ़रिश्तों और आख़िरत के दिन — इन सब पर एक साथ हो। इनमें से किसी एक का इनकार करना भी ईमान के लिए घातक है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि सभी रसूलों और उन पर उतारी गई किताबों पर ईमान लाना अनिवार्य है। किसी एक रसूल या किताब को मानना और दूसरे को नकारना सही ईमान नहीं है।
  4. कुफ़्र (इनकार) का अंजाम बहुत भयानक है — यह इंसान को हिदायत से इतना दूर कर देता है कि वह सत्य को देखते हुए भी उसे पहचान नहीं पाता। इसलिए हमें अपने ईमान की हिफ़ाज़त के लिए दुआ करते रहना चाहिए और बुरे विचारों व संदेहों से बचना चाहिए।
  5. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं के लिए है जो पूर्ण ईमान रखते हैं, और यही ईमान इंसान को सच्ची सफलता और शांति तक पहुँचाता है।


📜 आयत 134-138 — सूरा अन-निसा

134مَّن كَانَ يُرِيدُ ثَوَابَ الدُّنْيَا فَعِندَ اللَّهِ ثَوَابُ الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ سَمِيعًا بَصِيرًا
और जो शख्स (अपने आमाल का) बदला दुनिया ही में चाहता है तो ख़ुदा के पास दुनिया व आख़िरत दोनों का अज्र मौजूद है और ख़ुदा तो हर शख्स की सुनता और सबको देखता है
135۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُونُوا قَوَّامِينَ بِالْقِسْطِ شُهَدَاءَ لِلَّهِ وَلَوْ عَلَىٰ أَنفُسِكُمْ أَوِ الْوَالِدَيْنِ وَالْأَقْرَبِينَ ۚ إِن يَكُنْ غَنِيًّا أَوْ فَقِيرًا فَاللَّهُ أَوْلَىٰ بِهِمَا ۖ فَلَا تَتَّبِعُوا الْهَوَىٰ أَن تَعْدِلُوا ۚ وَإِن تَلْوُوا أَوْ تُعْرِضُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और ख़ुदा के लये गवाही दो अगरचे (ये गवाही) ख़ुद तुम्हारे या तुम्हारे मॉ बाप या क़राबतदारों के लिए खिलाफ़ (ही क्यो) न हो ख्वाह मालदार हो या मोहताज (क्योंकि) ख़ुदा तो (तुम्हारी बनिस्बत) उनपर ज्यादा मेहरबान है तो तुम (हक़ से) कतराने में ख्वाहिशे नफ़सियानी की पैरवी न करो और अगर घुमा फिरा के गवाही दोगे या बिल्कुल इन्कार करोगे तो (याद रहे जैसी करनी वैसी भरनी क्योंकि) जो कुछ तुम करते हो ख़ुद उससे ख़ूब वाक़िफ़ है
136يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا آمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ وَالْكِتَابِ الَّذِي نَزَّلَ عَلَىٰ رَسُولِهِ وَالْكِتَابِ الَّذِي أَنزَلَ مِن قَبْلُ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ فَقَدْ ضَلَّ ضَلَالًا بَعِيدًا
ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी किताब पर जो उसने अपने रसूल (मोहम्मद) पर नाज़िल की है और उस किताब पर जो उसने पहले नाज़िल की ईमान लाओ और (ये भी याद रहे कि) जो शख्स ख़ुदा और उसके फ़रिश्तों और उसकी किताबों और उसके रसूलों और रोज़े आख़िरत का मुन्किर हुआ तो वह राहे रास्त से भटक के जूर जा पड़ा
137إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ آمَنُوا ثُمَّ كَفَرُوا ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا لَّمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلًا
बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फ़िर काफ़िर हो गए फिर ईमान लाए और फिर उसके बाद काफ़िर हो गये और कुफ़्र में बढ़ते चले गए तो ख़ुदा उनकी मग़फ़िरत करेगा और न उन्हें राहे रास्त की हिदायत ही करेगा
138بَشِّرِ الْمُنَافِقِينَ بِأَنَّ لَهُمْ عَذَابًا أَلِيمًا
(ऐ रसूल) मुनाफ़िक़ों को ख़ुशख़बरी दे दो कि उनके लिए ज़रूर दर्दनाक अज़ाब है
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
136आयत

अनुवाद — अन-निसा 136

सूरा अन-निसा आयत 136 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानवालों ख़ुदा और उसके रसूल (मोहम्मद) पर और उसकी…

सूरा आयत 136/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 134–138. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए