अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ثُمَّ ازْدَادُوا كُفْرًا: फिर वे कुफ्र में बढ़ते गए, यानी कुफ्र पर अड़े रहे और उसी हाल में मर गए।
- لَمْ يَكُنِ اللَّهُ لِيَغْفِرَ لَهُمْ: अल्लाह उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा।
- وَلَا لِيَهْدِيَهُمْ سَبِيلًا: और न ही उन्हें किसी सीधे रास्ते (हिदायत) की तरफ ले जाएगा।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जिन्होंने ईमान लाने के बाद कुफ्र किया, फिर दोबारा ईमान लाए, फिर दोबारा कुफ्र किया, और आखिरकार कुफ्र ही पर जमे रहे और उसी हालत में दुनिया से चले गए। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐसे लोगों के लिए माफी का कोई रास्ता नहीं, और न ही अल्लाह उन्हें हिदायत की तरफ ले जाएगा, क्योंकि उन्होंने खुद अपनी आँखों से सच्चाई देखने के बाद उसे ठुकराया और जानबूझकर गुमराही को अपना लिया।
यह आयत उन लोगों के बारे में है जो ईमान और कुफ्र के बीच झूलते रहे, जैसे मुनाफिक़ीन (दिखावटी मुसलमान) या वे लोग जिन्होंने इस्लाम कबूल किया, फिर उसे छोड़ दिया, फिर लौटे, फिर छोड़ दिया—और आखिरकार कुफ्र ही पर मर गए। ऐसे लोगों के लिए तौबा (पश्चाताप) का दरवाजा उनकी मौत के बाद बंद हो जाता है, और अल्लाह की माफी उनके हिस्से में नहीं आती।
इस आयत से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है: ईमान की राह पर साबित क़दम रहना चाहिए। जो लोग बार-बार ईमान और कुफ्र के बीच झूलते हैं, वे अपने दिल को सच्चाई से दूर कर लेते हैं, यहाँ तक कि उनका दिल सच्चाई को कबूल करने की काबिलियत ही खो देता है। अल्लाह तआला हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफीक दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो सच्चाई को जानकर भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि ईमान की नेअमत (अल्लाह का तोहफा) को हल्का न समझें, और जब सच्चाई सामने आ जाए तो उसे पकड़ लें, क्योंकि यही कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें हिदायत पर साबित क़दम रखे और हमारे दिलों को ईमान की मिठास से भर दे। आमीन।
📜 आयत 135-139 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 137
सूरा अन-निसा आयत 137 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग ईमान लाए उसके बाद फ़िर काफ़िर हो…सूरा आयत 137/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 135–139. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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