अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَوَّامِينَ بِالْقِسْطِ – न्याय और इंसाफ़ पर स्थापित रहने वाले, अदल को क़ायम करने वाले।
- شُهَدَاءَ لِلَّهِ – अल्लाह के लिए गवाही देने वाले, यानी गवाही को ख़ालिस अल्लाह के लिए अदा करने वाले।
- تَلْوُوا – गवाही को मरोड़ना, उसे बदलना या उसके शब्दों को घुमा-फिरा कर पेश करना।
- تُعْرِضُوا – गवाही देने से मुँह मोड़ना, उसे छिपाना या अदा न करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में ईमानवालों को एक बहुत ही अहम और ऊँचा हुक्म दे रहा है। वह फ़रमाता है: “ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! अल्लाह के लिए न्याय पर क़ायम रहने वाले बनो और इंसाफ़ की गवाही दो — चाहे वह गवाही तुम्हारे अपने ख़िलाफ़ ही क्यों न हो, या तुम्हारे माँ-बाप और रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।”
यानी मोमिन का फ़र्ज़ है कि वह सच्चाई और न्याय का पैरोकार हो, चाहे उसका फ़ायदा किसी और को हो और नुक़सान ख़ुद उसे या उसके अपनों को ही क्यों न पहुँचे। इस्लाम सिखाता है कि रिश्तेदारी, मोहब्बत, दुश्मनी या अपने फ़ायदे की वजह से कभी इंसाफ़ से न हटो। अगर गवाही सच्ची है तो उसे अदा करो, चाहे वह तुम्हारे ही ख़िलाफ़ जाए।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि जिस शख्स के बारे में गवाही दी जा रही है, अगर वह अमीर है या ग़रीब है, तो उसकी हैसियत को देखकर गवाही में फ़र्क़ न डालो। न अमीर की ख़ातिरदारी के लिए सच को छिपाओ, न ग़रीब पर तरस खाकर झूठ बोलो। अल्लाह उन दोनों से ज़्यादा जानता है कि उनके लिए क्या बेहतर है। तुम्हारा काम सिर्फ़ सच बोलना है, फ़ैसला अल्लाह के ज़िम्मे है।
इसके बाद अल्लाह तआला ने साफ़ तौर पर मना किया कि अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और जज़्बातों की पैरवी मत करो, क्योंकि यही चीज़ तुम्हें इंसाफ़ से भटका सकती है। और अगर कोई शख्स गवाही को मरोड़े — यानी उसे बदलकर पेश करे — या गवाही देने से मुँह मोड़े — यानी उसे छिपाए या अदा न करे — तो अल्लाह को उसके हर अमल की पूरी ख़बर है, और वह उसे उसका पूरा बदला देगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में इंसाफ़ और सच्चाई की कितनी अहमियत है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हर हाल में सच बोले, चाहे उसका नुक़सान ही क्यों न हो। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको इंसाफ़ पर क़ायम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 133-137 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 135
सूरा अन-निसा आयत 135 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानवालों मज़बूती के साथ इन्साफ़ पर क़ायम रहो और…सूरा आयत 135/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 133–137. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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