Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِثْقَالَ ذَرَّةٍ: एक छोटे से चींटी (लाल चींटी) के बराबर वज़न, यानी बहुत ही सूक्ष्म मात्रा।
- يُضَاعِفْهَا: उसे कई गुना बढ़ा देता है।
- مِن لَّدُنْهُ: अपनी ओर से, अपने विशेष अनुग्रह से।
- أَجْرًا عَظِيمًا: बहुत बड़ा प्रतिफल (जो जन्नत है)।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला अपने बंदों पर बिल्कुल भी ज़ुल्म नहीं करता। वह किसी के अच्छे कर्मों को कम नहीं करता, न ही किसी के बुरे कर्मों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। यहाँ तक कि अगर किसी ने एक छोटे से चींटी के बराबर भी नेकी की हो, तो अल्लाह उसे बरकत देकर कई गुना बढ़ा देता है। यानी वह एक छोटी सी नेकी को भी बहुत बड़ा अज्र (प्रतिफल) में बदल देता है। और इस पर भी वह अपनी ओर से, अपने विशेष अनुग्रह से, एक और बड़ा इनाम देता है — जो जन्नत है। यह अल्लाह का असीम दान और कृपा है कि वह न केवल नेकियों को कई गुना बढ़ाता है, बल्कि अपनी ओर से और भी अधिक देता है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की न्यायप्रियता: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला पूर्ण न्याय करने वाला है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, इसलिए हमें उस पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और उसके फैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए।
- छोटी नेकियों की अहमियत: अगर एक छोटी सी नेकी भी अल्लाह को पसंद आ जाए, तो वह उसे कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए हमें किसी भी अच्छे काम को छोटा नहीं समझना चाहिए — एक मुस्कान, एक अच्छा शब्द, या किसी की मदद का छोटा सा काम भी बहुत बड़ा इनाम ला सकता है।
- अल्लाह की असीम दया: अल्लाह सिर्फ न्याय ही नहीं करता, बल्कि अपनी दया और कृपा से और भी अधिक देता है। यह हमें उसकी रहमत की ओर आकर्षित करता है और उससे प्रेम करने की प्रेरणा देता है।
- आशावाद और उम्मीद: यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। चाहे हमारे अच्छे काम कितने ही कम हों, अल्लाह उन्हें कबूल करके बड़ा इनाम दे सकता है। यह हमें अच्छे काम करते रहने की ताकत देता है।
- अंतिम प्रतिफल की सच्चाई: यह आयत हमें याद दिलाती है कि असली इनाम आख़िरत में मिलेगा — जन्नत। इसलिए दुनिया के छोटे-मोटे फायदों के लिए अपनी नेकियों को नहीं बेचना चाहिए, बल्कि उस बड़े इनाम की तरफ देखना चाहिए जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार किया है।
📜 आयत 38-42 — सूरा अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 40
सूरा अन-निसा आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ख़ुदा तो हरगिज़ ज़र्रा बराबर भी ज़ुल्म नहीं करता बल्कि…सूरा आयत 40/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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