अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِيُطَاعَ: उनकी आज्ञा का पालन किया जाए।
- بِإِذْنِ اللَّهِ: अल्लाह की इच्छा और आदेश से।
- ظَلَمُوا أَنفُسَهُمْ: अपनी आत्माओं पर अत्याचार किया (गुनाह करके)।
- تَوَّابًا: बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला।
- رَّحِيمًا: बहुत दयालु।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत बयान किया है कि उसने जितने भी रसूल भेजे, उन सबको इसलिए भेजा कि उनकी आज्ञा का पालन किया जाए—परन्तु यह आज्ञाकारिता अल्लाह की इच्छा और उसकी तौफ़ीक़ (सहायता) से ही होती है। यानी रसूलों की इताअत (आज्ञापालन) वास्तव में अल्लाह की इताअत है, क्योंकि वे अल्लाह के आदेश से ही आदेश देते हैं।
इसके बाद अल्लाह तआला उन लोगों को संबोधित करता है जो अपने गुनाहों से अपनी आत्माओं पर ज़ुल्म करते हैं। वह उन्हें सिखाता है कि जब वे गुनाह कर बैठें, तो उन्हें चाहिए कि वे रसूल ﷺ की सेवा में हाज़िर हों, अपने गुनाहों पर शर्मिंदा हों, अल्लाह से माफ़ी माँगें और रसूल ﷺ से भी दुआ करवाएँ। अगर वे ऐसा करते, तो अल्लाह को बहुत अधिक तौबा क़बूल करने वाला और अत्यंत दयालु पाते।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हमेशा खुला है। चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाह कर ले, अगर वह सच्चे दिल से तौबा करे और अल्लाह के रसूल ﷺ की सुन्नत के अनुसार माफ़ी माँगे, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह अल्लाह की महान दया है कि उसने अपने बंदों के लिए तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है।
आज हम रसूल ﷺ की ज़िंदगी में मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी सुन्नत और उनकी सिखाई हुई दुआएँ हमारे लिए मौजूद हैं। हमें चाहिए कि गुनाह करने पर तुरंत तौबा करें, अल्लाह से माफ़ी माँगें और रसूल ﷺ की उम्मत होने के नाते उनके तरीक़े पर अमल करें। अल्लाह तआला अपने बंदों की तौबा से बहुत खुश होता है और उसे क़बूल करता है। यही अल्लाह की रहमत का असली रूप है।
📜 आयत 62-66 — अन-निसा
अनुवाद — अन-निसा 64
सूरा अन-निसा आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (रसूल) जब उन लोगों ने (नाफ़रमानी करके) अपनी जानों…सूरा आयत 64/176 — अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-निसा सुनें, अन-निसा अनुवाद, अन-निसा mp3, अन-निसा pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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