ग़ाफिर · 17/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
الْيَوْمَ تُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۚ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ ۝١٧
Al-Yawma tujzaa kullu nafsim bimaa kasabat; laa zulmal Yawm; innal laaha saree`ul hisaab
📖 हिंदी अर्थ
आज हर शख्स को उसके किए का बदला दिया जाएगा, आज किसी पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُجْزَىٰ: बदला दिया जाएगा, प्रतिफल दिया जाएगा।
  • بِمَا كَسَبَتْ: उसके अनुसार जो उसने कमाया (अच्छे या बुरे कर्म)।
  • لَا ظُلْمَ: कोई अत्याचार नहीं, कोई अन्याय नहीं।
  • سَرِيعُ الْحِسَابِ: हिसाब लेने में बहुत तेज़, जिसे किसी समय की आवश्यकता नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

आज का दिन वह दिन है जब हर आत्मा को उसके किए हुए कर्मों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा। जिसने दुनिया में नेकी की होगी, उसे नेकी का बदला मिलेगा, और जिसने बुराई की होगी, उसे बुराई का परिणाम भुगतना पड़ेगा। यह बदला इतना सटीक और न्यायपूर्ण होगा कि किसी के साथ ज़रा भी ज़ुल्म नहीं होगा—न किसी के गुनाह बढ़ाए जाएँगे, न उसकी नेकियाँ घटाई जाएँगी। हर अच्छाई का अच्छा बदला, हर बुराई का बुरा बदला—बिल्कुल सही माप के साथ।

यहाँ अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि उस दिन कोई अन्याय नहीं होगा, क्योंकि हिसाब लेने वाला स्वयं अल्लाह है, जो सबसे बड़ा न्यायी है। वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, और उसकी रहमत और अद्ल हर चीज़ पर छाई हुई है। अल्लाह का हिसाब इतना तेज़ है कि वह एक ही पल में सभी प्राणियों का हिसाब ले लेगा—न किसी को इंतज़ार करना पड़ेगा, न किसी का हिसाब किसी दूसरे के हिसाब में रुकावट डालेगा। उसका ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है, इसलिए उसे किसी समय या प्रयास की ज़रूरत नहीं।

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया का जीवन एक परीक्षा है, और आख़िरत का दिन उस परीक्षा का नतीजा है। जो लोग अल्लाह के दीन पर चलते हैं और नेक कर्म करते हैं, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है, और जो लोग गुनाहों में डूबे रहते हैं, उनके लिए वह दिन बड़ी चेतावनी है। अल्लाह तआला ने यह भी फ़रमाया कि उस दिन को दूर न समझो—वह बहुत करीब है, क्योंकि अल्लाह का हिसाब तेज़ है और उसकी शक्ति असीमित है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। हर पल हम जो कर रहे हैं, वह हमारे हिसाब में दर्ज हो रहा है। आज हम जिस चीज़ को छोटा समझते हैं, वह उस दिन हमारे सामने आएगी। अल्लाह की रहमत और अद्ल पर भरोसा रखते हुए हमें नेकी की राह पर चलना चाहिए, क्योंकि उस दिन कोई सिफ़ारिश या दुनियावी ताक़त काम नहीं आएगी—सिर्फ़ अच्छे कर्म ही काम आएँगे। यह आयत मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उनका रब उनके साथ कभी ज़ुल्म नहीं करेगा, और गुनाहगारों के लिए चेतावनी है कि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है।

🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — ग़ाफिर

15رَفِيعُ الدَّرَجَاتِ ذُو الْعَرْشِ يُلْقِي الرُّوحَ مِنْ أَمْرِهِ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ لِيُنذِرَ يَوْمَ التَّلَاقِ
ख़ुदा तो बड़ा आली मरतबा अर्श का मालिक है, वह अपने बन्दों में से जिस पर चाहता है अपने हुक्म से 'वही' नाज़िल करता है ताकि (लोगों को) मुलाकात (क़यामत) के दिन से डराएं
16يَوْمَ هُم بَارِزُونَ ۖ لَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِنْهُمْ شَيْءٌ ۚ لِّمَنِ الْمُلْكُ الْيَوْمَ ۖ لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ
जिस दिन वह लोग (क़ब्रों) से निकल पड़ेंगे (और) उनको कोई चीज़ ख़ुदा से पोशीदा नहीं रहेगी (और निदा आएगी) आज किसकी बादशाहत है ( फिर ख़ुदा ख़़ुद कहेगा ) ख़ास ख़ुदा की जो अकेला (और) ग़ालिब है
17الْيَوْمَ تُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۚ لَا ظُلْمَ الْيَوْمَ ۚ إِنَّ اللَّهَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
आज हर शख्स को उसके किए का बदला दिया जाएगा, आज किसी पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा बेशक ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
18وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ الْآزِفَةِ إِذِ الْقُلُوبُ لَدَى الْحَنَاجِرِ كَاظِمِينَ ۚ مَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ حَمِيمٍ وَلَا شَفِيعٍ يُطَاعُ
(ऐ रसूल) तुम उन लोगों को उस दिन से डराओ जो अनक़रीब आने वाला है जब लोगों के कलेजे घुट घुट के (मारे डर के) मुँह को आ जाएंगें (उस वक्त) न तो सरकशों का कोई सच्चा दोस्त होगा और न कोई ऐसा सिफारिशी जिसकी बात मान ली जाए
19يَعْلَمُ خَائِنَةَ الْأَعْيُنِ وَمَا تُخْفِي الصُّدُورُ
ख़ुदा तो ऑंखों की दुज़दीदा (ख़यानत की) निगाह को भी जानता है और उन बातों को भी जो (लोगों के) सीनों में पोशीदा है
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अनुवाद — ग़ाफिर 17

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Tuesday, August 18, 2026

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