ग़ाफिर · 38/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ ۝٣٨
Wa qaalal lazeee aamana yaa qawmit tabi`ooni ahdikum sabeelar rashaad
📖 हिंदी अर्थ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّبِعُونِ – मेरी पैरवी करो, मेरा अनुसरण करो।
  • أَهْدِكُمْ – मैं तुम्हें मार्गदर्शन दूँगा, सीधा रास्ता दिखाऊँगा।
  • سَبِيلَ الرَّشَادِ – भलाई और सत्य का मार्ग, हिदायत का रास्ता।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस ईमानदार व्यक्ति की दयालुता और नसीहत को बयान करती है जो फ़िरऔन की क़ौम में से था, लेकिन उसने अल्लाह पर ईमान ला रखा था। वह अपनी क़ौम के लोगों को नेकी और भलाई की ओर बुला रहा था। उसने अपनी क़ौम से कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरी बात मानो, मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हें सीधे और सत्य के मार्ग पर चलाऊँगा।"

वह उन्हें उस रास्ते की ओर बुला रहा था जो उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है। उसका उद्देश्य उन्हें अल्लाह की इबादत, उसकी वहदानियत (एकता) और उसके आदेशों का पालन करने की ओर ले जाना था। वह उन्हें फ़िरऔन के झूठे वादों और धोखे से बचाना चाहता था, और उन्हें उस रास्ते की ओर बुला रहा था जो अल्लाह की रज़ा और उसकी मग़फिरत तक पहुँचाता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन अपनी क़ौम की भलाई के लिए हमेशा फ़िक्र करता है। वह चाहता है कि उसके लोग भी उसी सच्चाई को पहचानें जो उसने पहचानी है। वह उन्हें गुमराही और अंधकार से निकालकर हिदायत और रोशनी की ओर ले जाना चाहता है।

यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है कि हमें भी अपने परिवार, अपने दोस्तों और अपनी क़ौम के लोगों को भलाई की ओर बुलाना चाहिए। हमें उन्हें सच्चे रास्ते की दावत देनी चाहिए, जैसे इस नेक बंदे ने दी। अल्लाह तआला हमें भी यह तौफ़ीक़ दे कि हम अपने आस-पास के लोगों को सीधे रास्ते की ओर बुलाएँ और उनकी भलाई का ज़रिया बनें। याद रखिए, जो व्यक्ति किसी को हिदायत की ओर बुलाता है, उसे उतना ही सवाब मिलता है जितना उस अनुसरण करने वाले को मिलता है, बिना किसी के सवाब में कमी किए।



📜 आयत 36-40 — सूरा ग़ाफिर

36وَقَالَ فِرْعَوْنُ يَا هَامَانُ ابْنِ لِي صَرْحًا لَّعَلِّي أَبْلُغُ الْأَسْبَابَ
और फिरऔन ने कहा ऐ हामान हमारे लिए एक महल बनवा दे ताकि (उस पर चढ़ कर) रसतों पर पहुँच जाऊ
37أَسْبَابَ السَّمَاوَاتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُ كَاذِبًا ۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرْعَوْنَ سُوءُ عَمَلِهِ وَصُدَّ عَنِ السَّبِيلِ ۚ وَمَا كَيْدُ فِرْعَوْنَ إِلَّا فِي تَبَابٍ
(यानि) आसमानों के रसतों पर फिर मूसा के ख़ुदा को झांक कर (देख) लूँ और मैं तो उसे यक़ीनी झूठा समझता हूँ, और इसी तरह फिरऔन की बदकिरदारयाँ उसको भली करके दिखा दी गयीं थीं और वह राहे रास्ता से रोक दिया गया था, और फिरऔन की तद्बीर तो बस बिल्कुल ग़ारत गुल ही थीं
38وَقَالَ الَّذِي آمَنَ يَا قَوْمِ اتَّبِعُونِ أَهْدِكُمْ سَبِيلَ الرَّشَادِ
और जो शख्स (दर पर्दा) ईमानदार था कहने लगा भाईयों मेरा कहना मानों मैं तुम्हें हिदायत के रास्ते दिख दूंगा
39يَا قَوْمِ إِنَّمَا هَٰذِهِ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا مَتَاعٌ وَإِنَّ الْآخِرَةَ هِيَ دَارُ الْقَرَارِ
भाईयों ये दुनियावी ज़िन्दगी तो बस (चन्द रोज़ा) फ़ायदा है और आखेरत ही हमेशा रहने का घर है
40مَنْ عَمِلَ سَيِّئَةً فَلَا يُجْزَىٰ إِلَّا مِثْلَهَا ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا مِّن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ يُرْزَقُونَ فِيهَا بِغَيْرِ حِسَابٍ
जो बुरा काम करेगा तो उसे बदला भी वैसा ही मिलेगा, और जो नेक काम करेगा मर्द हो या औरत मगर ईमानदार हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में दाख़िल होंगे वहाँ उन्हें बेहिसाब रोज़ी मिलेगी
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 38

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Thursday, October 1, 2026

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