अश-शूरा · 9/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۖ فَاللَّهُ هُوَ الْوَلِيُّ وَهُوَ يُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ ۝٩
Amit takhazoo min dooniheee awliyaaa`a fallaahu Huwal Waliyyu wa Huwa yuhyil mawtaa wa Huwa `alaa kulli shai`in Qadeer
📖 हिंदी अर्थ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा (दूसरे) कारसाज़ बनाए हैं तो कारसाज़ बस ख़ुदा ही है और वही मुर्दों को ज़िन्दा करेगा और वही हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْلِيَاءَ (औलिया): संरक्षक, सहायक, मित्र।
  • الْوَلِيُّ (अल-वली): सच्चा संरक्षक, जो अपने बंदों का कार्य संभालने वाला और उनकी सहायता करने वाला हो।
  • يُحْيِي الْمَوْتَىٰ (युह्यिल-मौता): मृतकों को जीवित करता है (पुनरुत्थान के दिन)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की स्थिति को स्पष्ट करती है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरों को अपना संरक्षक और सहायक बनाते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या इन मुशरिकों ने अल्लाह के सिवा दूसरों को अपना वली (संरक्षक) बना लिया है? यह उनकी बड़ी भूल है, क्योंकि सच्चा वली तो केवल अल्लाह ही है। वही है जो अपने बंदों की देखभाल करता है, उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है, और अपने ईमानवाले बंदों की हर मामले में मदद करता है।

अल्लाह के सिवा जिन्हें ये लोग अपना वली बनाते हैं—चाहे वे मूर्तियाँ हों, लोग हों या कोई और चीज़—वे न तो कोई लाभ पहुँचा सकते हैं और न ही कोई हानि। वे न तो किसी की मदद कर सकते हैं और न ही किसी को बचा सकते हैं। अल्लाह ही वह है जो मृतकों को जीवित करेगा, उन्हें क़ब्रों से उठाएगा और हिसाब के लिए इकट्ठा करेगा। वह हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखता है—उसकी कुदरत (शक्ति) से कोई चीज़ बाहर नहीं है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपना पूरा भरोसा और सहारा केवल अल्लाह पर रखना चाहिए। जब हम अल्लाह को अपना वली बना लेते हैं, तो हमें किसी और की ज़रूरत नहीं रहती। अल्लाह अपने बंदे की मदद करता है, उसे मुश्किलों से निकालता है, और उसे वह ताकत देता है जो कोई और नहीं दे सकता। यही सच्ची कामयाबी है—अल्लाह से जुड़ना और उसी पर भरोसा करना।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी भी है: अल्लाह मृतकों को जीवित करने की शक्ति रखता है, और यही उसकी कुदरत का सबूत है कि वह हर चीज़ पर क़ादिर है। जो अल्लाह पर भरोसा करता है, उसे कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की शक्ति असीमित है। वह हर मुश्किल को आसान कर सकता है, हर दुख को दूर कर सकता है, और हर दुआ को क़बूल कर सकता है।

तो आओ, हम अपने जीवन में अल्लाह को ही अपना वली बनाएँ, उसी की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और उसी पर भरोसा रखें। यही हमारी सच्ची भलाई और कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें इस तौफ़ीक़ (सफलता) को प्रदान करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अश-शूरा

7وَكَذَٰلِكَ أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لِّتُنذِرَ أُمَّ الْقُرَىٰ وَمَنْ حَوْلَهَا وَتُنذِرَ يَوْمَ الْجَمْعِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ فَرِيقٌ فِي الْجَنَّةِ وَفَرِيقٌ فِي السَّعِيرِ
और हमने तुम्हारे पास अरबी क़ुरान यूँ भेजा ताकि तुम मक्का वालों को और जो लोग इसके इर्द गिर्द रहते हैं उनको डराओ और (उनको) क़यामत के दिन से भी डराओ जिस (के आने) में कुछ भी शक़ नहीं (उस दिन) एक फरीक़ (मानने वाला) जन्नत में होगा और फरीक़ (सानी) दोज़ख़ में
8وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَعَلَهُمْ أُمَّةً وَاحِدَةً وَلَٰكِن يُدْخِلُ مَن يَشَاءُ فِي رَحْمَتِهِ ۚ وَالظَّالِمُونَ مَا لَهُم مِّن وَلِيٍّ وَلَا نَصِيرٍ
और अगर ख़ुदा चाहता तो इन सबको एक ही गिरोह बना देता मगर वह तो जिसको चाहता है (हिदायत करके) अपनी रहमत में दाख़िल कर लेता है और ज़ालिमों का तो (उस दिन) न कोई यार है और न मददगार
9أَمِ اتَّخَذُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۖ فَاللَّهُ هُوَ الْوَلِيُّ وَهُوَ يُحْيِي الْمَوْتَىٰ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क्या उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा (दूसरे) कारसाज़ बनाए हैं तो कारसाज़ बस ख़ुदा ही है और वही मुर्दों को ज़िन्दा करेगा और वही हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है
10وَمَا اخْتَلَفْتُمْ فِيهِ مِن شَيْءٍ فَحُكْمُهُ إِلَى اللَّهِ ۚ ذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبِّي عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ
और तुम लोग जिस चीज़ में बाहम एख्तेलाफ़ात रखते हो उसका फैसला ख़ुदा ही के हवाले है वही ख़ुदा तो मेरा परवरदिगार है मैं उसी पर भरोसा रखता हूँ और उसी की तरफ रूजू करता हूँ
11فَاطِرُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ جَعَلَ لَكُم مِّنْ أَنفُسِكُمْ أَزْوَاجًا وَمِنَ الْأَنْعَامِ أَزْوَاجًا ۖ يَذْرَؤُكُمْ فِيهِ ۚ لَيْسَ كَمِثْلِهِ شَيْءٌ ۖ وَهُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ
सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला (वही) है उसी ने तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स के जोड़े बनाए और चारपायों के जोड़े भी (उसी ने बनाए) उस (तरफ) में तुमको फैलाता रहता है कोई चीज़ उसकी मिसल नहीं और वह हर चीज़ को सुनता देखता है
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अनुवाद — अश-शूरा 9

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Tuesday, August 18, 2026

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